विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर केंद्रीय कारा, मोतिहारी में विधिक जागरूकता शिविर-सह-कार्यशाला का आयोजन
मानसिक स्वास्थ्य, क्रोध प्रबंधन एवं बंदियों के सकारात्मक जीवन के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने किया प्रेरित
मोतिहारी, पूर्वी चंपारण। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), पूर्वी चंपारण, मोतिहारी द्वारा लॉ फाउंडेशन के सहयोग से केंद्रीय कारा, मोतिहारी में एक विधिक जागरूकता शिविर-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंदियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन, क्रोध प्रबंधन तथा मानसिक रूप से बीमार एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस अवसर पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की मानसिक रूप से बीमार एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विधिक सेवाएँ योजना, 2015 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पूर्वी चंपारण, मोतिहारी के सचिव श्री नितिन त्रिपाठी ने अपने संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। जीवन की कठिन परिस्थितियों, तनाव, निराशा और क्रोध के बीच स्वयं को संतुलित रखना व्यक्ति के व्यक्तित्व एवं भविष्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने बंदियों को यह संदेश दिया कि जीवन में किसी भी परिस्थिति में आशा, धैर्य और आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए।
श्री त्रिपाठी ने क्रोध प्रबंधन से संबंधित एक प्रेरणादायक कहानी के माध्यम से उपस्थित बंदियों को समझाया कि क्रोध में लिया गया निर्णय कई बार जीवन को कठिन बना देता है, जबकि धैर्य, आत्मसंयम और सकारात्मक सोच समस्याओं का बेहतर समाधान प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने सभी को अपनी भावनाओं को समझने, दूसरों के प्रति सहानुभूति रखने तथा अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान में समय पर सहायता, उचित परामर्श और सामाजिक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
केंद्रीय कारा, मोतिहारी के अधीक्षक श्री विजय अरोड़ा ने अपने संबोधन में बंदियों को कारावास की अवधि का सदुपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जेल में बिताया गया समय आत्मचिंतन, अनुशासन, शिक्षा, कौशल विकास तथा अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर बन सकता है। उन्होंने बंदियों को निराशा से दूर रहकर अपने भविष्य को बेहतर बनाने तथा समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए स्वयं को तैयार करने हेतु प्रेरित किया।
कार्यशाला के दौरान क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. धीरज ने क्रोध प्रबंधन विषय पर एक व्यावहारिक गतिविधि आयोजित की। इस गतिविधि के माध्यम से बंदियों को अपने क्रोध के कारणों को पहचानने, तनावपूर्ण परिस्थितियों में स्वयं पर नियंत्रण रखने तथा भावनाओं को स्वस्थ एवं सकारात्मक तरीके से व्यक्त करने के उपाय समझाए गए। उनकी सहभागितापूर्ण गतिविधि ने सत्र को व्यावहारिक, संवादात्मक और प्रभावशाली बनाया।
कार्यक्रम में लॉ फाउंडेशन के सदस्य श्री शुभेंदु कुमार एवं सुश्री दीपशिखा, सहायक एलएडीसीएस श्री आर्य देव, पैनल अधिवक्ता सुश्री आयुषी अमृत, पीएलवी श्री सागर नंदी तथा कारा में कार्यरत अन्य कारा पैरालीगल वॉलंटियर्स उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।
यह सत्र अत्यंत संवेदनशील, मानवीय एवं सहानुभूतिपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया, जिसमें बंदियों की मानसिक और भावनात्मक आवश्यकताओं को विशेष महत्व दिया गया। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक व्यक्ति सम्मान, संवेदना, उचित मार्गदर्शन तथा विधिक सहायता का हकदार है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों के प्रति भेदभाव के बजाय समझ, सहयोग और सहानुभूति का व्यवहार अपनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के समग्र संचालन एवं सहयोगात्मक प्रयासों की कारा प्रशासन द्वारा सराहना की गई। इस आयोजन ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित करने तथा उनके अधिकारों और उपलब्ध विधिक सहायता सेवाओं की जानकारी पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल प्रस्तुत की।
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
29 views | East Champaran, Bihar | Oct 10, 2026