*कृषि कार्यशाला आयोजित कर प्राकृतिक खेती अपनाने को किसान को किया गया प्रेरित, स्वस्थ मिट्टी एवं स्वस्थ समाज की दिशा में कदम बढ़ाने का संदेश*
कृषि विभाग, बिहार सरकार के निर्देशानुसार आज दिनांक 12 जून, 2026 को आत्मा, जहानाबाद द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, गंधार में प्राकृतिक खेती विषय पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ भाजपा जिला अध्यक्ष सह बीस सूत्री सदस्य श्री धीरज कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक आत्मा श्रीमती संभावना, वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान कृषि विज्ञान केंद्र गंधार डॉ. मुनेश्वर प्रसाद, भाजपा के पूर्व जिला मंत्री श्री विजय कुमार सत्कार, किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष श्री विनोद कुमार, महामंत्री श्री रण विजय कुमार, श्री विश्वनाथ कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं कृषि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
उपस्थित कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अधिक से अधिक प्राकृतिक खेती अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार प्रभावित होती है और अधिक उत्पादन की होड़ में मिट्टी के स्वास्थ्य की अनदेखी का दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरता को बनाए रखती है बल्कि सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन में भी सहायक है।
जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक आत्मा ने बताया कि प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत वर्तमान में जहानाबाद जिले में 6 क्लस्टरों का संचालन किया जा रहा है। प्रत्येक क्लस्टर में 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 125 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैं। इस प्रकार जिले में कुल 300 हेक्टेयर क्षेत्र में 750 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में दो अतिरिक्त क्लस्टरों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके चयन की प्रक्रिया प्रगति पर है।
कार्यशाला के दौरान वैज्ञानिक डॉ. वाजिद हसन, वर्षा कुमारी, डॉ. दिनेश महतो, डॉ. मनोज कुमार एवं सहायक निदेशक रसायन-सह-नोडल पदाधिकारी, प्राकृतिक खेती मिशन सुश्री श्वेता प्रिया ने प्राकृतिक खेती की उपयोगिता एवं तकनीकों के संबंध में किसानों को देशी गाय आधारित कृषि प्रणाली अपनाने तथा जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी अर्क, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र एवं अग्नेयास्त्र जैसे प्राकृतिक उत्पादों के निर्माण एवं उपयोग की विधियों से अवगत कराया।
विशेषज्ञों ने बताया कि नीम, गौमूत्र, गोबर, गुड़, बेसन एवं प्राकृतिक संसाधनों से तैयार जैविक उत्पादों के प्रयोग से रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जा सकती है तथा इससे उत्पादन लागत में भी कमी आती है तथा मिट्टी एवं जल संसाधनों का संरक्षण होता है तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं पौष्टिक खाद्यान्न उपलब्ध होता है।
कार्यशाला में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए भी किसानों को फलदार वृक्षों एवं बागवानी को बढ़ावा देने की सलाह भी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा वृक्षों की सूखी पत्तियों, टहनियों एवं फसल अवशेषों का उपयोग से प्राकृतिक खेती में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
प्रगतिशील कृषक श्री विश्वनाथ यादव एवं श्री शिव नारायण यादव ने अपने अनुभव साझा करते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से लागत में कमी आती है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है तथा उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
कार्यक्रम में कृषि सखियों, कृषि विज्ञान केंद्र एवं आत्मा के कर्मियों, विभिन्न जनप्रतिनिधियों तथा जिले के सैकड़ों महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया।
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16 views | Jehanabad, Bihar | Jun 12, 2026