उरई में इलाज के नाम पर खेल: निजी अस्पतालों में लूट, मरीजों की जान से खिलवाड़!
बिना विशेषज्ञ डॉक्टर और संसाधनों के चल रहे निजी अस्पताल?
फर्जी व संदिग्ध जांच रिपोर्टों से मरीजों की जिंदगी खतरे में?
शिकायतों और मौतों के बावजूद कार्रवाई शून्य, संरक्षण के आरोप?
जनपद जालौन के उरई शहर में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे निजी नर्सिंग होम, पैथोलॉजी सेंटर और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की हकीकत अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि यहां इलाज नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों की जेब काटने का खेल चल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई ऐसे निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिनके पास न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही मानकों के अनुरूप उपकरण और संसाधन।
इसके बावजूद खुलेआम भर्ती, ऑपरेशन और इलाज किया जा रहा है।
गंभीर बात यह है कि कई जगहों पर आपातकालीन सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी मरीजों को भर्ती कर भारी भरकम बिल थमाए जा रहे हैं।
पैथोलॉजी सेंटरों की स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। आरोप है कि बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट की निगरानी के जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही हैं।
कई मामलों में रिपोर्ट इतनी गलत पाई गई कि स्वस्थ व्यक्ति को गंभीर बीमारी का मरीज बना दिया गया, जबकि गंभीर मरीज को सामान्य बताकर उसकी जान जोखिम में डाल दी गई।
अल्ट्रासाउंड और अन्य जांच सेवाओं में भी धांधली के आरोप सामने आ रहे हैं।
मरीजों को एक से दूसरे सेंटर पर भेजकर अनावश्यक जांचें कराई जाती हैं और मोटी रकम वसूली जाती है। ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोग इस जाल में सबसे ज्यादा फंसते हैं।
बीते समय में कई निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मौत के मामले भी सामने आए हैं।
परिजनों ने लापरवाही, गलत दवा और गलत रिपोर्ट को कारण बताया, लेकिन हर बार जांच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर कार्रवाई और जांच अभियान की बात जरूर करता है, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता।
आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है और कुछ समय बाद वही संस्थान फिर से चालू हो जाते हैं।
इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नर्सिंग होम या पैथोलॉजी सेंटर के संचालन के लिए निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है। योग्य डॉक्टर, प्रशिक्षित स्टाफ, वैध लाइसेंस और आधुनिक उपकरण के बिना इलाज करना सीधे-सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई करेगा?
क्या मानक विहीन अस्पतालों और जांच केंद्रों पर बुलडोजर चलेगा या फिर मरीजों की जान से खेल का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?
जनपदवासियों की नजरें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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