पर्यावरण हवलदार लोकराम नेहरा ने मित्र सुमेर सिंह की 15वीं शादी की सालगिरह पर रोपी त्रिवेणी
आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने के लिए प्रकृति से जुडऩा ही होगा : चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण
भिवानी, 06 जुलाई : समाज में खुशियों के अवसरों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोडऩे की एक अनूठी और अनुकरणीय मिसाल स्थानीय भगत सिंह चौक पर देखने को मिली। यहां पर्यावरण हवलदार लोकराम नेहरा ने अपने मित्र मास्टर सुमेर सिंह मान की 15वीं शादी की सालगिरह के अवसर पर भगत सिंह चौक पर त्रिवेणी का रोपण किया। यह त्रिवेणी रोपण कार्यक्रम त्रिवेणी बाबा की प्रेरणा से अाियोजित किया गया। इस कार्यक्रम में हरियाणा बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और अपने कर-कमलों से त्रिवेणी रोपण कर समाज को हरियाली का संदेश दिया। इस मौके पर मुख्य अतिथि तृप्ति श्योराण ने पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि शादी की सालगिरह जैसे पारिवारिक और मांगलिक अवसरों पर वृक्षारोपण करना समाज के लिए एक बेहतरीन संदेश है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है, ऐसे में लोकराम नेहरा और उनके साथियों द्वारा किया जा रहा यह प्रयास न केवल सराहनीय है बल्कि अनुकरणीय भी है। बच्चों और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने के लिए हमें प्रकृति से जुडऩा ही होगा। इस अवसर पर पूर्व सैनिक व पर्यावरण योद्धा श्रीपाल यादव और सहायक उप निरीक्षक कांता नेहरा ने भी शिरकत की। उन्होंने संयुक्त बयान में कहा कि एक पौधा लगाना 100 पुत्रों को पालने के समान है। त्रिवेणी का रोपण सनातन और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि यह हमें चौबीसों घंटे ऑक्सीजन देती है। मास्टर सुमेर सिंह को दाम्पत्य जीवन के 15 वर्ष पूरे होने पर इससे सुंदर उपहार नहीं दिया जा सकता था। कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य लोगों ने नवदम्पति को शुभकामनाएं दीं और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया। इस खास मौके पर प्रशांत, महेंद्र सिंह फोगाट, बबीता, रितु, रिशु, नमन, शंकर, नर्सरी संचालक चंद्रमोहन, वीरेंद्र सिंह श्योराण, भूमिका सरदाना, आदित्य नेहरा और अदिति नेहरा सहित अनेक पर्यावरण प्रेमियों और परिवार के सदस्यों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। पर्यावरण हवलदार लोकराम नेहरा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य हर खुशी के मौके को पर्यावरण से जोडऩा है ताकि हमारी धरती हरी-भरी और सांसें सुरक्षित रह सकें।