हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की योजनाओं से आत्मनिर्भर बन रहे हैं अनुसूचित जाति के परिवार
ऋण सहायता से जिले के 2537 लोगों ने सरकार की योजनाओं का लाभ उठा कर लिखी सफलता की कहानी
भिवानी, 30 सितंबर। हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम द्वारा अनुसूचित जाति के परिवारों को स्वरोजगार से जोडक़र आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। निगम के माध्यम से ऋण सहायता लेकर अनेक परिवार किरयाणा दुकान, मनियारी, कॉस्मेटिक दुकान, ब्यूटी पार्लर एवं सैलून सहित विभिन्न स्वरोजगार चला रहे हैं। निगम द्वारा जिला में इन योजनाओं के तहत जिला में अब तक कुल 2537 लोगों को ऋण सहायता दी जा चुकी है।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम द्वारा अनुसूचित जाति के परिवारों को स्वरोजगार चलाने के लिए एक लाख रुपए तक ऋण प्रदान किया जाता है, जिसमें 50 हजार रुपये तक की अनुदान राशि प्रदान की जाती है। निगम की स्वरोजगार योजनाएं पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर प्रदान कर रही हैं। इन योजनाओं के तहत जिला में अब तक कुल 2537 लोगों को ऋण सहायता दी जा चुकी है। आर्थिक सहायता से ये परिवार अपने छोटे व्यवसायों का विस्तार कर बेहतर आजीविका अर्जित कर रहे हैं।
बॉक्स
सफलता की कहानी- लाभार्थियों की जुबानी
- ओबरा की ज्योति ने ब्यूटी पार्लर को बनाया आत्मनिर्भरता का माध्यम
ओबरा निवासी ज्योति के अनुसार उनका सपना अपने पैरों पर खड़े होकर एक सफल महिला उद्यमी बनने का था। उन्होंने ब्यूटी पार्लर का काम शुरू किया, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे अपने पार्लर में आधुनिक उपकरण और नए ब्यूटी प्रोडक्ट्स नहीं रख पा रही थीं। ऐसे में उन्हें निगम की स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत एक लाख रुपये का ऋण और 50 हजार रुपये की सब्सिडी मिलने से ज्योति ने अपने पार्लर का आधुनिकीकरण किया तथा नए उपकरण खरीदे। इससे उनके काम में सुधार हुआ और आमदनी बढ़ी।
बॉक्स
- भूप सिंह ने किरयाना दुकान का विस्तार कर बढ़ाई आमदनी
गांव रतेरा निवासी भूप सिंह ने बताया कि पहले वे किरयाणा की एक छोटी सी दुकान थी। सीमित पूंजी के कारण वे दुकान में पर्याप्त सामान नहीं रख पाते थे। निगम की योजना के तहत उन्हें एक लाख रुपये का ऋण और 50 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इससे उन्होंने दुकान में राशन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का स्टॉक बढ़ाया। इससे उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिली।
बॉक्स
- अजय ने डिजीटल सेवाओं के माध्यम से मजबूत किया स्वरोजगार
गांव जताई निवासी अजय के अनुसार वे भिवानी शहर में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालित करते हैं। अपने केंद्र पर लोगों को बेहतर डिजीटल सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए उन्हें नए कंप्यूटर, प्रिंटर और इन्वर्टर जैसी सुविधाओं की आवश्यकता थी। निगम की योजना के तहत एक लाख रुपये का ऋण और 50 हजार रुपये की सब्सिडी मिलने से अजय ने अपने केंद्र की सुविधाओं को बेहतर बनाया।
बॉक्स
- सुमन ने जनरल स्टोर का विस्तार कर बनाई नई पहचान
बामला-द्वितीय निवासी सुमन अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए एक छोटा जनरल स्टोर चलाती थीं। व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए उन्हें अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता थी। निगम की योजना के तहत उन्हें एक लाख 96 हजार रुपये का टर्म लोन और 50 हजार रुपये की सरकारी सब्सिडी मिली। इस राशि से उन्होंने अपने स्टोर का विस्तार किया, थोक में सामान खरीदा और दुकान को आधुनिक बनाया। वे अपने कारोबार के माध्यम से परिवार की आर्थिक उन्नति में योगदान दे रही हैं।