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ताराचन्द बेलजी

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TCBT के कैप्सूल कल्चर के उपयोग से गन्ना डबल

बिहार के गन्ना किसान और कृषि वैज्ञानिक का कंट्रोल प्लाट के साथ प्रयोग
देखें फसल 
डॉ विनय सिंह जी की
कृषि वैज्ञानिक एवं किसान 
ग्राम लक्ष्मीपुर, वाल्मीकि नगर,बिहार
इस दिवाली आओ 
वहां एक दीप जलाएं 
जहां अभी अंधेरा है।।

दिल्ली में समाजसेवी ईश नारंग जी 10बच्चों का पालन पोषण कर रहे है,पढ़ा रहे है।

ऐसे ही समाज में बहुत जगह अशक्त और असहाय लोग है।
प्रकृति में भी नदिया,झरने,तालाब असहाय है
हमको चयन करना है कि हम किसकी कैसे सहायता कर सकते है।

इन बच्चों से मिलके अच्छा लगा
मिले आप भी इन बच्चों से
नेपाल में TCBT जैविक खेती
पकने की अवस्था में भी धान हरि कच्च है।
TCBT के जीवाणुओं का कमाल है ये
☀️धनतेरस का धन☀️
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☀️अन्न धन
☀️गौ धन
✅ये प्रजा का धन है,समाज का धन है।

☀️गज धन 
☀️बाज धन
✅ये राजा का धन है।

प्राचीन ज्ञान में ये चार ही धन बताए गए थे।

सोना चांदी कौड़ी और रुपया 
ये धन नही बल्कि वास्तविक धन(अन्न) प्राप्त करने के साधन है।
हां जी धन नही साधन है मात्र सा+धन

जिसके पास भी ये दो धन (अन्न धन और गौ धन) होगा 
वह कभी भूखा नहीं मर सकता
वह कभी कुपोषित नहीं होगा

कितना ही लॉक डाउन लग जाए 
उसके खेत से अनाज तो पैदा होगा ही
कितना ही अकाल पड़ जाए 
गाय के दूध दही से से वह पल ही जाएगा।

इन दोनों ही धन में ग्लूकोश रूपी अमृत होता है,

अन्न का ग्लूकोश 
दूध का ग्लूकोश
हमारे लिए अमृत ही है,
क्योंकि इनसे ही हमारा शरीर बनता है,चलता है।

जिस अमृत को प्राप्त कर सभी देव अमर हुए

चन्द्रमा वनस्पतियों का देवता है,
अमृत की शक्ति से ही चंद्रमा वनस्पतियों को जीवनी शक्ति देता है।
चन्द्रमा की शीतल किरणों से ही समस्त धरती का जल वर्षा के बाद शुद्ध हो जाता है।
यह अमृत की शक्ति है

इसी अमृत को प्राप्त करने का ज्ञान 
आयुर्वेद है।

इस ज्ञान को देने वाले भगवान धन्वंतरी का आज प्राकट्य दिवस। है।

इन्होंने आज ही समुद्र मंथन से प्रकट होकर अमृत रूपी रसायन देवताओं को दिया है।

इसी लिए उनके याद में हम आज धनतेरस का पर्व मनाते है

आज की चंद्रमा की रोशनी के बाद हर औषधि में यह रसायन पूर्ण हो जाता है।

वर्षा ऋतु के बाद खेती की फसलों को काटकर हम अपने घरों में लाते है,
अन्न गाह कर उसे अपने भंडार में रखते है,
उस अन्न में रसायनों की मात्रा बढ़े
उनमें अमृत रूपी रसायन आए इस कामना से  पूरे उमंग और उत्साह के साथ भगवान धन्वंतरि से प्रार्थना करके हम धनतेरस का पर्व मनाते है।

इस नव अन्न धन को गाय को पहले खिलाते है
और
फिर गाय के जूठे अन्न को हम खाकर अपने स्वास्थ्य की कामना करते है।

आज सभी तरह अन्न और औषधियों
जैसे
अपामार्ग 
छुई मुई 
अश्व गंधा
आदि की पूजा की जाती है
और फिर
दीपावली की रात्रि में इन अन्न और औषधियों दीपक को रोशनी दिखाकर दूसरे दिन प्रात: इनके जड़ों को निकालकर धुलकर अन्न के साथ मिलकर बिना नमक डालें पकाकर गायों को खिलाया जाता है
और गाय से थोड़ा जूठन बचाकर खुद खाया जाता है।
दुनिया में सबसे महंगा पदार्थ लार को कहा गया है
जब गाय इन पके अन्न औषधि को खाती है तो अपनी लार उसमे छोड़ती ही है

