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ताराचन्द बेलजी

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इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के M.Sc. और Ph.D. के छात्रों को वृक्षायुर्वेद की organic chemistry पढ़ाई
कुछ फैसबुक मित्रों का आग्रह था कि इसे सोशल मीडिया के लिए भी उपलब्ध करवाई जाए
अस्तु इस बार के 2लेक्चर के वीडियो उपलब्ध है
 भाग-1
https://youtu.be/euKVU4oIvq4?si=v9GVxz6hOP2UXQdo
भाग 2
https://youtu.be/NQQjRSoii9o?si=K7jlG2UMDXUNZik2

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और बताएं कि मैं पढ़ाता कैसा हूं
ऑर्गेनिक केमिस्ट्री की मेरी समझ कैसी है ...? Part 4
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के M.Sc. और Ph.D. के छात्रों को वृक्षायुर्वेद की organic chemistry पढ़ाई
कुछ फैसबुक मित्रों का आग्रह था कि इसे सोशल मीडिया के लिए भी उपलब्ध करवाई जाए
अस्तु इस बार के 2लेक्चर के वीडियो उपलब्ध है
 भाग-1
https://youtu.be/euKVU4oIvq4?si=v9GVxz6hOP2UXQdo
भाग 2
https://youtu.be/NQQjRSoii9o?si=K7jlG2UMDXUNZik2

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ऑर्गेनिक केमिस्ट्री की मेरी समझ कैसी है ...? Part 3
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के M.Sc. और Ph.D. के छात्रों को वृक्षायुर्वेद की organic chemistry पढ़ाई
कुछ फैसबुक मित्रों का आग्रह था कि इसे सोशल मीडिया के लिए भी उपलब्ध करवाई जाए
अस्तु इस बार के 2लेक्चर के वीडियो उपलब्ध है
 भाग-1
https://youtu.be/euKVU4oIvq4?si=v9GVxz6hOP2UXQdo
भाग 2
https://youtu.be/NQQjRSoii9o?si=K7jlG2UMDXUNZik2

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कुछ फैसबुक मित्रों का आग्रह था कि इसे सोशल मीडिया के लिए भी उपलब्ध करवाई जाए
अस्तु इस बार के 2लेक्चर के वीडियो उपलब्ध है
 भाग-1
https://youtu.be/euKVU4oIvq4?si=v9GVxz6hOP2UXQdo
भाग 2
https://youtu.be/NQQjRSoii9o?si=K7jlG2UMDXUNZik2

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अस्तु इस बार के 2लेक्चर के वीडियो उपलब्ध है
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https://youtu.be/euKVU4oIvq4?si=v9GVxz6hOP2UXQdo
भाग 2
https://youtu.be/NQQjRSoii9o?si=K7jlG2UMDXUNZik2

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TCBT से लगाई गई कपास की फसल 
आसपास के केमिकल कपास की फसल से ज्यादा अच्छी है

खंडवा पुनासा के एक किसान का अनुभव
*चौथी ऊर्जा* 
 पहली ऊर्जा ने अणु बनाया और असंख्य अणुओं को संग्रहित करके तारे, ग्रह, उपग्रह बनाया।
 इन ग्रहों, उपग्रहों को एक दूसरे से गुरूत्वाकर्षण बल से बांधकर रखने का काम दूसरी ऊर्जा ने किया।

 तीसरी ऊर्जा ने अणुओं,  ग्रहों को आपस में संयोजित किया।  

 चौथी ऊर्जा कूष्माण्डा है। कूष्माण्डा ऊर्जा ने ये तीनों ऊर्जाओं (शैलपुत्री, ब्रम्हचारिणी, चंद्रघंटा) से बने हुए संसार को  एक कद्दू (कूष्माण्डा) फल के आकार में स्थापित करके ब्रम्हांड बना दिया। 

कूष्माण्डा ने पूरी प्रकृति को बांध दिया और ब्रम्हाण्ड का निर्माण कर दिया। 

जिसमे हमारी सौर मंडल जैसे अनेक सौर मंडल और हमारी मिल्कीवे आकाशगंगा की तरह अनेक आकाशगंगाएं इस ब्रम्हांड में स्थित हैं। 

चौथी ऊर्जा ने इन तीन ऊर्जा को इस तरह से बांध दिया, और हमारे सारे ब्रम्हांड और ग्रहों को उस परिधि के अंदर सुरक्षित कर दिया।

यह ऊर्जा हमारे शरीर में कोशिका की संरचना बनाती है
जिसके अन्दर जीवन उत्पन्न करने वाले
सभी तरह के अणु होते है

अधिक जानकारी के लिए यूट्यूब के मेरे इस लिंक में जाएं

https://youtu.be/Jtqmxycn-xE?si=3AIEe1T30K21uqjg
वृक्षायुर्वेद की ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में न्यूट्रिशन प्रबंधन के 5आयाम है
रूप चिकित्सा (आयोनाइज्ड एटम)
रंग चिकित्सा 
गंध चिकित्सा 
स्वर चिकित्सा 
स्पर्श चिकित्सा 

आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में मैने BSC AG के विद्यार्थियों को वृक्षायुर्वेद की केमिस्ट्री (चित्तीकरणम,रंग चिकित्सा विज्ञान)सिखाया।

