मेरठ में शहीद के पार्थिव शरीर से लिपटकर रोई पत्नी:* बोली- मुझे भी साथ ले जाओ, गांव में भारत माता की जय के लगे जयकारे
मेरठ में सेना में नायक का पार्थिव शरीर पैतृक गांव रछौती में सुबह 10.30 बजे पहुंचा। पत्नी ताबूत से लिपट गईं और दहाड़े मारकर रोने लगीं। घर से 200 मीटर दूर खेत में उनका राजकीय और सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
9 साल के बड़े बेटे हिमांशु ने चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान मौजूद सैकड़ों लोगों ने 'जनेश्वर कुमार अमर रहें' के नारे लगाए।
तिरंगे में लिपटे पति के पार्थिव शरीर को देखकर पत्नी ताबूत से लिपट गई और दहाड़ मारकर रोने लगी। बोली-मुझे भी साथ ले जाओ, अब मुझे भी नहीं रहना।
जनेश्वर भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वो सेना में नायक के पद पर तैनात थे। पोस्टिंग हिमाचल के शिमला में थी। 15 दिन पहले 1 जुलाई को हुए सड़क हादसे में जनेश्वर सहित कई फौजी घायल हुए थे। सभी घायलों को मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराया जा रहा था। जिसमें बुधवार को जनेश्वर की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
12 साल पहले भारतीय सेना में हुआ था चयन
जनेश्वर 2014 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। अपनी लगन, अनुशासन और उत्कृष्ट सेवा के चलते उन्हें दो साल पहले नायक के पद पर प्रमोशन मिला था। वह भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
जनेश्वर तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई प्रदीप भी भारतीय सेना में सिपाही के पद पर तैनात हैं। जबकि मझले भाई घर पर खेती का काम देखते हैं।
जनेश्वर की शादी 2015 में हुई थी। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। बडा बेटा हिमांशु (9), मान्या (6), लकी (4) हैं।