इस तरह से अन्न औषधि के अमृत और गाय की मुंह से निकली लार को खाकर वस्तुत: हम वर्ष भर निरोगी रहे
यही धनतेरस है।
कुछ परिवार कद्दू की सब्जी या सुरन की सब्जी भी दीपावली के दिन खाते है,इनका भी एक विशिष्ट महत्व है।

हर अन्न और औषधि
अपना सब कुछ बलिदान करके हम हमे पोषण देती है।
(औषधि जड़ से उखड़कर और अन्न के अंदर का बीज का जीवन समाप्त होकर हमारा  भोजन बनता है)

गाय भी अपने भोजन का पूरा सार दूध,दही,घी,और छाछ जैसे अमृत रूपी  रसायन के रूप में हमे प्रदान करती है
अस्तु
अन्न ही धन है
गौ ही धन है
इन दोनो धन को अपनाए
दिए जलाएं धनतेरस मनाएं
🙏
मिताली-ताराचंद बेलजी की ओर से आप सभी को
धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं
मटर की इल्ली तो मरी ही फसल भी हरि कच्च हो गई

TCBT के नीम बाण
और 
अमृत धारा का कमाल

क्योंकि

TCBT के नीम तेल में अन्य तेल के साथ घुलनशील अवस्था में मिश्रित है
तेल में सल्फर होता है
जो एक प्रकार का फंगीसाइड भी होता है,फंगस खत्म होता है तो पौधा स्वत हरा होता है,
तेल के प्रोटीन में एक भाग नाइट्रोजन होता ही है जो घुलता है तो पौधे को नाइट्रोजन देता ही है।

अमृतधारा में स्थित
आजवाइन सत 
पुदीना सत (पिपरमेंट)
शुद्ध कपूर
पौधे में ठंडक बढ़ाता है,मटर के पौधे को ठंड चाहिए ही होता है जो अमृतधारा दे ही देता है,साथ ही ये तीनों सत एक प्रकार के फंगीसाइड होते है जो पौधे के अंदर के जाइलम फ्लोएम में फंगस  दूर करता है।
तो
पौधा चल पड़ता है।

यही हुआ मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के शाहपुर ग्राम टिकरी के निवासी संजय सिंह जी के खेत में 
देखिए सफलता की कहानी 
संजय सिंह जी की जुबानी
मिलिए 65 एकड़ में जैविक धान उगाने वाले TCBT किसान आकाश पटेल ग्राम रामखिरिया जिला जबलपुर से

धान की निरोगी और बम्पर फसल देखें

इस वर्ष केमिकल खेती से धान की फसल लेने वाले किसान जानते है कितनी बीमारियां आई है,कितनी परेशानी हुई है
आकाश पटेल जी के धान में
कोई ब्लास्ट ब्लाइट नहीं
कोई माहू नहीं
कोई तनाछेदक नहीं आया
(65 एकड़ में एक भी सूखी बाली नहीं दिखी)
खरपतवार की कोई विशेष दिक्कत नहीं आई

पूरे समय फसल हरि कच्च रही

TCBT की पंच महाभूत कृषि का ऊर्जा और  पंच कोश विज्ञान
सबकुछ ठीक कर देता है।
शरद पूर्णिमा  25 अक्टूबर की रात्रि को बीजों को वजन नापकर कांच या प्लास्टिक के पारदर्शी डिब्बे में बंद करके रात भर चांद की रोशनी में रखे
सुबह उन बीजों को पुनः वजन करें
बीज का वजन बढ़ता है तो इस वर्ष उस फसल की उपज अधिक आएगी
और यदि बीज का वजन घटता है तो इस वर्ष उस फसल की उपज कम आएगी
वजन घटता बढ़ता नहीं है तो फसल सामान्य रहेगी।

यह मेरी पिछले वर्ष की गणना की वीडियो है
देखें समझे और सभी राज्यों के किसान इस परिक्षण को करें