वृक्षायुर्वेद की
ये पंच चिकित्सा फसल के मूल स्वरूप को पुनर्स्थापित कर सकती है।
बीज के मूल स्वभाव की पुनः लौटा सकती है।

इससे फसल की पंच स्तरीय कोश का निर्माण होता है।
ऑर्गेनिक केमिस्ट्री की आज की मेरी क्लास 

निम्न सभी स्लाइडों पर विस्तार से चर्चा की
2017 पंत नगर विश्वविद्यालय के बाद आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में इतने विस्तार से बताने का अवसर मिला
बहुत यादगार हुआ इसीलिए इसे यहां भी संजो रहा हूं

सुबह 7.30 बजे से ऑनलाइन कक्षा के 55छात्र थे
और 
दोपहर में 2.30 से ऑफलाइन 
Msc Ag के बाद कृषि में व्यावसायिक पाठ्यक्रम पर कार्य करने वाले शिक्षकों को यह केमिस्ट्री बताई ।

कार्बन कैसे जीवन शृंखला बनाता है
कार्बन हाइड्रोजन से जुड़ता है तो किस तरह का ऊर्जा चक्र और जीवन चक्र बनाता है
और 
कार्बन यदि नाइट्रोजन से जुड़ता है तो कैसे लिग्निन और ह्यूमस बनाता है।

संतृप्त कार्बन
और 
असंतृप्त कार्बन
के गुण कार्य व्यवहार
कार्बन के धातुओं के जुड़ने से बनी शृंखला
और 
अधातुओं से बनी शृंखला पर व्यापक चर्चा की
और 
इनके सरल सरल प्रैक्टिकल प्रयोग भी सिखाए

 प्राचीन भारत में धातुओं को आयोनाईजेसन करके कार्बन से आबद्ध  करने की कला क्या थी..बताया

जितने भी ऑफलाइन ऑनलाइन मेरे क्लास में आए  विद्यार्थी और शिक्षक बताएं कि मैंने आज केमिस्ट्री कैसे पढ़ाई
तीसरी ऊर्जा 
चंद्रघंटा 
(इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फोर्स)

https://youtu.be/aYoD3EoZMyc?si=DfnVf1A72FUJlwzd

 ये जो तीसरी ऊर्जा है, जो नाद ( आवाज) है, इसका नाम चंद्रघंटा है। 
जिसकी आकृति अर्धचंद्र की तरह है और  जो किसी पदार्थ से टकराती है तो नाद उत्पन्न करती है, घंटी बजाती है। हमारे पूर्वजों ने इसकी आकृति और क्रिया को देखकर इसका नाम चंद्रघंटा रखा है। 

 कितना सटीक नाम है, जैसा काम, वैसा नाम। 

हमारे मोबाइल में बजने वाली घंटी इसी ऊर्जा की प्रक्रिया है।

 आधुनिक विज्ञान इसी ऊर्जा को इलेक्ट्रोमेगनेटिक वेब्स कहता है।

 आप स्वयं ही सोचिए जो ऊर्जा मोबाइल की घंटी बजाती हो उसको चंद्रघंटा बोलना कितना सटीक है। 

हमारे पूर्वज ऋषियों ने इस ऊर्जा को नजदीक से देखा होगा, समझा होगा तभी यह नाम दिया है। 

 इस ऊर्जा अर्थात इलेक्ट्रोमेग्नेटिक के छोटे से भाग में सातों रंग सामाहित हैं, इन्हीं रंग के माध्यम से आप- मैं और सभी, मोबाइल फोन के माध्यम से फोटो वीडियो भेजते हैं, बात करते हैं।  ये जो रंग (फोटो) है, जिसे मैं अपने सेल फोन से आपके सेल फोन में भेज रहा हूँ, जो असल में वेब्स ( तरंगे) हैं, जिसे निम्न चित्र के माध्यम से दर्शाया गया है।

 इसमें 7 रंग होते हैं अर्थात यह तीसरी ऊर्जा  प्रकाश और आवाज को लेकर आती-जाती है।

जहां तक हवा है वहां तक इस ऊर्जा में नाद आवाज है
जहां हवा नहीं है वहां यह ऊर्जा प्रकाश के रूप में गमन करती है।

तीसरा चक्र 
मणिपुर चक्र और नाद रं इस ऊर्जा को प्रकट करता है।
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*दूसरी ऊर्जा* 
ब्रह्मचारिणी (ग्रेविटेशनल फोर्स)

https://youtu.be/yCulxWxoqHk?si=oxGiAtoMSVX1Kxo2

 ये जो दूसरी ऊर्जा है, इसका नाम ब्रम्हचारिणी है। यहाँ ब्रम्ह का अर्थ है, “इलेक्ट्रॉन’’ तथा “चारिणी” से तात्पर्य पकड़ कर रखने वाली, अर्थात् जो इलेक्ट्रॉन को पकड़कर रखती है और इलेक्ट्रॉन किसको पकड़ कर रखती हैं? प्रोटॉन- न्यूट्रॉन को। जिस इलेक्ट्रोन ने अणुओं को बांधकर रखा है,  उसको दूसरी ऊर्जा ब्रम्हचारिणी ने पकड़कर रखा है। इसको आधुनिक विज्ञान गुरूत्वाकर्षण बल कहता है। इसी बल ने  पूरे ब्रम्हांड को पकड़कर रखा है। हमारे प्राचीन ऋषियों ने इस ऊर्जा का नाम स्पष्ट तौर पर ब्रम्हचारिणी दिया है। 

