वन एवं वन्यजीव संरक्षण के तहत रणथंभौर में दो दिवसीय CSR कॉन्क्लेव आयोजित,वन मंत्री संजय शर्मा ने की शिरकत
सवाई माधोपुर । रणथंभौर में वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर के एक होटल में CSR कॉन्क्लेव को लेकर दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित।रणथंभौर में प्रदेशभर के उद्योगपति जुटे है। रणथंभौर स्थित होटल सवाई विलास में आयोजित दो दिवसीय CSR कॉन्क्लेव में प्रदेश भर के वनाधिकारी एंव उद्योगपति वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर चर्चा के लिए पहुंचे। रणथंभौर में आयोजित दो दिवसीय कॉन्क्लेव का उद्देश्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास को प्रोत्साहित करना है।
कॉन्क्लेव के मुख्य अतिथि वन मंत्री संजय शर्मा रहे।अध्यक्षता वन विभाग के एसीएस आनंद कुमार ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में अरिजीत बनर्जी रहे। कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए उद्योगपति मौजूद रहे।
CSR कॉन्क्लेव को सम्बोधित करते हुए वन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व प्रदेश में वन और वन्यजीव संरक्षण को लेकर बेहतर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार ने देश में पहली बार यह व्यवस्था विकसित की है, जिसमें बिना नर्सरी जाए भी लोग आनलाईन पौधे मंगवा सकते हैं। राजस्थान में पहली बार संभाग स्तर पर वन मेले लगाए गए, जो आगामी समय में जिला स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने उद्योगपतियों से कहा कि राजस्थान वन विभाग को जब-जब फंड की आवश्यकता हुई, आपने विशेष सहयोग किया। वन विभाग को समय-समय पर वाहन, संसाधन उपलब्ध कराए। उद्योगपतियों के सहयोग से जंगल में वन चौकियां स्थापित की गई। वन मंत्री ने कॉन्क्लेव में मौजूद उद्योगपतियों से अब जंगलों से विस्थापित होने वाले गांवों की मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि साल 2022 में वन विभाग की ओर से विस्थापित परिवारों के पैकेज में बढ़ोतरी की है, लेकिन यह काफी नहीं है। फिलहाल वन विभाग की ओर से विस्थापित परिवारों को जो जमीन आवंटित की जा रही है, वो उबड़-खाबड़ होती है, जिसके चलते विस्थापित परिवार वहां जाने से हिचकते हैं। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों के लिए इन उबड़-खाबड़ जमीनों पर उद्योगपति विस्थापित गांवों को गोद लेकर अच्छी सुविधायुक्त कॉलोनी विकसित करने में सीएसआर फंड से सहयोग करें। उन्होंने रणथंभौर में क्षमता से अधिक बाघों की संख्या को लेकर कहां कि अभी बाघों को विस्थापित करने की आवश्यकता कम है। आने वाले समय में रामगढ़ विषधारी, मुकंदरा विस्थापित किया जा सकता है, लेकिन अभी आवश्यकता कम है।