🌹शरद पूर्णिमा🌹 

चंद्रमा वनस्पतियों का देवता है,

 वनस्पति अर्थात पेड़ पौधे लताएं,अनाज औषधी आदि यह सब कब उगेंगे,कैसे उगेंगे, इनमें कब पतझड़ आएगा, कब फूल आएगा, कब फल आएगा,यह सब चंद्रमा ही तय करता है।

सरसों के बीज को जमीन में डालकर कितना भी सिंचाई करो उगता तो वह हस्त नक्षत्र में ही है।
ऐसे ही सब प्रकार की फसलों के बीजों को उगाने का नक्षत्र चंद्रमा की किरणों के साथ ही तय होता है। 

शरद पूर्णिमा में चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र के तारामंडल के सामने होता है, अश्विनी नक्षत्र को सबसे अधिक कांतिमान अर्थात सौंदर्य प्रदान करने वाला नक्षत्र माना गया है, भारत का प्राचीन ज्ञान यह भी कहता है कि शरद पूर्णिमा में चंद्रमा की किरणें 16 कलाओं से युक्त रहते है,किरणों में स्वर्ण की ऊर्जा रहती है,

 चंद्रमा की किरणों में वे शक्तियां हैं जिनसे जीवन उत्पन्न होता है।
खेती करते समय हमने यह पाया है की पूर्णिमा में मिट्टी में पॉजिटिव जीव की अर्थात फसल को बढ़ाने वाले जीवो की ज्यादा उत्पत्ति होती है और अमावस्या के समय में फसल को नष्ट करने वाले जीवों की अर्थात फंगस वायरस और कीटों की उत्पत्ति या प्रजनन ज्यादा होता है।

पूर्णिमा के समय जब चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण धरती के ऊपर बढ़ जाता है तो समुद्र का पानी ऊपर उठने लगता है, पेड़ पौधों का जीवन रस पत्तों के तरफ आ जाता है, इसीलिए औषधि के लिए पत्तों को बीजों को फलों को तोड़ने का कार्य शरद पूर्णिमा के बाद से ही  प्रारंभ किया जाता है।

इस समय फसलों में पके हुए धान्य में जीवन रस आने से धान्य का स्वाद बढ़ जाता है। इसलिए इस समय धान्य फसलों की कटाई की जाती है।

चंद्रमा खुद प्रकाशित नहीं होता यह सूर्य की किरणों को रिफ्लेक्ट करके धरती की ओर भेजता है,
दर्पण से सूर्य की रिफ्लेक्ट करने वाली रोशनी आंखों को चुभती है,ऐसा आपने अपने जीवन में कभी न कभी अनुभव में लिया होगा या नहीं लिया हो तो करके देख लेना, दर्पण से रिफ्लेक्ट हुए रोशनियों से आंखें चुंधिया जाती हैं 
  इसमें दोष सूर्य का नहीं है दोष दर्पण का है जिसने हमारी ओर सूर्य की तीक्ष्ण किरणों को भेजा,
पर चंद्रमा ऐसा नहीं करता चंद्रमा सूर्य की तीक्ष्ण किरणों को सोख लेता है और सौम्या सफेद किरणों को धरती की ओर भेजता है इसलिए चंद्रमा हमें सफेद दिखाई देता है।
अब चंद्रमा केवल सूर्य की ही सफेद किरणों को ही हमारी ओर नहीं भेजता अपितु चंद्रमा के पीछे जो अलग-अलग नक्षत्र है अर्थात तारामंडल का समूह है उनकी किरणों को भी हमारी ओर भेजता है,
शरद पूर्णिमा में चंद्रमा एक विशेष तारामंडल अश्विनी नक्षत्र के सामने होता है।
यह तारामंडल सौंदर्य प्रदान करने वाला स्वर्ण की आभा प्रदान करने वाला नक्षत्र होता है।

इसीलिए इस दिन का अर्थात शरद पूर्णिमा का बड़ा महत्व रहता है,शुद्ध भारतीय देशी गाय के दूध में,देशी  दुबराज चावल में शुद्ध देशी मिश्री डालकर इसे चंद्रमा के सामने रखकर फिर खाने का विधान है। इससे पेट के गट्स बैक्टीरिया अर्थात अच्छे वाले जीवाणु बढ़ते है।

