जब रीढ़ की हड्डी वाले दो इंसान आपस में मिलते हैं, तो इतिहास में प्रतिरोध का एक नया अध्याय लिखा जाता है।
मुंबई के शिवाजी पार्क में जब CJP आंदोलन के बीच अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और युवा चेतना अभिजीत दिपके का आमना-सामना हुआ, तो वह दृश्य केवल दो पीढ़ियों का मिलन नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की साझी लड़ाई का प्रतीक बन गया।
नसीर साहब जिन्होंने कभी सत्ता के आगे झुकना नहीं सीखा और जिनकी आवाज़ हमेशा हर गलत नीति के खिलाफ गरजती रही है जब उन्होंने झुककर आशीर्वाद लेते अभिजीत को गले से लगाया, तो लगा मानो सदियों पुराना संघर्ष आज के युवाओं को मशाल सौंप रहा हो।
नसीर साहब की बेबाक शख्सियत और बेखौफ अंदाज़ ने यह साबित कर दिया है कि एक सच्चा कलाकार सिर्फ पर्दे पर नायक नहीं होता, बल्कि वह जनता के हक के लिए सड़क पर भी उतरता है,अभिजीत दिपके के 'जेल भरो आंदोलन' को नसीर साहब का यह क्रांतिकारी समर्थन और जादुई जादू की झप्पी इस बात की गवाही है कि जब तक इस देश में सच बोलने व
Korba, Korba | Oct 3, 2026