जो श्वेत धवल है, जिसके हाथों में रूद्राक्ष की मनके हैं, मानों ये मनके ब्रम्हाड के तारे, ग्रह, उपग्रह हों। जिनको इस ऊर्जा ने एक धागे में बांधकर पीरो दिया हो, न कोई आगे जा सकता न कोई पीछे हो सकता हो, सब ग्रह, तारे अपनी कक्षा में अनावरत घुम रहे हैं। 

 पूरे ब्रम्हांड को पकड़कर रखने वाली ऊर्जा ब्रम्हचारिणी ऊर्जा है।

 जैसे हमारे हाथों में 4 या 5 गेंद बंधी हो और हम उन गेंद को कही भी फेंके वो वापस हमारे पास ही आएंगी। वैसे ही इस ब्रम्हांड में दिखने वाले सूर्य, चंद्रमा, तारे, और हमारी पृथ्वी, कितनी बड़ी हैं? 
इस सौरमण्डल के सामने रेत के कण के बराबर हैं। इस सौरमण्डल में पृथ्वी से ज्यादा बड़े-बड़े ग्रह शनि, ब्रहस्पति भी भौरे की लट्टों की तरह घुम रहे हैं। हमारी पृथ्वी 10 हजार किलो मीटर/ सेकंड की गति से सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है, और अपने अक्ष में 23 ½ डिग्री झुकी होने पर भी 1600 किलोमीटर/सेकंड की गति अपने अक्ष में घुमती है। इतने पर भी कभी पृथ्वी विचलित नहीं हुई। अगर होती तो हम कभी भी भूतकाल, वर्तमानकाल और भविष्यकाल में होने वाली खगोलीय घटना को निश्चित समय में देख नहीं पाते।

जैसे इलेक्ट्रॉन ने सूक्ष्म अणुओं को पकड़ कर रखा है
वैसे ब्रह्मचारिणी ऊर्जा ने ब्राह्मण के ग्रहों को पकड़ कर  रखा है।

शैलपुत्री ऊर्जा ने ग्रह बनाए तो दूसरी ऊर्जा ब्रह्मचारिणी ने इन ग्रहों में गुरुत्वाकर्षण का बल दिया।
दो ग्रहों के बीच जहां गुरुत्वाकर्षण बल शून्य हो जाता है वही आकाश तत्व है,
और 
आकाश जहां शून्य है कुछ नहीं है वह पहला महाभूत है
जिसे हम पिता भी कहते है
भूमि माता है
तो
आकाश पिता है।

सृष्टि शून्य में स्थित है
इस शून्य को निर्मित करने वाली दूसरी ऊर्जा को हमारे पूर्वज ऋषियों ने देखा
श्वेत धवल
शांत
सौम्य
स्थिर
एक हाथ में मनको की माला
दूसरे हाथ में कमण्डल
कोई सवारी नहीं

हमारे पूर्वजों ने इन सभी सूक्ष्म ऊर्जाओं को देखा है
जैसा देखा वैसा वर्णन किया

इस सूक्ष्म दुनिया को आधुनिक क्वांटम फील्ड कहता है,कुछ समझने की बात कहता है,पर देखा नहीं इसीलिए ग्रेविटेशनल फोर्स को अभी एक्स मानकर चल रहा है।

हमने देखा,इन्हें देवी कहा,माता के रूप में पूजते है,माता तो सचमुच सहज होती है,केवल याद करने से,उपासना करने से,ध्यान करने से आपके हृदय में प्रकट हो जाती है,आंख बंद करो और पूरे श्रद्धा से स्मरण तो करो।
TCBT का पंच महाभूत ऊर्जा से पूर्ण सरसों का बीज
उच्च क्षमता उत्पादन वाला देशी बीज
350रुपए प्रति किलो मे प्राप्त करें
120दिन की फसल अवधि
बीज दर प्रति एकड़ 1किलो
🌟*पहली ऊर्जा* 🌟
🌱!*"शैलपुत्री"*!🌱
.(हिंग्स बोसॉन कण).

सृष्टि बनने वाली नौ शाश्वत ऊर्जा में पहली ऊर्जा का नाम शैलपुत्री है।
https://youtu.be/NbDtSn34rFE?si=VBaRmHqyAtqwhG9U
पूरी वीडियो इसमें है

 शैल अर्थात पत्थर, पुत्री अर्थात बेटी, पत्थर की बेटी। 
ऐसी ऊर्जा जो ठोस एटम (प्रोटॉन न्यूट्रॉन)का निर्माण करती है जो आपस में मिलकर भूमि तत्व(108 ठोस अणु/एटम की श्रृंखला) बनाती है। पहले अणु की विशाल श्रृंखला सूर्य,सूर्य के अंदर बने अन्य अणु,सूर्य के फटने (सुपरनोवा) से बने ग्रह उपग्रह।