 शरद पूर्णिमा के किरणों में इस औषधीय महत्व के कारण ही इस पूर्णिमा के बाद ही धान्य वाली फसलों की कटाई गहाई की जाती है। 
इसके पश्चात जमीन की जुताई भी की जाती है, कृषि परासर ग्रंथ के अनुसार इस समय में की गई जुताई के बाद की गई बुआई से फसलों से स्वर्ण निकलता है अर्थात इस समय की गई जुताई से अगली फसल स्वर्ण आभा वाली होगी अधिक उपज वाली होगी।

शरद पूर्णिमा में चंद्रमा की इन्हीं जीवनी शक्ति की ऊर्जाओ का उपयोग करने के लिए हमारे पूर्वज आज शरद पूर्णिमा की रात्रि में अपने बीजों को तौलकर चांद की रोशनी में रखते थे दूसरे दिन इन बीजों का पुनः वजन करते थे जिन बीजों का वजन बढ़ जाता था इसकी बुवाई करते थे और जिन बीजों का वजन घट जाता था अगले एक वर्ष उनकी बुवाई नहीं करते थे।

आज की रात आप 100 - 100 ग्राम बीज चांद की रोशनी में छत पर रखे या घर के आंगन में सुरक्षित रखें और दूसरे दिन सुबह 9:00 तक सूर्य की रोशनी दिखाकर फिर इन बीजों को पुनः तौल लें, जिन प्रकार के बीजों का वजन घट जाए उस बीज को अगले 1 वर्ष तक हमें खेती में बुवाई नहीं करना है ऐसे बीजों से इस वर्ष अच्छी फसल नहीं देंगे और जिन बीजों का वजन बढ़ गया है उन बीजों की बुवाई करना इन बीजों से इस वर्ष ज्यादा उत्पादन होगा।

अमावस्या के समय धरती का गुरुत्वाकर्षण बढ़ जाता है, गुरुत्वाकर्षण शक्ति अंदर अंतरिक्ष की ऊर्जा धरती के अंदर समाने लगती है,पौधों की जीवनी रस जड़ों में चली जाती है,इसीलिए इस समय हमारे पूर्वज जमीन की जुताई निंदाई गुड़ाई को प्रतिबंधित कर दिए थे,
  अमावस्या के आसपास के समय बहुत से कीटों का जन्म  होता है,फंगस और वायरस इनका प्रभाव अमावस्या के आसपास पड़ता है इसलिए इस समय पर अपने खेतों के ऊपर अग्निहोत्र बहुत आवश्यक है हो सके तो महामृत्युंजय मंत्रों के साथ घी मिश्रित औषधियों का हवन भी करें ताकि घी और गाय के गोबर के कंडे के जलने से निकली हुई ऊर्जा हमारे खेतों के ऊपर छा जाए ताकि धरती का गुरुत्वाकर्षण से जो अंतरिक्ष की ऊर्जा धरती के अंदर समा रही है वह पॉजिटिव हो जाए उससे कीटों का प्रजनन रुक जाएगा,और कीटों की तितलियां हमारे खेतों में अंडे बच्चे न दे पाएं और अच्छे जीव ही हमारे खेत में रह रहें,तो अगली अमावस्या अर्थात दीपावली की रात्रि अपने घरों में घी का दीपक जलाएं घी की आहुति देकर महामृत्युंजय मंत्र बोलते हुए इस कार्य को संपन्न करें।
बाकी अन्य अमावस्या में  जब खेत में फसल खड़ी हो तब अपने खेतों में भी यही प्रक्रिया करें।
शुभम् भवतु 
🙏
ताराचंद बेलजी
प्रोफेसर - प्राकृतिक खेती 
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर
TCBT जैविक किसान प्राइवेट लिमिटेड जबलपुर 

अपने जैविक खाद 
और 
जैविक खाद्यान्न 

उत्पादन पैकिंग विपणन के दूसरे दौर का कार्य प्रारंभ करने जा रही है।

पिछले 2वर्ष में अपने सभी तरह के खादों और कीट नियंत्रकों का देश भर के किसानों ने उपयोग किया है और सराहा है।
तो
इसका अब बड़े स्तर पर उत्पादन विपणन शुरू कर रहे है।

अपना जैविक खाद्यान्न का कार्य भी शुरू कर रहे है।

आप जिन भी किसान भाईयों को इस कार्य में निवेश या लोन की इच्छा है
कृपया सूचित करें।

