चेहरा नहीं, वाणी बताती है इंसान के संस्कार : युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी
‘रूप आंखों को भाता है, मधुर वाणी हृदय में घर बनाती है’—शांतिभवन में धर्मसभा के दौरान दिया वाणी संयम का संदेश
भीलवाड़ा (महेन्द्र नागौरी) रूप कुछ पल के लिए आकर्षित कर सकता है, लेकिन मधुर वाणी वर्षों तक दिल में जगह बनाए रखती है। मनुष्य का चेहरा उसका बाहरी परिचय है, जबकि उसकी वाणी भीतर के संस्कारों का आईना है। यह संदेश श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी ने रविवार को शांतिभवन में आयोजित धर्मसभा में दिया।
युवाचार्यश्री ने कहा कि वाणी की मधुरता केवल आवाज में नहीं, मन की निर्मलता में होती है। क्रोध शब्दों में ताप, अहंकार में कठोरता, माया में बनावट और लोभ में स्वार्थ भर देता है। इसलिए शब्दों को सुधारने से पहले मन के भावों को सुधारना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कोयल अपने रूप से नहीं, स्वर से पहचानी जाती है। इसी तरह इंसान की पहचान भी उसके चेहरे से ज्यादा उसके व्यवहार और बोलने के तरीके से बनती है। कठोर शब्द पलभर में निकलते हैं, लेकिन उनकी चोट वर्षों तक रह सकती है।
युवाचार्यश्री ने रंग-रूप को लेकर हीनभावना से बचने की सीख देते हुए कहा कि गोरा-काला, मोटा-पतला या बाहरी बनावट किसी की श्रेष्ठता तय नहीं करती। जो मिला है उसे स्वीकारें, जो सुधर सकता है उसे सुधारें और अपनी श्रेष्ठता को सही दिशा दें।
उन्होंने वाणी को सत्य, स्पष्ट और जिम्मेदार बनाने पर जोर दिया। कहा कि अधूरी और अपुष्ट बात समाज में भ्रम फैलाती है। अनावश्यक निंदा, विवाद और चर्चाओं में शब्दों के साथ मानसिक ऊर्जा भी नष्ट होती है।
गुरु आनन्द ऋषिजी का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी वाणी में केवल स्वर नहीं, वात्सल्य था। तानसेन-अकबर के प्रसंग के जरिए उन्होंने समझाया कि दुनिया को प्रभावित करने के लिए किया गया गायन कला है, जबकि परमात्मा में तल्लीन होकर किया गया गायन साधना बन जाता है।
सिद्धितप की आराधना का अनुमोदन
इस अवसर पर युवाचार्यश्री सहित साधु-साध्वीवृंद और श्रीसंघ ने सिद्धितप में रत तप आराधकों की सुखसाता पूछकर तप की अनुमोदना की। तप आराधकों ने एक, तीन एवं पांच उपवास सहित विभिन्न तपों के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।
शांतिभवन वर्षावास समिति एवं विभिन्न मंडलों के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी, नवदीक्षित महक ऋषिजी, उपप्रवर्तिनी दिव्य ज्योतिजी, साध्वी रोचक दर्शनाजी व साध्वी सुबोधीजी आदि की तप आराधना की अनुमोदना की।
मंत्री नवरतनमल भलावत ने बताया कि 8 से 15 सितंबर तक पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तहत शांतिभवन में प्रतिदिन प्रवचन, तप और विविध धार्मिक आयोजन होंगे।