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सब याद रखा जाएगा #किसान_एकता_जिंदाबाद @harpalthakurmp

1.3k views | Sehore Nagar, Sehore | Jan 11, 2022

MORE NEWS

• गांवों में जल प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा, पानी समितियां संभालेंगी नल-जल योजनाओं की जिम्मेदारी

• जानवर नहलाने, गाड़ी धोने और कृषि कार्यों में उपयोग से लेकर अन्य पानी के अव्यय पर लगेगा जुर्माना

                   ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं के बेहतर संचालन, रखरखाव एवं पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर पानी समितियों का गठन किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत पानी समितियां जल योजनाओं के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

      पानी समितियां ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी गांवों में नल-जल योजना के संचालन, संधारण, जल वितरण व्यवस्था और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगी। समिति पाइप लाइन, पंप, टंकी, वाल्व, मीटर सहित जल आपूर्ति से जुड़े सभी संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

      समिति का उद्देश्य ग्रामीणों में जल योजनाओं के प्रति सामूहिक स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना होगा। जल आपूर्ति योजना का प्रचार-प्रसार, ग्रामीणों को जागरूक करना और पेयजल के उचित उपयोग के लिए प्रेरित करना भी समिति की जिम्मेदारी होगी।

पानी के दुरुपयोग पर लगेगा जुर्माना

      जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पानी समितियों को जल अपव्यय रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। यदि कोई उपभोक्ता पेयजल का दुरुपयोग करते हुए पाया जाता है, जैसे नल के पानी से वाहन धोना, मवेशियों को नहलाना, कृषि कार्यों में पेयजल का उपयोग करना या नल कनेक्शन से सीधे मोटर पंप लगाकर पानी खींचना, तो समिति कार्रवाई की अनुशंसा कर सकेगी।

      ऐसे मामलों में पहली बार जल अपव्यय करने पर न्यूनतम 100 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं एक माह में दो बार से अधिक जल अपव्यय पाए जाने पर न्यूनतम 500 रुपये का जुर्माना और पेयजल आपूर्ति बंद करने की अनुशंसा ग्राम पंचायत को की जा सकेगी।

      यदि कोई उपभोक्ता लगातार तीन माह तक जल प्रभार का भुगतान नहीं करता है, तो पानी समिति पेयजल आपूर्ति स्थगित करने की अनुशंसा ग्राम पंचायत को कर सकेगी। समय पर जल शुल्क जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं पर बकाया राशि के 5 से 10 प्रतिशत तक शास्ति लगाने का प्रस्ताव भी समिति दे सकेगी।

स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण पेयजल की होगी निगरानी

      पानी समिति यह सुनिश्चित करेगी कि ग्रामीणों को मिलने वाला पेयजल भौतिक, रासायनिक एवं जीवाणु प्रदूषण से मुक्त हो और निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध कराया जाए। समिति नियमित अंतराल पर जल गुणवत्ता परीक्षण कराएगी तथा जल की मात्रा और गुणवत्ता से संबंधित जानकारी जल पोर्टल पर दर्ज करेगी।

      जल वितरण में समानता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समिति गांवों के सभी मोहल्लों, बसाहटों और टोलों में उचित जल आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने में सहयोग करेगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों तथा कमजोर वर्गों को पेयजल उपलब्धता में प्राथमिकता दी जाएगी। पानी समितियां जल आपूर्ति से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए ग्राम पंचायत, मध्य प्रदेश जल निगम, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करेंगी। इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और नल-जल योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनभागीदारी आधारित बन सकेगा।

#JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #sehore

• गांवों में जल प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा, पानी समितियां संभालेंगी नल-जल योजनाओं की जिम्मेदारी • जानवर नहलाने, गाड़ी धोने और कृषि कार्यों में उपयोग से लेकर अन्य पानी के अव्यय पर लगेगा जुर्माना ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं के बेहतर संचालन, रखरखाव एवं पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर पानी समितियों का गठन किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत पानी समितियां जल योजनाओं के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। पानी समितियां ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी गांवों में नल-जल योजना के संचालन, संधारण, जल वितरण व्यवस्था और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगी। समिति पाइप लाइन, पंप, टंकी, वाल्व, मीटर सहित जल आपूर्ति से जुड़े सभी संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। समिति का उद्देश्य ग्रामीणों में जल योजनाओं के प्रति सामूहिक स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना होगा। जल आपूर्ति योजना का प्रचार-प्रसार, ग्रामीणों को जागरूक करना और पेयजल के उचित उपयोग के लिए प्रेरित करना भी समिति की जिम्मेदारी होगी। पानी के दुरुपयोग पर लगेगा जुर्माना जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पानी समितियों को जल अपव्यय रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। यदि कोई उपभोक्ता पेयजल का दुरुपयोग करते हुए पाया जाता है, जैसे नल के पानी से वाहन धोना, मवेशियों को नहलाना, कृषि कार्यों में पेयजल का उपयोग करना या नल कनेक्शन से सीधे मोटर पंप लगाकर पानी खींचना, तो समिति कार्रवाई की अनुशंसा कर सकेगी। ऐसे मामलों में पहली बार जल अपव्यय करने पर न्यूनतम 100 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं एक माह में दो बार से अधिक जल अपव्यय पाए जाने पर न्यूनतम 500 रुपये का जुर्माना और पेयजल आपूर्ति बंद करने की अनुशंसा ग्राम पंचायत को की जा सकेगी। यदि कोई उपभोक्ता लगातार तीन माह तक जल प्रभार का भुगतान नहीं करता है, तो पानी समिति पेयजल आपूर्ति स्थगित करने की अनुशंसा ग्राम पंचायत को कर सकेगी। समय पर जल शुल्क जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं पर बकाया राशि के 5 से 10 प्रतिशत तक शास्ति लगाने का प्रस्ताव भी समिति दे सकेगी। स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण पेयजल की होगी निगरानी पानी समिति यह सुनिश्चित करेगी कि ग्रामीणों को मिलने वाला पेयजल भौतिक, रासायनिक एवं जीवाणु प्रदूषण से मुक्त हो और निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध कराया जाए। समिति नियमित अंतराल पर जल गुणवत्ता परीक्षण कराएगी तथा जल की मात्रा और गुणवत्ता से संबंधित जानकारी जल पोर्टल पर दर्ज करेगी। जल वितरण में समानता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समिति गांवों के सभी मोहल्लों, बसाहटों और टोलों में उचित जल आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने में सहयोग करेगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों तथा कमजोर वर्गों को पेयजल उपलब्धता में प्राथमिकता दी जाएगी। पानी समितियां जल आपूर्ति से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए ग्राम पंचायत, मध्य प्रदेश जल निगम, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करेंगी। इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और नल-जल योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनभागीदारी आधारित बन सकेगा। #JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #sehore

Sehore, Madhya Pradesh | Jun 27, 2026

कन्या शिक्षा परिसर में 10 दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर

                         सीहोर स्थित कन्या शिक्षा परिसर में 10 दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर आयोजित किया गया। शिविर के दौरान बालिकाओं को विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों एवं गतिविधियों के माध्यम से व्यक्तिगत कौशल तथा जीवनोपयोगी कौशल जैसे नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, संवाद कौशल, अनुशासन, समय प्रबंधन एवं आत्मविश्वास का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस अवसर पर प्रतिभाशाली छात्राओं को पुरस्कार भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर सभी छात्राओं ने सामूहिक रूप से एक आदर्श एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लिया। इस अवसर पर श्री कौस्तुक कर्माकर, श्री सत्येंद्र शर्मा, प्राचार्या डॉ. विनीत गाबा, श्री अशोक त्रिपाठी उपस्थित थे।

#JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #sehore

कन्या शिक्षा परिसर में 10 दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर सीहोर स्थित कन्या शिक्षा परिसर में 10 दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर आयोजित किया गया। शिविर के दौरान बालिकाओं को विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों एवं गतिविधियों के माध्यम से व्यक्तिगत कौशल तथा जीवनोपयोगी कौशल जैसे नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, संवाद कौशल, अनुशासन, समय प्रबंधन एवं आत्मविश्वास का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस अवसर पर प्रतिभाशाली छात्राओं को पुरस्कार भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर सभी छात्राओं ने सामूहिक रूप से एक आदर्श एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लिया। इस अवसर पर श्री कौस्तुक कर्माकर, श्री सत्येंद्र शर्मा, प्राचार्या डॉ. विनीत गाबा, श्री अशोक त्रिपाठी उपस्थित थे। #JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #sehore

Sehore, Madhya Pradesh | Jun 27, 2026

• सफलता की कहानी

• संत रविदास स्वरोजगार योजना से उद्देश्य मालवीय बने आत्मनिर्भर युवा

• अपने पिता के साथ मिलकर स्थापित किया आटा चक्की का बड़ा व्यवसाय
......