निवेश राशि 10लाख के ऊपर रहेगा
इससे कम की राशि लोन के रूप में लिया जाएगा।
लोन देने वाले बंधुओं को TCBT विस्तार कार्य में प्राथमिकता दी जाएगी।
किसी भी तरह की और जानकारी चाहिए तो कंपनी की HR रिया जी +919232048564 से संपर्क करें।
🙏
ताराचंद बेलजी
MD 
TCBT जैविक किसान प्राइवेट लिमिटेड जबलपुर 
प्रधान कार्यालय
10, 3rd फ्लोर,मैकलसुता, राइट टाउन स्टेडियम,जबलपुर
मात्र 4माह में TCBT फार्मूले से पॉम का पौधा हरा कच्च हो गया 

TCBT किसान 
गेंदलाल देवांगन
डोंगर गढ़ राजनांदगांव छत्तीसगढ़ 
प्रति एकड़ tcbt फार्मूले और डोज
हाई CN रेशियों घोल 200लीटर
फालघुट्टी 200लीटर
ऊर्जा जल 500लीटर
जीवाणु जल 500लीटर
अन्न द्रव्य रसायन 200लीटर

ये सब फार्मूले अपने घर पर बनाकर डाले
और छत्तीसगढ़ में बेहतर पॉम का फॉर्म बना लिया
पहले साल की जैविक खेती
फसल - धान (कुल रकबा 65 एकड़)
प्रजाति - पूसा बासमती (25एकड़)
             क्रांति मोटा (40एकड़)

पद्धति - TCBT पंच महाभूत कृषि (वृक्षायुर्वेद विज्ञान)
किसान - आकाश पटेल,ग्राम रामखिरिया जिला जबलपुर मध्यप्रदेश
TCBT फार्मूले बनाकर डाले
प्रति एकड़ डोज
हाई CN रेशियों घोल 300लीटर
फसल घुट्टी 200लीटर
अन्न द्रव्य रसायन 200लीटर
जैव रसायन 100लीटर
उत्पाद खरीदकर डाले
बेसल डोज में
आयरन ऑक्साइड 50किलो
कैल्सियम मैग्नीशियम खनिज 50किलो
रॉक फॉस्फेट 50किलो
गोवर्धन खनिज खाद 100किलो
भू निर्विशी भस्म 2किलो
फफूंद रोधी भस्म 500ग्राम
स्प्रे किए

फास्फो पोटाश पाउडर 1किलो
कैल्सि फोर 1किलो
अणु भस्म 1किलो
जीवन द्रव्य 1लीटर
इन फार्मूलों ओर उत्पादों को बनाने के लिए

TCBT की सेवा प्रदाता टीम से संपर्क करे

शिवानी जी 9039007832
चंद्रभान जी 9039007834
सौरभ जी 9039007835 
से ऑफिस टाइम पर बात करे।

TCBT कृषि ज्ञान को समझना है तो 
प्रतिदिन शाम 7:30 बजे से 09:30 बजे तक (2घण्टे) होने वाले ऑनलाइन कृषि सत्संग में आयें।
लिंक👇
https://meet.zoho.in/vtnx-gyl-hjt

जरूरी हो तो tcbt ऑनलाइन सत्संग आयोजकों से संपर्क करे। *गुरुजी ताराचंद बेलजी* या TCBT विशेषज्ञ का अपने क्षेत्र अथवा समूह से जुड़े किसान भाइयों के बीच कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सम्पर्क करें।
👇🏼
राजनारायण भारद्वाज (संगठन ) 9425143090
कृष्ण शर्मा (प्रशिक्षक)9813686753

TCBT एजुकेशन / प्रशिक्षण की जानकारी के लिए रितिका जी 9232027423 से संपर्क करे।

PGS इंडिया भारत सरकार की प्राकृतिक खेती प्रमाणीकरण के लिए TCBT प्रमाणीकरण अधिकारी श्री सुरेश जी 9039007833 से संपर्क करें

ज्यादा जानकारी के लिए हमारे वेबसाइड पर जाएं👇🏼
www.tcbtjaivikkisan.com Part 4
पुण्य स्मरण

नेचयूको (नेचर+इको) फार्मिंग के प्रणेता दीपक सचदे जी की 8वीं पुण्यतिथि की श्रद्धांजलि