यह ठोस आकृति देने वाली ऐसी  ऊर्जा है, इसके चारो प्रकाश निकलता है, इसी ऊर्जा ने अन्य ऊर्जाओं से संयोजन करके ऊर्जा के 64 पंुज ( 64 योगिनयों ) का निर्माण करती हैं और यही 64 योगिनी त्रिषरेणु का निर्माण करती है। त्रिषरेणु अर्थात एक रस्सी के तीन रेणु जो आपस में गुथकर रस्सी बना देती हैं। इन त्रिषरेणुओं को ही प्राचीन ऋषियों ने ब्रम्हा, विष्णु, महेश कहा है।

 आधुनिक विज्ञान इनको इलेक्ट्रान, न्यूट्रान आैर प्रोटान कहता है और यही तीन रेणु में से एक प्रोटान एक इलेक्ट्रॉन के संयोजन से बना सृष्टि का पहला अणु/ एटम हाईड्रोजन, 
हाइड्रोजन की विशाल श्रृंखला सूर्य बना,हमारे सूर्य के पहले 8 सूर्य पहले बने है,जिनका जिक्र भगवान कृष्ण श्री मद भागवत गीता में किए है।

अब अन्य अणु कैसे बने इसे समझे।

 एक प्रोटान, एक न्यूट्राॅन और एक इलेक्ट्रान की रस्सी बनी तो हीलियम, तीन-तीन प्रोटॉन न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉन का जोड़ा लीथियम, चार-चार का जोड़ा बेरिलियम, पाँच-पाँच का जोड़ा बोरान, छ:- छ: का जोड़ा कार्बन, सात-सात का जोड़ा नाईट्रोजन, आठ-आठ का जोड़ा आक्सीजन, ऐसे ही बढ़ते-बढ़ते पन्द्रह-पन्द्रह प्रोटॉन, इलेक्टॉन, न्यूट्रॉन का जोड़ा फास्फोरस, सोलह-सोलह का जोड़ा सल्फर, उन्नीस का जोड़ा पोटेशियम, बीस में कैल्शियम, पच्चीस का मग्नीज, उन्तीस का तांबा, सैतालीस जोड़ों से चाँदी, 79 जोड़ों से सोना जैसे खनिज तत्वों का निर्माण हुआ।

 जैसे-जैसे जोड़ों की संख्या बढ़ती गई, नए-नए खनिज तत्वों का निर्माण होता गया।  

 हर खनिज तत्व की रूप-रंग और गुण धर्म अलग-अलग हैं।

 सोचिए ये सब बने तो एक ही जैसे प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन से पर जोड़ों की संख्या बढ़ती चली गई और प्राप्त खनिज के रूप रंग गुण बदल गए। अर्थात इन त्रिषरेणु तक की ही दुनिया स्थिर दुनिया है, अर्थात इन त्रिषरेणु को बनाने वाले 64 योगिनी ऊर्जा और 64 योगिनी को बनाने वाली 9 ऊर्जा को समझ जाएं, इनके संयोजन को समझ जाएं तो पूरी प्रकृति की गुत्थी को सुलझाया जा सकता है। 

हमारे कुछ पूर्वज ऋषि, मुनि, और भक्तों ने इस गुत्थी को सुलझाकर ही "अष्ट सिद्धि और नौ निधि"  का ज्ञान प्राप्त कर लिया था । इसी ज्ञान के आधार पर महर्षि परशुराम ने चावल, केला, सुपारी, नारियल और हल्दी जैसे नए जिन्शो का निर्माण किया। महर्षि विश्वामित्र ने कामधेनु से अच्छी गाय बनाने की  हट ने भैंस जैसी ज्यादा दुध देने वाली प्रजाती बना दिया। 

 भारत में पाए जाने वाले बीज की हजारों प्रकार की प्रजातियां अरहर, मूंग, मटर मसूर, चना, धना और फलों-फूलों और सब्जियों की अनेक प्रजातियों का निर्माण इसी अष्ट सिद्धी ज्ञान के आधार पर किया।

अष्ट सिद्धियों से नौवमीं ऊर्जा सिद्धिदात्रि की योग शक्ति से प्रकृति को बनाने वाली निधियों, अणुओं और जीवाणु के योग का प्राप्त किया जा सकता है।

 इसलिए
 पहले हम पहली ऊर्जा से इस ज्ञान को क्रमश: समझते हैं।

 प्रथम ऊर्जा शैपुत्री ने ही पहले अणु बनाया फिर तारे बनाए और फिर ग्रहों-उपग्रहों का निर्माण किया है।  दिखने वाली ब्रम्हाण की ठोस चीजें प्रोटॉन से बनी है। यह प्रोटॉन ने सभी अणुओं को बनाया है यही गोल्ड स्टीफन ने बताया और रदरफोर्ड ने 1911 में सिद्ध किया।  पूरी दुनिया को प्रोटॉन ने बनाया है यह बात सब जान गए परंतु यह प्रोटॉन को किसने बनाया है इसकी बहस 1950 से शुरू हो गई। प्रोटॉन को एक सुक्ष्म बब्ल्स ने बनाया है । ऐसी कल्पना सत्येन्द्र नाथ बोस ने 1988 में दिया तथा 2012 में इस बात को CERN संस्था के वैज्ञनिक पीटर हिंग्स ने सिद्ध किया।

