तीसरी ऊर्जा
चंद्रघंटा
(इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फोर्स)
https://youtu.be/aYoD3EoZMyc?si=DfnVf1A72FUJlwzd
ये जो तीसरी ऊर्जा है, जो नाद ( आवाज) है, इसका नाम चंद्रघंटा है।
जिसकी आकृति अर्धचंद्र की तरह है और जो किसी पदार्थ से टकराती है तो नाद उत्पन्न करती है, घंटी बजाती है। हमारे पूर्वजों ने इसकी आकृति और क्रिया को देखकर इसका नाम चंद्रघंटा रखा है।
कितना सटीक नाम है, जैसा काम, वैसा नाम।
हमारे मोबाइल में बजने वाली घंटी इसी ऊर्जा की प्रक्रिया है।
आधुनिक विज्ञान इसी ऊर्जा को इलेक्ट्रोमेगनेटिक वेब्स कहता है।
आप स्वयं ही सोचिए जो ऊर्जा मोबाइल की घंटी बजाती हो उसको चंद्रघंटा बोलना कितना सटीक है।
हमारे पूर्वज ऋषियों ने इस ऊर्जा को नजदीक से देखा होगा, समझा होगा तभी यह नाम दिया है।
इस ऊर्जा अर्थात इलेक्ट्रोमेग्नेटिक के छोटे से भाग में सातों रंग सामाहित हैं, इन्हीं रंग के माध्यम से आप- मैं और सभी, मोबाइल फोन के माध्यम से फोटो वीडियो भेजते हैं, बात करते हैं। ये जो रंग (फोटो) है, जिसे मैं अपने सेल फोन से आपके सेल फोन में भेज रहा हूँ, जो असल में वेब्स ( तरंगे) हैं, जिसे निम्न चित्र के माध्यम से दर्शाया गया है।
इसमें 7 रंग होते हैं अर्थात यह तीसरी ऊर्जा प्रकाश और आवाज को लेकर आती-जाती है।
जहां तक हवा है वहां तक इस ऊर्जा में नाद आवाज है
जहां हवा नहीं है वहां यह ऊर्जा प्रकाश के रूप में गमन करती है।
तीसरा चक्र
मणिपुर चक्र और नाद रं इस ऊर्जा को प्रकट करता है।