आपसे मुझे पंच महाभूत कृषि की प्रेरणा मिली
आपका स्नेह मुझे सदैव प्रेरित करता रहेगा।
इस वर्ष शरद पूर्णिमा में बीज परीक्षण की तैयारी करे
🌱 राम-राम सभी को! 🙏
📢 आज से – TCBT का टेरेस गार्डन कोर्स शुरू 
आप सभी को सूचित किया जाता है कि टेरेस गार्डन की कक्षाएँ 1 नवंबर से शुरू की जा रही हैं।
जो भी प्रतिभागी अभी तक प्रवेश नहीं ले पाए हैं और टेरेस गार्डनिंग का संपूर्ण कोर्स (थ्योरी एवं प्रैक्टिकल) करना चाहते हैं, वे जल्द से जल्द प्रवेश लेकर अपनी सीट बुक करें।
🌿 सीटें सीमित हैं, इसलिए देर न करें!
📞 संपर्क करें: 9232027423
https://www.facebook.com/share/v/1E6oxUopeM/

इस वीडियो को देखे और तय करे कि 3तरह के केमिकल डालकर बार बार गर्म करके बनाए गए रिफाइंड तेल को खाना चाहिए
कि 
कच्ची घानी का तेल खाना चाहिए
या
तेल खाना ही नहीं चाहिए
इसकी जगह घी खाना चाहिए

तेल
ये शब्द निगेटिव है या पॉजिटिव 
इस पर भी चर्चा करें
मै प्रयास करूंगा कि आपसे चर्चा करूं
TCBT है जहां - अधिक उत्पादन है वहां 
पंच महाभूत ऊर्जा पूर्ण होने के कारण
स्वाद भी मिलता है और स्वास्थ्य भी मिलता है।

पुनः बधाई हो उमाशंकर कोराम जी को
🌱 राम-राम सभी को! 🙏
📢 आज से – TCBT का टेरेस गार्डन कोर्स शुरू 
आप सभी को सूचित किया जाता है कि टेरेस गार्डन की कक्षाएँ 1 नवंबर से शुरू की जा रही हैं।
जो भी प्रतिभागी अभी तक प्रवेश नहीं ले पाए हैं और टेरेस गार्डनिंग का संपूर्ण कोर्स (थ्योरी एवं प्रैक्टिकल) करना चाहते हैं, वे जल्द से जल्द प्रवेश लेकर अपनी सीट बुक करें।
🌿 सीटें सीमित हैं, इसलिए देर न करें!
📞 संपर्क करें: 9232027423
पुण्य स्मरण

नेचयूको (नेचर+इको) फार्मिंग के प्रणेता दीपक सचदे जी की 8वीं पुण्यतिथि की श्रद्धांजलि

आपसे मुझे पंच महाभूत कृषि की प्रेरणा मिली
आपका स्नेह मुझे सदैव प्रेरित करता रहेगा।
TCBT जैविक किसान प्राइवेट लिमिटेड जबलपुर 

अपने जैविक खाद 
और 
जैविक खाद्यान्न 

उत्पादन पैकिंग विपणन के दूसरे दौर का कार्य प्रारंभ करने जा रही है।

पिछले 2वर्ष में अपने सभी तरह के खादों और कीट नियंत्रकों का देश भर के किसानों ने उपयोग किया है और सराहा है।
तो
इसका अब बड़े स्तर पर उत्पादन विपणन शुरू कर रहे है।

अपना जैविक खाद्यान्न का कार्य भी शुरू कर रहे है।

आप जिन भी किसान भाईयों को इस कार्य में निवेश या लोन की इच्छा है
कृपया सूचित करें।

निवेश राशि 10लाख के ऊपर रहेगा
इससे कम की राशि लोन के रूप में लिया जाएगा।
लोन देने वाले बंधुओं को TCBT विस्तार कार्य में प्राथमिकता दी जाएगी।
किसी भी तरह की और जानकारी चाहिए तो कंपनी की HR रिया जी +919232048564 से संपर्क करें।
🙏
ताराचंद बेलजी
MD 
TCBT जैविक किसान प्राइवेट लिमिटेड जबलपुर 
प्रधान कार्यालय
10, 3rd फ्लोर,मैकलसुता, राइट टाउन स्टेडियम,जबलपुर
शरद पूर्णिमा  25 अक्टूबर की रात्रि को बीजों को वजन नापकर कांच या प्लास्टिक के पारदर्शी डिब्बे में बाद करके रात भर चांद की रोशनी में रखे
सुबह उन बीजों को पुनः वजन करें
बीज का बढ़ता है तो इस वर्ष उस फसल की उपज अधिक आएगी
और बीज का वजन घटता है तो इस वर्ष उस फसल की उपज जाएगी,
वजन घटता बढ़ता नहीं है तो फसल सामान्य रहेगी।