 CERN संस्था ने 70 देशों के आर्थिक सहयोग और 2660 वैज्ञानिकों और स्टॉफ सदस्यों के साथ मिलकर के प्रोटान किस अणु से बना इसकी खोज के लिए फ्रांस और स्वीजरलैंड की सीमा पर जमीन से 250 फिट नीचे 27 किमी की गोलाकार सुरंग बनाई ।  इस सुरंग में चारों तरफ चुम्बक लगाया गया, गोले के दो तरफ फैक्ट्री बनाकर गोले को फैक्ट्री से जोड़ा गया। फैक्ट्री से दो तरफ (दो दिशा में) प्रोटॉन दौड़ाए गए।  3 लाख कि.मी.प्रति से. की गति से प्रोटॉन को आपस में टकराकर तोड़ा गया और टूटने से अनेक कण निकले जिसमें से एक कण “हिग्स बोसॉन कण‘‘ था।

 चूंकि इस कण की कल्पना “बोस’’ ने की और हिग्स ने इस कण को सिद्ध किया इसलिए इस कण को हिग्स बोसान कहा गया।

 इस खोज की गई हिंग्स बोसाॅन कण में सेकण्ड के हजारवें हिस्से ने सारी ऊर्जा को सोखकर फिर प्रोटॅान बना दिया। विज्ञान कहता है, कि प्रोटॉन न्यूट्रॅान से प्रकृति बनी और प्रोटॅान न्यूट्रॅान को इस कण ’’हिग्स बोसान’’ ने बनाया, इसलिए पश्चिम की दुनिया ने इस कण को गॉड पॉर्टिकल भी कहा। 2012 में इसे भगवान की खोज के बराबर माना गया, किन्तु याद रहे ये भगवान नहीं है। मैं आगे कही इस पर विवेचना करूंगा। वही हमारे पूर्वजों ने इस ऊर्जा को जान लिया था, हमारे पूर्वजों ने कहा, यह कण एक ऊर्जा है, जो ठोस जैसी दिखती है, यह इतनी सूक्ष्म है कि कहीं भी आ जा सकती है, ये कण नहीं है, ये पत्थर की बेटी है, मतलब जैसा इसका स्वरूप है, वैसा इसका नाम दिया गया, इसलिए इसे ’’शैलपुत्री’’ कहा गया और हमारे ऋषियों ने इसे पहली ऊर्जा कहा है। 
 शैलपुत्री ही पहली ऊर्जा है, जिसने प्रकृति की सारी ऊर्जा को सोखकर एक कण बना दिया और इस कण ने प्रोटॅान, न्यूट्रॉन बनाया फिर प्रोटॅान, न्यूट्रॉन ने पूरी प्रकृति के 108 तत्व बनाए और 108 तत्वों के मिलने से हम, तुम, पेड़-पौधे बने हैं। शैलपुत्री ही पूरे ब्रम्हांड की आधार ऊर्जा है। शैलपुत्री ने भूमि तत्व की रचना की तथा ब्रम्हचारिणी ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने का कार्य करती है, इस तरह शैलपुत्री ने भूमि तत्व की रचना की और भूमि पुत्री कहलाई।

यही ऊर्जा भूमि पुत्री बनकर
हिमालय में जन्म ली
प्रकृति बनाने के भगवान शिव की घोर तप की,पति रूप में प्राप्त कर 
मन (भगवान कार्तिकेय)
बुद्धि (भगवान गणेश) 
को जन्म दी,
ये प्रकृति बिना मन बुद्धि के सजीव नहीं हो सकता था तो इनको जन्म देकर
प्रकृति को पूर्ण की।
तो ऋषियों ने प्रकृति को पूर्ण करने वाली इस माता को पार्वती कहकर पूजा की

भारतीय दर्शन दुर्गा इन्हीं ऊर्जाओं की काल यात्रा की गाथा है जिसे तुलसीदास जी ने बड़े ही जीवंत स्वरूप में लिखा।
ऊर्जा के उपासक यदि दुर्गा सप्त सती नहीं पढ़ पाते है तो तुलसीदास कृत रामायण की इन्हीं पंक्तियों को दोहराएं

🌼⚜️ पार्वती माता स्तुति ⚜️🌼

जय जय गिरिराज किसोरी। 
जय महेस मुख चंद चकोरी। ।।
जय गजबदन षदानन माता। 
जगत जननि दामिनी दुति गता । ।।

नहिं तव आदि मध्य अवसाना। 
अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना । ।।
भव भव बिभव परभव करिणी। 
बिस्व बिमाही स्वबस बिहारिनी।।

पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव लिंग।
महिमा अमित न सखिं कहै सहस सारदा शेष । ।।

सेवत तोहि सहज फल चारी। 
बरदायिनी पुरारि पिरि ।।
देबि पूजी पद कमलफे।
 सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे ।।

मोर मनोरथु जानहु नीके। 
बसहु सदा उर पुर सबहीं ।।
कीन्हेउँ प्रगट न करण तेहिं। 
अस कहि चरण गहे बदेहीं ।।