                      प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने के संकल्प के साथ अनेक जनकल्याणकारी स्वरोजगार योजनाएं संचालित कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को आसान ऋण, अनुदान और मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। इन्हीं योजनाओं में संत रविदास स्वरोजगार योजना युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है। सीहोर जिले के युवा श्री उद्देश्य मालवीय इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं।

      उद्देश्य बताते हैं कि उनके पिता कई वर्षों से आटा चक्की का छोटा व्यवसाय करते थे, लेकिन सीमित पूंजी, पर्याप्त मशीनरी का अभाव और अच्छी लोकेशन पर दुकान न होने के कारण व्यवसाय का विस्तार संभव नहीं हो पा रहा था। उद्देश्य चाहते थे कि आधुनिक मशीनें खरीदकर और बेहतर स्थान पर दुकान स्थापित कर इस पारिवारिक व्यवसाय को नई पहचान दें, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा थी।

इसी दौरान उन्हें संत रविदास स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली। उन्होंने सीहोर कलेक्ट्रेट स्थित जिला अंत्यावसायी कार्यालय में संपर्क कर योजना की जानकारी प्राप्त की और आवेदन किया। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें योजना के तहत 01 लाख 80 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ।

      इस ऋण से उद्देश्य ने नई एवं आधुनिक आटा चक्कियां खरीदीं तथा बेहतर स्थान पर अपना व्यवसाय स्थापित किया। आज वे अपने पिता के साथ मिलकर सफलतापूर्वक व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता और बेहतर ग्राहकों के कारण अब दोनों मिलकर लगभग 50 हजार रुपये प्रतिमाह की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। उद्देश्य ने इस योजना के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं प्रदेश सरकार को धन्यवाद दिया है।

क्या है संत रविदास स्वरोजगार योजना?

      संत रविदास स्वरोजगार योजना मध्यप्रदेश शासन की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के शिक्षित एवं बेरोजगार युवाओं को स्वयं का व्यवसाय, उद्योग या सेवा इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के माध्यम से युवाओं को बैंकों के जरिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है तथा पात्र हितग्राहियों को शासन द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मार्जिन मनी एवं ब्याज अनुदान जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।

कैसे करें आवेदन?

      योजना का लाभ लेने के इच्छुक पात्र युवा अपने जिले के जिला अंत्यावसायी कार्यालय अथवा मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, समग्र आईडी, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता, बैंक खाते का विवरण तथा प्रस्तावित व्यवसाय की परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है। आवेदन की जांच के बाद पात्र पाए जाने पर बैंक के माध्यम से ऋण स्वीकृत किया जाता है।

आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की ओर मजबूत कदम

      मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित स्वरोजगार योजनाएं प्रदेश के युवाओं को आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती प्रदान कर रही हैं। उद्देश्य मालवीय जैसे अनेक युवाओं की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो छोटे सपने भी बड़े व्यवसाय का रूप ले सकते हैं। सरकार की ऐसी योजनाएं न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही हैं।

#JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #sehore

• सफलता की कहानी • संत रविदास स्वरोजगार योजना से उद्देश्य मालवीय बने आत्मनिर्भर युवा • अपने पिता के साथ मिलकर स्थापित किया आटा चक्की का बड़ा व्यवसाय ...... प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने के संकल्प के साथ अनेक जनकल्याणकारी स्वरोजगार योजनाएं संचालित कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को आसान ऋण, अनुदान और मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। इन्हीं योजनाओं में संत रविदास स्वरोजगार योजना युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है। सीहोर जिले के युवा श्री उद्देश्य मालवीय इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। उद्देश्य बताते हैं कि उनके पिता कई वर्षों से आटा चक्की का छोटा व्यवसाय करते थे, लेकिन सीमित पूंजी, पर्याप्त मशीनरी का अभाव और अच्छी लोकेशन पर दुकान न होने के कारण व्यवसाय का विस्तार संभव नहीं हो पा रहा था। उद्देश्य चाहते थे कि आधुनिक मशीनें खरीदकर और बेहतर स्थान पर दुकान स्थापित कर इस पारिवारिक व्यवसाय को नई पहचान दें, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा थी। इसी दौरान उन्हें संत रविदास स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली। उन्होंने सीहोर कलेक्ट्रेट स्थित जिला अंत्यावसायी कार्यालय में संपर्क कर योजना की जानकारी प्राप्त की और आवेदन किया। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें योजना के तहत 01 लाख 80 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस ऋण से उद्देश्य ने नई एवं आधुनिक आटा चक्कियां खरीदीं तथा बेहतर स्थान पर अपना व्यवसाय स्थापित किया। आज वे अपने पिता के साथ मिलकर सफलतापूर्वक व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता और बेहतर ग्राहकों के कारण अब दोनों मिलकर लगभग 50 हजार रुपये प्रतिमाह की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। उद्देश्य ने इस योजना के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं प्रदेश सरकार को धन्यवाद दिया है। क्या है संत रविदास स्वरोजगार योजना? संत रविदास स्वरोजगार योजना मध्यप्रदेश शासन की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के शिक्षित एवं बेरोजगार युवाओं को स्वयं का व्यवसाय, उद्योग या सेवा इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के माध्यम से युवाओं को बैंकों के जरिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है तथा पात्र हितग्राहियों को शासन द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मार्जिन मनी एवं ब्याज अनुदान जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। कैसे करें आवेदन? योजना का लाभ लेने के इच्छुक पात्र युवा अपने जिले के जिला अंत्यावसायी कार्यालय अथवा मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, समग्र आईडी, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता, बैंक खाते का विवरण तथा प्रस्तावित व्यवसाय की परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है। आवेदन की जांच के बाद पात्र पाए जाने पर बैंक के माध्यम से ऋण स्वीकृत किया जाता है। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की ओर मजबूत कदम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित स्वरोजगार योजनाएं प्रदेश के युवाओं को आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती प्रदान कर रही हैं। उद्देश्य मालवीय जैसे अनेक युवाओं की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो छोटे सपने भी बड़े व्यवसाय का रूप ले सकते हैं। सरकार की ऐसी योजनाएं न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही हैं। #JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #sehore