यह मेरी पिछले वर्ष की गणना की वीडियो है
देखें समझे और सभी राज्यों के किसान इस परिक्षण को करें

🌹शरद पूर्णिमा🌹 

चंद्रमा वनस्पतियों का देवता है,

 वनस्पति अर्थात पेड़ पौधे लताएं,अनाज औषधी आदि यह सब कब उगेंगे,कैसे उगेंगे, इनमें कब पतझड़ आएगा, कब फूल आएगा, कब फल आएगा,यह सब चंद्रमा ही तय करता है।

सरसों के बीज को जमीन में डालकर कितना भी सिंचाई करो उगता तो वह हस्त नक्षत्र में ही है।
ऐसे ही सब प्रकार की फसलों के बीजों को उगाने का नक्षत्र चंद्रमा की किरणों के साथ ही तय होता है। 

शरद पूर्णिमा में चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र के तारामंडल के सामने होता है, अश्विनी नक्षत्र को सबसे अधिक कांतिमान अर्थात सौंदर्य प्रदान करने वाला नक्षत्र माना गया है, भारत का प्राचीन ज्ञान यह भी कहता है कि शरद पूर्णिमा में चंद्रमा की किरणें 16 कलाओं से युक्त रहते है,किरणों में स्वर्ण की ऊर्जा रहती है,

 चंद्रमा की किरणों में वे शक्तियां हैं जिनसे जीवन उत्पन्न होता है।
खेती करते समय हमने यह पाया है की पूर्णिमा में मिट्टी में पॉजिटिव जीव की अर्थात फसल को बढ़ाने वाले जीवो की ज्यादा उत्पत्ति होती है और अमावस्या के समय में फसल को नष्ट करने वाले जीवों की अर्थात फंगस वायरस और कीटों की उत्पत्ति या प्रजनन ज्यादा होता है।

पूर्णिमा के समय जब चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण धरती के ऊपर बढ़ जाता है तो समुद्र का पानी ऊपर उठने लगता है, पेड़ पौधों का जीवन रस पत्तों के तरफ आ जाता है, इसीलिए औषधि के लिए पत्तों को बीजों को फलों को तोड़ने का कार्य शरद पूर्णिमा के बाद से ही  प्रारंभ किया जाता है।

इस समय फसलों में पके हुए धान्य में जीवन रस आने से धान्य का स्वाद बढ़ जाता है। इसलिए इस समय धान्य फसलों की कटाई की जाती है।

चंद्रमा खुद प्रकाशित नहीं होता यह सूर्य की किरणों को रिफ्लेक्ट करके धरती की ओर भेजता है,
दर्पण से सूर्य की रिफ्लेक्ट करने वाली रोशनी आंखों को चुभती है,ऐसा आपने अपने जीवन में कभी न कभी अनुभव में लिया होगा या नहीं लिया हो तो करके देख लेना, दर्पण से रिफ्लेक्ट हुए रोशनियों से आंखें चुंधिया जाती हैं 
  इसमें दोष सूर्य का नहीं है दोष दर्पण का है जिसने हमारी ओर सूर्य की तीक्ष्ण किरणों को भेजा,
पर चंद्रमा ऐसा नहीं करता चंद्रमा सूर्य की तीक्ष्ण किरणों को सोख लेता है और सौम्या सफेद किरणों को धरती की ओर भेजता है इसलिए चंद्रमा हमें सफेद दिखाई देता है।
अब चंद्रमा केवल सूर्य की ही सफेद किरणों को ही हमारी ओर नहीं भेजता अपितु चंद्रमा के पीछे जो अलग-अलग नक्षत्र है अर्थात तारामंडल का समूह है उनकी किरणों को भी हमारी ओर भेजता है,
शरद पूर्णिमा में चंद्रमा एक विशेष तारामंडल अश्विनी नक्षत्र के सामने होता है।
यह तारामंडल सौंदर्य प्रदान करने वाला स्वर्ण की आभा प्रदान करने वाला नक्षत्र होता है।