बिनय प्रेम बस भाई भवानी।
 खसि माल मूरति मुसुकानि ।।
सादर सियँ प्रसादु सिर धरेउ। 
बोली गौरी हरषु हियँ अंतिमौ ।।

सुनु सिय सत्य असीस हमारी। 
पूजिहि मन इच्छा विवाह ।।
नारद बचन सदा सुचि सच्चा। 
सो बरु मिलिहि जाहिं मनु रचा ।।

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर साँवरो।
करुणा निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो । ।।

एहि भाँति गौरी असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली।
तुलसी भवनिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चाले । ।।

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लागे । ।।

🌼⚜️ देवी पार्वती की स्तुति का हिंदी अर्थ-⚜️🌼

जय जय गिरिबरराज किसोरी।
 जय महेस मुख चंद चकोरी। ।।
जय गजबदन षदानन माता। 
जगत जननि दामिनी दुति गता ।।

हे पर्वतराज हिमाचल की आपकी बेटी जय हो, जय हो। महादेव के मुखरूपी चन्द्रमा को देखनेवाली चकोरी आपकी जय हो। हे बिजली सी कांति से युक्त शरीर वाली जगतजननी, हे हाथी के मुख वाले गणेश जी और षड्मुख वाले कार्तिकेय जी की माता आपकी जय हो।

नहिं तव आदि मध्य अवसाना। 
अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना ।।
भव भव बिभव परभव करिणी। 
बिस्व बिमाही स्वबस बिहारिनी।।

हे माता न आपका अभिषेक है, न मध्य है और न अंत है। आपके कोटेशन प्रभाव के बारे में भी नहीं पता। आप दुनिया को उत्पन्न करनेवाली, पालनेवाली और नाश करनेवाली हैं। आप विश्व को मोहित करनेवाली हैं और स्वतंत्र रूप से विहार करनेवाली हैं।   

पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव लिंग।
महिमा अमित न सखिं कहै सहस सारदा शेष । ।।

पति को इष्टदेव वली श्रेष्ठ नारियों में हे माता आपकी पहली गणना है। आपकी अपार महिमा को हजारों सरस्वती और शेष जी भी नहीं कह सकते। 

सेवत तोहि सहज फल चारी। 
बरदायिनी पुरारि पिरि ।।
देबि पूजी पद कमलफे।
 सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे ।।

 वे वर देने वाली त्रिपुरारी (त्रिपुर के शत्रु) शिव की पत्नी हैं, आपकी सेवा से चारों ओर फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) आसानी से मिल जाते हैं। हे देवी ! आपके चरणकमलों की पूजा करके देवता, मनुष्य और मुनि सभी सुखी हो जाते हैं। 

मोर मनोरथु जानहु नीके। 
बसहु सदा उर पुर सबहीं । ।।
कीन्हेउँ प्रगट न करण तेहिं। 
अस कहि चरण गहे बदेहीं । ।।

 मेरे मनोरथ को आप भलीभाँति कहते हैं क्योंकि आप सदा सर्वसाधारण हृदय रूपी नगरी में रहते हैं। इसी कारण से कि मैं उदय न कर सकूं, यह सचिव सीताजी ने अपने चरण पर कब्जा कर लिया।

बिनय प्रेम बस भाई भवानी। 
खसि माल मूरति मुसुकानि । ।।
सादर सियँ प्रसादु सिर धरेउ। 
बोली गौरी हरषु हियँ अंतिमौ । ।।

भगवती पार्वती सीताजी के विनायक और प्रेम के वश में हो गए, उनके गले से गले तक खिसक गए और उनकी मूर्तियां बन गईं। माता पार्वती का हृदय हर्ष से भर गया और वे बोलीं

सुनु सिय सत्य असीस हमारी। 
पूजिहि मन इच्छा विवाह ।।
नारद बचन सदा सुचि सच्चा। 
सो बरु मिलिहि जाहिं मनु रचा ।।

माता पार्वती का हृदय हर्ष से भर गया और वे बोलीं- “हे सीता! मेरा सच्चा आशिष सुनो, तेरा मन पूरा होगा। नारदजी का वचन सदा पवित्र और सत्य है।

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर साँवरो।
करुणा निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो । ।।

जो वरफे दिल में बसा है वही वर चाहता है। जिसमें विदेशी मन अनुरक्त हो गया वही स्वभाव से सुंदर, सांवला वर संकट जाएगा। वह दया से पूर्ण और सर्वज्ञ है, नकली शील और स्नेह से जनता है।"

एहि भाँति गौरी असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली।
तुलसी भवनिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चाले ।।

इस प्रकार गौरी जी का आशीर्वाद जानकीजी सहित सभी साखियाँ हर्षित अनामिका हैं। तुलसीदासजी कहते हैं कि भवानी जी को बार-बार पूजकर सीताजी मन से राजमहल लौटकर चलीं। 

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लागे । ।।

गौरी जी को सीताजी के अनुकूल ज्ञान जो हर्षित हुआ वह नहीं कह सका। सुंदर मंगलों के साथ उनके वाम अंग फड़कने लगे।
मुंबई और पुणे के बीच में स्थित है लोनावाला
 और
 यहां पर एक बहुत सुंदर फार्म हाउस है संजय जैन जी का, 

