वन अधिकार से पर्यावरण संरक्षण तक, सहारा के कार्यों को प्रशासन ने सराहा।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में निदेशक राजेंद्र सिंह चौहान को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित।
गांव, जंगल और नदी के अधिकारों की लड़ाई से लेकर आपदा राहत तक निभाई महत्वपूर्ण भूमिका।
सहारा संस्था के 25 साल की जनसेवा को मिला प्रशासन का सम्मान।
Kullu Times
15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के 80वें वर्ष के अवसर पर बंजार में आयोजित समारोह के दौरान सामाजिक संस्था सहारा (SAHARA) द्वारा लंबे समय से किए जा रहे जनहित, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास के कार्यों को प्रशासन ने सराहा है। संस्था के निदेशक राजेंद्र सिंह चौहान को उनके नेतृत्व में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
यह सम्मान बंजार के उप-मंडलाधिकारी पंकज शर्मा द्वारा प्रदान किया गया। प्रशस्ति पत्र में वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक वन अधिकारों की रक्षा, स्थानीय समुदायों में जागरूकता पैदा करने तथा उप-मंडल स्तरीय समिति और जिला स्तरीय समिति के साथ समन्वय के लिए सहारा के कार्यों की सराहना की गई है।
2000 से जनहित और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय.
सहारा की शुरुआत वर्ष 2000 के आसपास ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के साथ एक साझेदार संगठन के रूप में हुई। संस्था का उद्देश्य इकोज़ोन क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना रहा। प्रारंभिक दौर में महिलाओं के बचत एवं ऋण समूहों को सहयोग देने के साथ संस्था ने समुदाय आधारित कार्यों की शुरुआत की।
वर्ष 2002 से 2004 के दौरान सहारा ने स्थानीय समुदाय और पूर्व विधायक दिलाराम शबाब के साथ मिलकर तीर्थन नदी को प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं से बचाने के लिए अभियान चलाया। संस्था इस मामले में शिमला उच्च न्यायालय में सह-याचिकाकर्ता भी रही।
वर्ष 2005 में सहारा ने सैंज-रोपा/साई रोपा में वर्ल्ड माउंटेन पीपल एसोसिएशन के सम्मेलन का आयोजन किया तथा सिक्किम में आयोजित सम्मेलन में भी भागीदारी की।
नेशनल पार्क की निहारनी जन सुनवाई में निभाई भूमिका.
वर्ष 2013-14 के दौरान सहारा ने स्थानीय समुदायों को उनके अधिकारों के प्रति संगठित करने तथा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र में विश्व धरोहर स्थल के गठन एवं प्रबंधन से जुड़े विषयों पर निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था के लिए UNESCO के साथ पैरवी और संवाद किया। संस्था के अनुसार, इन प्रयासों का एक प्रमुख परिणाम निहारनी जन सुनवाई के रूप में सामने आया।
वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन पर विशेष जोर.
वर्ष 2014 के बाद सहारा ने बंजार विकासखंड में वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन को अपने प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल किया। संस्था ने ग्रामीणों को वन अधिकारों के प्रति जागरूक करने, दावों की प्रक्रिया को समझाने तथा SDLC और DLC के साथ समन्वय एवं संवाद में सहयोग किया।
वर्तमान समय में भी वन अधिकार कानून के तहत ग्राम स्तर पर कार्य, वन अधिकार समितियों का गठन एवं प्रशिक्षण, सामुदायिक वन अधिकार दावों की प्रक्रिया और देव स्थलों एवं वनों से संबंधित दस्तावेजीकरण जैसे कार्य किए जा रहे हैं।
सहारा के अनुसार वर्ष 2022-23 के दौरान ग्राम सभाओं को 24 सामुदायिक वन अधिकार दावों के अधिकार-पत्र प्राप्त हुए। संस्था ने CFR प्रक्रिया के तहत Google Earth के माध्यम से देव स्थलों की मैपिंग का कार्य भी किया। इसके अलावा वन अधिकार समितियों के गठन और क्षमता निर्माण के लिए प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।
महिला सशक्तिकरण से लेकर सतत पर्यटन तक.
सहारा ने प्रारंभिक दौर से ही महिला बचत एवं ऋण समूहों को सहयोग देने के साथ महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों में भागीदारी की। इसके साथ ही तीर्थन घाटी और आसपास के क्षेत्रों में सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विज़न दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में भी सहयोग किया गया।
संस्था द्वारा प्रशासन और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर क्षेत्र में निर्माण कार्यों को व्यवस्थित एवं विनियमित करने के विषय पर भी लगातार प्रतिनिधिमंडल, ज्ञापन और पत्राचार किए गए। इसके बाद चार पंचायतों द्वारा पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत निर्माण कार्यों को विनियमित करने के लिए मॉडल प्लान तैयार किए जाने का उल्लेख संस्था के कार्य विवरण में किया गया है।
कोविड काल में प्रशासन के साथ किया सहयोग.
कोविड-19 महामारी के दौरान भी सहारा ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से स्वैच्छिक रूप से मास्क तैयार करने और उनके वितरण का कार्य किया। संस्था द्वारा प्रशासन और आम जनता के लिए मास्क, M-95 मास्क तथा सैनिटाइजर के वितरण में सहयोग किया गया। इसके साथ ही कोविड काल में वाहनों की आवाजाही और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में भी स्थानीय प्रशासन को सहयोग देने की बात संस्था ने कही है।
इस दौरान पुलिस विभाग से मिले सहयोग को भी सहारा ने विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया और इसके लिए पुलिस विभाग का आभार व्यक्त किया।
बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री पहुंचाई.
वर्ष 2024-25 में आई भीषण बाढ़ के दौरान भी सहारा ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए कार्य किया। संस्था के अनुसार प्रभावित 33 घरों तक राहत पहुंचाने के साथ राशन, कंबल और तिरपाल जैसी आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया।
इस प्रकार संस्था का कार्य केवल पर्यावरण और वन अधिकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आपदा के समय जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाने और सामुदायिक सहयोग में भी संस्था की भूमिका रही।
प्रशस्ति पत्र में प्रशासन ने की विशेष सराहना.
बंजार प्रशासन की ओर से जारी प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि सहारा के नेतृत्व में सामुदायिक वन अधिकारों की रक्षा, स्थानीय समुदायों में जागरूकता तथा SDLC और DLC के साथ समन्वय के माध्यम से दावों के निष्पक्ष एवं पारदर्शी निपटारे की दिशा में लगातार कार्य किया गया है।
प्रशस्ति पत्र में विशेष रूप से सामुदायिक वन संसाधन (CFR) दावों की मान्यता, वन अधिकार समितियों के गठन एवं सुदृढ़ीकरण, सतत पर्यटन और सामुदायिक कल्याण से जुड़े प्रयासों की सराहना की गई है। प्रशासन ने राजेंद्र सिंह चौहान के समर्पण और सेवा को सराहनीय बताते हुए इसे दूसरों के लिए प्रेरणादायक बताया।
सहारा ने प्रशासन और सहयोगियों का जताया आभार.
सम्मान मिलने के बाद सहारा ने संस्था के सभी शुभचिंतकों, सहयोगी साथियों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा प्रशासन का आभार व्यक्त किया। संस्था ने विशेष रूप से बंजार के एसडीएम पंकज शर्मा के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा संस्था के वर्षों से किए जा रहे जनहित के कार्यों का मूल्यांकन कर सम्मानित किया जाना संस्था के लिए प्रोत्साहन का विषय है।
Kullu, Kullu | Aug 16, 2026