Sehore, Madhya Pradesh | Jun 27, 2026

• प्रधान जिला न्यायाधीश ने भैरूंदा सब जेल का किया निरीक्षण

• जागरूकता कार्यक्रम में बंदियों को नशामुक्ति के लिए किया प्रेरित

                   प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष श्री संजीव कुमार अग्रवाल ने भैरूंदा सब-जेल का निरीक्षण किया। इस अवसर पर जेल में नशामुक्ति एवं विधिक साक्षरता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

      उन्होंने बंदियों को नशामुक्ति के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि नशे की लत जीवन को बर्बाद कर देती है एवं कई अपराध नशे के कारण होते हैं। उन्होंने बंदियों से कहा कि यदि आप नशा छोड़ना चाहते हैं तो पूरे मन से संकल्‍प लें। इस अवसर पर सचिव श्रीमती स्वप्नश्री सिंह ने बंदियों को बताया कि यदि वे नशा छोड़ना चाहते हैं तो उनकी लत निशुल्क नशा मुक्ति केंद्र के माध्यम से छुड़ाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सदैव उनकी मदद करेगा। इस दौरान उन्होंने नालसा डॉन स्कीम के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

      शिविर में बंदियों के विधिक अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई, बंदियों से स्वास्थ्य की जानकारी ली गई एवं संपूर्ण जेल का निरीक्षण किया गया। उन्होंने बंदियों की समस्याओं को सुना और यथोचित निराकरण भी किया। इस अवसर पर जिला न्यायाधीश श्रीमती उषा तिवारी,  जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री जीशान खान, जेल स्टॉफ एवं बंदीगण उपस्थित रहे।

#JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #sehore

• प्रधान जिला न्यायाधीश ने भैरूंदा सब जेल का किया निरीक्षण • जागरूकता कार्यक्रम में बंदियों को नशामुक्ति के लिए किया प्रेरित प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष श्री संजीव कुमार अग्रवाल ने भैरूंदा सब-जेल का निरीक्षण किया। इस अवसर पर जेल में नशामुक्ति एवं विधिक साक्षरता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। उन्होंने बंदियों को नशामुक्ति के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि नशे की लत जीवन को बर्बाद कर देती है एवं कई अपराध नशे के कारण होते हैं। उन्होंने बंदियों से कहा कि यदि आप नशा छोड़ना चाहते हैं तो पूरे मन से संकल्‍प लें। इस अवसर पर सचिव श्रीमती स्वप्नश्री सिंह ने बंदियों को बताया कि यदि वे नशा छोड़ना चाहते हैं तो उनकी लत निशुल्क नशा मुक्ति केंद्र के माध्यम से छुड़ाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सदैव उनकी मदद करेगा। इस दौरान उन्होंने नालसा डॉन स्कीम के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। शिविर में बंदियों के विधिक अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई, बंदियों से स्वास्थ्य की जानकारी ली गई एवं संपूर्ण जेल का निरीक्षण किया गया। उन्होंने बंदियों की समस्याओं को सुना और यथोचित निराकरण भी किया। इस अवसर पर जिला न्यायाधीश श्रीमती उषा तिवारी, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री जीशान खान, जेल स्टॉफ एवं बंदीगण उपस्थित रहे। #JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #sehore