इस फार्म हाउस में बहुत तरह के पेड़ पौधे लगे हुए हैं और पिछले तीन वर्षों में संजय जैन जी ने इन पेड़ पौधों में प्रचलित जैविक और प्राकृतिक खेती के खाद और घोल खूब डाले,
पर 
फायदा मिलने की बजाय इनको नुकसान ही हुआ 
कोई भी पेड़ पौधे स्वस्थ नहीं है कुछ पेड़ पौधे तो सुख भी गए

 मैं उनके खेत पर गया और उनके खेत में मिट्टी और पौधों में स्थापित हो चुकी नकारात्मक ऊर्जा की इकोलॉजी से बने फंगस और कीटों को दिखाया
 ऊर्जा के प्रयोग भी कराए
 अब आज से संजय जैन जी ने इस फार्म हाउस में TCBT के पॉजिटिव ऊर्जा वाले उत्पाद और प्रक्रिया अपनाने शुरू कर दिए है,
6माह बाद इनके खेत के परिवर्तन को तुलनात्मक देखेंगे
पर
अभी देखिए इस खूबसूरत जगह को
मेरे साथ..
हां जी
रसायन विज्ञान भारत की खोज है
आयुर्वेद में ढाई हजार रसायनों का जिक्र है
भारत के ऋषियों ने आयुर्वेद के पहले वृक्षायुर्वेद के रसायन दिए 

रस में अयन (आवेशित एटम) का होना रसायन है
आवेशित एटम के 5स्वरूप बताए
रूप
रंग
गंध
स्वर
स्पर्श

आज का विज्ञान तो केवल एटम  आधारित रसायन बनाए है वो भी केमिकल फार्म में
सिंथेटिक रसायन दिए
या
सल्फाइड रसायन दिए

ये दोनों प्रभावी तो है पर नुकसानदायक होते है

जिंक सल्फेट 
कॉपर सल्फेट
फेरस सल्फेट 
कैल्सियम सल्फेट 
मैग्नीशियम सल्फेट 
ये सब सल्फाइड फार्म के रसायन निगेटिव होते है
इनको गर्म तवे पर रखेंगे तो बदबू निकलेगी।
बदबू  निगेटिव ऊर्जा है,निगेटिव इकोलॉजी बनाती है 

हमारे पूर्वजों द्वारा बताए गए रसायन
सब आयोनाइज्ड होते है
इतना ही नहीं इन्हें रंग में,गंध में स्वर में कैसे दिये जा सकते है बताए 
इनको बनाने के लिए आयुर्वेद के
आसव प्रक्रिया
आरिष्ट प्रक्रिया
भस्म रसायन प्रक्रिया दिए

इन रसायनों को गौमूत्र से शोधन मारण करके निकालने की प्रक्रिया बताए

खेती में समस्याएं आती है और  आयुर्वेद की इन प्रक्रियाओं से  रसायन बनते चले गए और  150 फार्मूले विकसित हो गए।

पंच महाभूत की तृण मात्राएं (रूप रंग गंध स्वर स्पर्श) ही वे पंच तत्व है,जिनसे यह पूरी प्रकृति बनी है।

इन्हें प्राप्त करने की प्राकृतिक प्रक्रिया 
यम नियम आहार विहार प्रत्याहार है।
कृत्रिम प्रक्रिया से इन्हें प्राप्त करने के लिए TCBT में 
रूप चिकित्सा 
रंग चिकित्सा 
गंध चिकित्सा 
स्वर चिकित्सा 
स्पर्श चिकित्सा विकसित किए गए है,
अभी मैं इन्हें फसल उत्पादन के लिए पौधों पर उपयोग कर रहा हूं,कालांतर में ये मानव स्वास्थ्य पर भी उतने ही प्रभावी होंगे।

MCCAI पुणे में ये सब विषय रखने का मौका मिला
इसका संक्षिप्त वीडियो उपलब्ध है
🌾 *गेहूं की फसल में TCBT बीजोपचार और अन्न द्रव्य रसायन का कमाल!* 🌱

ठोस और मजबूत बालियाँ, स्वस्थ फसल और बेहतर उत्पादन की दिशा में प्राकृतिक खेती का प्रभावी तरीका। 🚜🌾

*TCBT के साथ — स्वस्थ पौधे, स्वस्थ फसल, खुशहाल किसान। 💚*

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🌱 छत पर छप्पन भोग वाटिका — अब आपकी छत बनेगी आपकी अपनी खेती की जमीन! 🏡🌿
हम रोज़ बाजार से सब्जियां खरीदकर खाते हैं… लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन्हें उगाते समय किन चीज़ों का इस्तेमाल किया गया?
तो क्यों न अपनी जरूरत की कुछ फल-सब्जियां अपने ही घर की छत पर उगाई जाएं? 🌱
इसी सोच के साथ TCBT लेकर आया है — TCBT Terrace Garden 🌿
इस प्रशिक्षण में सीखिए:
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🌱 *TCBT विधि से 25 एकड़ में मटर की खेती — बिना किसी कीटनाशक के उपयोग के!*
क्या प्राकृतिक तरीके से मटर की खेती की जा सकती है, वो भी बिना कीटनाशकों पर निर्भर हुए?
इस खेत के अनुभव में TCBT विधि के माध्यम से *25 एकड़ में मटर की खेती* की गई, जिसमें फसल प्रबंधन के लिए प्राकृतिक एवं TCBT आधारित प्रक्रियाओं को अपनाया गया। 🌿
इस वीडियो में जानिए किसान का अनुभव, खेत की स्थिति और *TCBT विधि से मटर की खेती की पूरी जानकारी।*
💬 आप भी TCBT प्राकृतिक खेती के बारे में जानना चाहते हैं?
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🌱 **Organic Summit 2026 — Pune में TCBT की विशेष भागीदारी!** 🌱

