प्रजनन काल में यमुना नदी में धड़ल्ले से अवैध मत्स्य आखेट, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
डीएम के प्रतिबंध आदेशों के बावजूद यमुना में खुलेआम जाल, जलीय जैव विविधता पर मंडरा रहा खतरा
ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच और अवैध मत्स्य आखेट पर तत्काल रोक लगाने की उठाई मांग
✒️ रिपोर्ट : पिंटू तिवारी
फतेहपुर। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मत्स्य प्रजनन काल के दौरान प्राकृतिक जलाशयों में मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद फतेहपुर जनपद की यमुना नदी में कथित रूप से बड़े पैमाने पर अवैध मत्स्य आखेट जारी होने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि खागा तहसील के किशनपुर थाना क्षेत्र सहित कई घाटों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में नावों के माध्यम से जाल डालकर मछलियों का शिकार किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों द्वारा अभी नहीं की गई है।
फतेहपुर/खागा। मत्स्य प्रजनन काल के दौरान शासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद यमुना नदी में कथित रूप से अवैध मत्स्य आखेट जारी रहने को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। ग्रामीणों का आरोप है कि थाना किशनपुर क्षेत्र के किशनपुर, असहट, गुरुवल, गढ़ीवा, मड़ौली घाट तथा आसपास के कई स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में मछुआरे नावों के माध्यम से जाल डालकर मछलियों का शिकार कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार दादों यमुना पुल के आसपास प्रतिदिन लगभग 20 से 25 नावें खड़ी रहती हैं और तड़के सुबह 3 बजे से 7 बजे के बीच बड़े पैमाने पर मत्स्य आखेट किया जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि यह गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से यह सिलसिला लगातार जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रजनन काल में इस प्रकार का मत्स्य आखेट मछलियों के अंडों और बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन रहा है, जिससे यमुना नदी की जलीय जैव विविधता प्रभावित हो सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिदिन सुबह महावतपुर और असहट की ओर से पिकअप वाहनों में बड़ी मात्रा में मछलियां विभिन्न बाजारों तक पहुंचाई जाती हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह पूरा कार्य खुलेआम हो रहा है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।
ग्रामीणों ने मत्स्य विभाग, राजस्व विभाग तथा तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रतिबंधित अवधि में अवैध मत्स्य आखेट करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन एवं मत्स्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना शेष है। मामले के सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रजनन काल में यमुना नदी में अवैध मत्स्य आखेट के आरोप।
किशनपुर थाना क्षेत्र के कई घाटों का नाम सामने आया।
ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में नावों से मत्स्य आखेट होने का दावा किया।
जलीय जैव विविधता और सरकारी राजस्व को नुकसान की आशंका जताई।
उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग।
पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के लिए प्रजनन काल में मत्स्य आखेट पर लगाए गए प्रतिबंधों का पालन अत्यंत आवश्यक माना जाता है। यदि स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल पर्यावरण बल्कि भविष्य की मत्स्य संपदा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और संबंधित विभागों की आधिकारिक कार्रवाई पर रहेगी।
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एनडी न्यूज़ आमजन, मत्स्य विभाग और प्रशासन से अपील करता है कि यमुना नदी सहित सभी प्राकृतिक जलाशयों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। यदि कहीं प्रतिबंधित अवधि में अवैध मत्स्य आखेट हो रहा है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। जलीय जैव विविधता की रक्षा करना आने वाली पीढ़ियों के हित में आवश्यक है।
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