गंडौल से घोंघेपुर तक हजारों एकड़ में जलजमाव, फसल बर्बाद होने की शिकायत पर अधिकारियों ने किया स्थल निरीक्षण
महिषी/सहरसा: गंडौल से घोंघेपुर तक हजारों एकड़ कृषि भूमि में बाढ़ और बारिश का पानी जमा रहने की शिकायत पर जल निस्सरण विभाग के अधिकारियों ने 5 अगस्त को स्थल निरीक्षण किया। ग्रामीण कामेश यादव ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर जलजमाव से निजात दिलाने की मांग की थी। उन्होंने बताया था कि जलजमाव के कारण धान और मक्का की फसल प्रभावित हो रही है। साथ ही लंबे समय तक पानी जमा रहने से बीमारी फैलने की आशंका भी बनी रहती है।
आवेदन के बाद विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर वस्तुस्थिति की जांच की। निरीक्षण में पाया गया कि संबंधित क्षेत्र पश्चिमी कोसी तटबंध और कमला बलान बायां तटबंध के बीच स्थित है। यहां आंशिक जलजमाव की समस्या है। क्षेत्र से पानी निकासी का एकमात्र प्रमुख प्राकृतिक मार्ग गेहूँआ धार है।
अधिकारियों के अनुसार गेहूँआ धार पश्चिमी कोसी तटबंध के लगभग समानांतर बहती है और घोंघेपुर के पास कोसी नदी में मिलती है। वर्तमान में धार में जलकुंभी और गाद जमा होने के साथ कोसी नदी का जलस्तर भी अधिक है। इसके कारण पानी का बहाव बाधित हो गया है और आसपास के इलाके में जलजमाव बना हुआ है।
स्थल निरीक्षण के दौरान राजीव रंजन पांडेय, सहायक अभियंता, जल निस्सरण अवर प्रमंडल सुपौल; रमण रंजन, कनीय अभियंता, जल निस्सरण अवर प्रमंडल सुपौल; मनोज कुमार, कनीय अभियंता, जल निस्सरण अवर प्रमंडल सुपौल तथा दीपक कुमार, कनीय अभियंता, जल निस्सरण अवर प्रमंडल उदाकिशुनगंज मौजूद रहे।
विभाग की ओर से दिए गए प्रतिवेदन में कहा गया है कि बाढ़ अवधि समाप्त होने के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार आवश्यक कार्य कराया जाएगा। इसके बाद संबंधित क्षेत्र से जल निकासी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।