📍 **पुणे | Organic Summit 2026**

प्राकृतिक एवं जैविक खेती को नई दिशा देने वाले **श्री ताराचंद बेलजी (गुरुजी)** Organic Summit 2026 में **“Panchmahabhut Krishi – The Five Element Approach to Farming”** विषय पर अपने विचार साझा करेंगे। 🌿

🌍 यह Summit प्राकृतिक खेती, मिट्टी के स्वास्थ्य, टिकाऊ कृषि, किसानों एवं FPOs के लिए बाजार के अवसर, ऑर्गेनिक प्रोसेसिंग, सर्टिफिकेशन और ग्लोबल मार्केट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है।

✨ **TCBT — ताराचंद बेलजी तकनीक**
प्रकृति आधारित खेती की सोच को किसानों तक पहुँचाने की एक पहल।

📅 **6 अक्टूबर 2026**
📍 **Bajaj Gallery, MCCIA Trade Tower, Senapati Bapat Road, Pune**

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🌱 Organic Farming Based Agro-Tourism & Ecotourism Village 🌱
🌴 केरल में भी TCBT का डंका! 🇮🇳

🥔 एग्रीमेंट में 5 किलो के जगह आया 16 किलो कंद! 😲🔥

यह सिर्फ खेती की कहानी नहीं, बल्कि किसान के अनुभव, प्राकृतिक खेती और बेहतर परिणाम की कहानी है।
केरल के किसान ने TCBT तकनीक के साथ अपने खेती के अनुभव को साझा किया है। 🌿

🎥 सुने पूरी कहानी किसान की जुबानी और जानिए उनका अनुभव।

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🌱 <nis:link nis:type=tag nis:id=tcbt nis:value=TCBT nis:enabled=true nis:link/> से सुंदर, शानदार और पोषणीय गृह वाटिका! 🌿

🍅🥕🌶️🍆🍋🌸 50+ फल, फूल, सब्ज़ियाँ और मसालों से सजी यह शानदार गृह वाटिका प्राकृतिक खेती की खूबसूरत मिसाल है।

👨‍🌾 गोपेश्वर सिंह यादव जी का प्रयास यह दिखाता है कि सही सोच और प्राकृतिक तरीके से घर के आसपास भी विविधतापूर्ण एवं पोषण से भरपूर वाटिका तैयार की जा सकती है। 🌱✨

🌿 प्रकृति से जुड़ें • पोषण बढ़ाएँ • जैविक खेती अपनाएँ

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🌿 करेले में Branching कैसे करें? 🌿

करेले की अच्छी बढ़वार और बेहतर फलन के लिए सही समय पर Branching और पौधे की ट्रेनिंग करना बेहद महत्वपूर्ण है। 🌱

इस वीडियो में जानिए👇
✂️ करेले में Branching कैसे करें?
🌿 मुख्य तने से शाखाएँ कैसे विकसित करें?
🥒 बेहतर फलन के लिए पौधे की सही ट्रेनिंग
🌱 पौधे की बढ़वार को संतुलित रखने के जरूरी तरीके

TCBT की प्राकृतिक खेती तकनीक के साथ पौधे को समझें और खेती को बेहतर बनाएं। 🌾

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🌱 कद्दू के पौधे में Branching कैसे करें? 🎃

कद्दू के पौधे की सही Branching और Training से पौधे की बढ़वार को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकता है। इस वीडियो में जानिए👇

🌿 कद्दू में Branching कब और कैसे करें?
✂️ मुख्य तने से शाखाएँ कैसे विकसित करें?
🎃 बेहतर फलन के लिए पौधे की सही Training
🌱 पौधे की बढ़वार को संतुलित रखने के जरूरी तरीके

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🥒 खीरे के पौधे की कटिंग कैसे करें? 🌱

खीरे की अच्छी बढ़वार और बेहतर उत्पादन के लिए पौधे की सही कटिंग/प्रूनिंग को समझना जरूरी है। इस वीडियो में जानिए:

🌱 खीरे के पौधे की कटिंग कैसे करें?
🌼 नर फूल और मादा फूल की पहचान कैसे करें?
🥒 मादा फूल से फल कैसे बनता है?
✂️ किन हिस्सों की कटिंग करनी चाहिए और क्यों?
🌿 पौधे की सही बढ़वार के लिए किन बातों का ध्यान रखें?

TCBT की प्राकृतिक खेती तकनीक के साथ पौधों को समझें और बेहतर तरीके से खेती करें। 🌾

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