1955 से ग्रामीण शिक्षा की अलख जगा रहा बिरौली का ऐतिहासिक संस्थान, डीएम ने लिया जायजा
* 30 बीघे में फैले संस्थान का जिलाधिकारी श्री रोशन कुशवाहा व डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने किया निरीक्षण, पुराने गौरव और वर्तमान व्यवस्था की ली जानकारी
समस्तीपुर : आजादी के बाद ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा की नई राह खोलने वाले जिले के ऐतिहासिक ग्रामीण उच्च अध्ययन संस्थान, बिरौली का गुरुवार को जिलाधिकारी श्री रोशन कुशवाहा एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने निरीक्षण किया। करीब सात दशक पुराने इस संस्थान से जुड़े इतिहास, शैक्षणिक व्यवस्था एवं वर्तमान गतिविधियों की अधिकारियों ने जानकारी ली और संस्थान की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
वर्ष 1955 में स्थापित यह संस्थान करीब 30 बीघा क्षेत्र में संचालित है। स्थापना के समय इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को उच्च अध्ययन एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विषयों में शिक्षा उपलब्ध कराना था। उस दौर में यह संस्थान भारत सरकार के अधीन संचालित होता था तथा केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से इसकी शैक्षणिक गतिविधियां आगे बढ़ती थीं।
संस्थान के शुरुआती दौर में विद्यार्थियों को ‘डिप्लोमा इन रूरल सर्विसेज’ की उपाधि प्रदान की जाती थी, जिसे स्नातक स्तर के समकक्ष माना जाता था। वर्ष 1975-76 में यह योजना बंद हो गई। इसके बाद संस्थान के शैक्षणिक स्वरूप में बदलाव आया।
बाद के दौर में तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के प्रयासों से संस्थान को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा से जोड़ा गया और यहां इंटरमीडिएट एवं स्नातक स्तर की पढ़ाई शुरू हुई। इस बदलाव ने संस्थान को ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में नई दिशा प्रदान की।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी ने संस्थान के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन किया तथा उपलब्ध शैक्षणिक एवं आधारभूत सुविधाओं की जानकारी ली। संस्थान से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और इसकी शैक्षणिक विरासत के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की गई।
बताया गया कि वर्तमान में संस्थान के निदेशक का दायित्व जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास है और लंबे समय से जिला शिक्षा पदाधिकारी इस जिम्मेदारी का निर्वहन करते आ रहे हैं।
ग्रामीण उच्च अध्ययन संस्थान, बिरौली की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार और बदलते शैक्षणिक परिदृश्य की महत्वपूर्ण कहानी को दर्शाती है। सात दशक बाद भी संस्थान का ऐतिहासिक महत्व जिले की शैक्षणिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
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Patna, Bihar | Sep 18, 2026