अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 25 वर्ष बाद आशा कार्यकर्ता का चयन, ग्रामीणों में खुशी
जमुई। जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) वर्ष 2005 से संचालित है, लेकिन गुरमाहा एवं चोरमारा गांवों में पहली बार आशा कार्यकर्ता (आशा दीदी) का चयन 4 जून 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
बताया जाता है कि इन क्षेत्रों में लगभग 25 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित रही है। ऐसे में आशा कार्यकर्ता का चयन होना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे निचली और महत्वपूर्ण कड़ी होती हैं, जो गांव स्तर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, परिवार कल्याण तथा विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का कार्य करती हैं।
ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली बार उनके गांवों को स्वास्थ्य विभाग की मूलभूत सेवाओं से सीधे जोड़ने की पहल हुई है, जिससे आने वाले समय में स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं के चयन से क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ेगी तथा गर्भवती महिलाओं, बच्चों और जरूरतमंद परिवारों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
25 वर्षों बाद गुरमाहा और चोरमारा में आशा कार्यकर्ता का चयन होना न केवल प्रशासनिक उपलब्धि है, बल्कि यह अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण की नई उम्मीद भी लेकर आया है।
Sono, Jamui | Jun 4, 2026