-सनातन जीवन-मूल्यों और आधुनिक तकनीक के समन्वय से बनेगा विश्वगुरु भारत
-जीवित माता पिता की सेवा और पूर्वजों का सम्मान ही है असली श्राद्ध
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उदयपुर, 1 अक्टूबर। महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, पुला में “वेदों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक” विषय पर भारतीय ज्ञान परंपरा का विशेष सत्र आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि एवं पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी सरस्वती माहेश्वरी ने कहा कि पूर्वजों का श्राद्ध करने के साथ-साथ जीवित माता-पिता का सम्मान, सेवा और उनकी भावनाओं का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कारों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सनातन पाठशाला समिति के संयोजक आशीष सिंहल ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा केवल आध्यात्मिक चिंतन तक सीमित नहीं रही, बल्कि गणित, खगोल विज्ञान, भाषा विज्ञान, चिकित्सा और जीवन प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने आर्यभट्ट, वराहमिहिर, भास्कराचार्य और पाणिनि जैसे विद्वानों के साथ महर्षि दधीचि, हरिश्चंद्र, सावित्री, ध्रुव, प्रह्लाद, चाणक्य, विदुर, गार्गी और मैत्रेयी जैसे प्रेरणादायी चरित्रों के उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय जीवन-मूल्यों और विवेक का समन्वय ही भारत को विश्वगुरु बनने की दिशा दे सकता है।
समग्रम संस्थापक डॉ. निहालचंद जैन ने ध्यान का अभ्यास करवाया। उन्होंने उपनिषद की पंचकोष अवधारणा को समझाते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में बाहरी उपलब्धियों के साथ-साथ अंतर्यात्रा और आत्मबोध को भी महत्वपूर्ण माना गया है। विद्यालय की ओर से मीनाक्षी मंडोबरा ने अतिथियों का स्वागत और प्रधानाचार्य विद्या गॉड ने आभार व्यक्त किया।
Girwa, Udaipur | Oct 1, 2026