Sehore, Madhya Pradesh | Jun 26, 2026

• ग्रामीण नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण एवं प्रबंधन के लिए गठित होंगी जल समितियां

• ग्राम पंचायत स्तर पर होगा जल समितियों का गठन, ग्रामीणों की भागीदारी से होगा योजनाओं का संचालन

                 ग्रामीण नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण एवं प्रबंधन के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत जल समितियां गठित की जाएगी। ग्राम पंचायतों में जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और योजनाओं के सुचारू संचालन के उद्देश्य से इन समितियों का गठन किया जाएगा।

 नियमों के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम सभा की अनुशंसा एवं पंचायत की स्वीकृति के आधार पर जल समिति का गठन किया जाएगा। पेसा अधिनियम, 1996 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की अनुशंसा के आधार पर समिति गठित होगी। यदि किसी ग्राम पंचायत में पूर्व से नल जल योजना के संचालन एवं संधारण के लिए कोई समिति गठित है, तो उसका पुनर्गठन नए नियमों के अनुसार किया जाएगा। समिति गठन का आदेश पंचायत सचिव द्वारा जारी किया जाएगा।

 जल समिति में सरपंच पदेन अध्यक्ष होंगे, जबकि पंचायत सचिव समिति के पदेन सचिव रहेंगे। ग्राम रोजगार सहायक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आशा कार्यकर्ता समिति के पदेन सदस्य होंगे। समिति में नामांकित सदस्यों की संख्या अधिकतम 20 होगी। ग्राम पंचायत के प्रत्येक वार्ड से एक व्यक्ति को समिति में सदस्य बनाया जाएगा, जो संबंधित उपभोक्ता परिवार से होना आवश्यक होगा। समिति में ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी 25 प्रतिशत रहेगी।

 जल समिति में महिलाओं को न्यूनतम 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रतिनिधियों का चयन ग्राम पंचायत की जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा। लगातार तीन बैठकों में बिना उचित कारण एवं सूचना के अनुपस्थित रहने वाले सदस्य की सदस्यता समाप्त की जा सकेगी। ऐसे सदस्य के स्थान पर नियमानुसार नए सदस्य के नामांकन की अनुशंसा ग्राम पंचायत को की जाएगी। जल समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल योजनाओं की निगरानी, संचालन और संधारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिससे ग्रामीणों को नियमित एवं बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

#JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #sehore

• ग्रामीण नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण एवं प्रबंधन के लिए गठित होंगी जल समितियां • ग्राम पंचायत स्तर पर होगा जल समितियों का गठन, ग्रामीणों की भागीदारी से होगा योजनाओं का संचालन ग्रामीण नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण एवं प्रबंधन के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत जल समितियां गठित की जाएगी। ग्राम पंचायतों में जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और योजनाओं के सुचारू संचालन के उद्देश्य से इन समितियों का गठन किया जाएगा। नियमों के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम सभा की अनुशंसा एवं पंचायत की स्वीकृति के आधार पर जल समिति का गठन किया जाएगा। पेसा अधिनियम, 1996 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की अनुशंसा के आधार पर समिति गठित होगी। यदि किसी ग्राम पंचायत में पूर्व से नल जल योजना के संचालन एवं संधारण के लिए कोई समिति गठित है, तो उसका पुनर्गठन नए नियमों के अनुसार किया जाएगा। समिति गठन का आदेश पंचायत सचिव द्वारा जारी किया जाएगा। जल समिति में सरपंच पदेन अध्यक्ष होंगे, जबकि पंचायत सचिव समिति के पदेन सचिव रहेंगे। ग्राम रोजगार सहायक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आशा कार्यकर्ता समिति के पदेन सदस्य होंगे। समिति में नामांकित सदस्यों की संख्या अधिकतम 20 होगी। ग्राम पंचायत के प्रत्येक वार्ड से एक व्यक्ति को समिति में सदस्य बनाया जाएगा, जो संबंधित उपभोक्ता परिवार से होना आवश्यक होगा। समिति में ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी 25 प्रतिशत रहेगी। जल समिति में महिलाओं को न्यूनतम 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रतिनिधियों का चयन ग्राम पंचायत की जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा। लगातार तीन बैठकों में बिना उचित कारण एवं सूचना के अनुपस्थित रहने वाले सदस्य की सदस्यता समाप्त की जा सकेगी। ऐसे सदस्य के स्थान पर नियमानुसार नए सदस्य के नामांकन की अनुशंसा ग्राम पंचायत को की जाएगी। जल समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल योजनाओं की निगरानी, संचालन और संधारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिससे ग्रामीणों को नियमित एवं बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। #JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh #sehore

Sehore, Madhya Pradesh | Jun 26, 2026