इसीलिए इस दिन का अर्थात शरद पूर्णिमा का बड़ा महत्व रहता है,शुद्ध भारतीय देशी गाय के दूध में,देशी  दुबराज चावल में शुद्ध देशी मिश्री डालकर इसे चंद्रमा के सामने रखकर फिर खाने का विधान है। इससे पेट के गट्स बैक्टीरिया अर्थात अच्छे वाले जीवाणु बढ़ते है।

 शरद पूर्णिमा के किरणों में इस औषधीय महत्व के कारण ही इस पूर्णिमा के बाद ही धान्य वाली फसलों की कटाई गहाई की जाती है। 
इसके पश्चात जमीन की जुताई भी की जाती है, कृषि परासर ग्रंथ के अनुसार इस समय में की गई जुताई के बाद की गई बुआई से फसलों से स्वर्ण निकलता है अर्थात इस समय की गई जुताई से अगली फसल स्वर्ण आभा वाली होगी अधिक उपज वाली होगी।

शरद पूर्णिमा में चंद्रमा की इन्हीं जीवनी शक्ति की ऊर्जाओ का उपयोग करने के लिए हमारे पूर्वज आज शरद पूर्णिमा की रात्रि में अपने बीजों को तौलकर चांद की रोशनी में रखते थे दूसरे दिन इन बीजों का पुनः वजन करते थे जिन बीजों का वजन बढ़ जाता था इसकी बुवाई करते थे और जिन बीजों का वजन घट जाता था अगले एक वर्ष उनकी बुवाई नहीं करते थे।

आज की रात आप 100 - 100 ग्राम बीज चांद की रोशनी में छत पर रखे या घर के आंगन में सुरक्षित रखें और दूसरे दिन सुबह 9:00 तक सूर्य की रोशनी दिखाकर फिर इन बीजों को पुनः तौल लें, जिन प्रकार के बीजों का वजन घट जाए उस बीज को अगले 1 वर्ष तक हमें खेती में बुवाई नहीं करना है ऐसे बीजों से इस वर्ष अच्छी फसल नहीं देंगे और जिन बीजों का वजन बढ़ गया है उन बीजों की बुवाई करना इन बीजों से इस वर्ष ज्यादा उत्पादन होगा।

अमावस्या के समय धरती का गुरुत्वाकर्षण बढ़ जाता है, गुरुत्वाकर्षण शक्ति अंदर अंतरिक्ष की ऊर्जा धरती के अंदर समाने लगती है,पौधों की जीवनी रस जड़ों में चली जाती है,इसीलिए इस समय हमारे पूर्वज जमीन की जुताई निंदाई गुड़ाई को प्रतिबंधित कर दिए थे,
  अमावस्या के आसपास के समय बहुत से कीटों का जन्म  होता है,फंगस और वायरस इनका प्रभाव अमावस्या के आसपास पड़ता है इसलिए इस समय पर अपने खेतों के ऊपर अग्निहोत्र बहुत आवश्यक है हो सके तो महामृत्युंजय मंत्रों के साथ घी मिश्रित औषधियों का हवन भी करें ताकि घी और गाय के गोबर के कंडे के जलने से निकली हुई ऊर्जा हमारे खेतों के ऊपर छा जाए ताकि धरती का गुरुत्वाकर्षण से जो अंतरिक्ष की ऊर्जा धरती के अंदर समा रही है वह पॉजिटिव हो जाए उससे कीटों का प्रजनन रुक जाएगा,और कीटों की तितलियां हमारे खेतों में अंडे बच्चे न दे पाएं और अच्छे जीव ही हमारे खेत में रह रहें,तो अगली अमावस्या अर्थात दीपावली की रात्रि अपने घरों में घी का दीपक जलाएं घी की आहुति देकर महामृत्युंजय मंत्र बोलते हुए इस कार्य को संपन्न करें।
बाकी अन्य अमावस्या में  जब खेत में फसल खड़ी हो तब अपने खेतों में भी यही प्रक्रिया करें।
शुभम् भवतु 
🙏
ताराचंद बेलजी
प्रोफेसर - प्राकृतिक खेती 
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर
मात्र 4माह में TCBT फार्मूले से पॉम का पौधा हरा कच्च हो गया 

TCBT किसान 
गेंदलाल देवांगन
डोंगर गढ़ राजनांदगांव छत्तीसगढ़ 
प्रति एकड़ tcbt फार्मूले और डोज
हाई CN रेशियों घोल 200लीटर
फालघुट्टी 200लीटर
ऊर्जा जल 500लीटर
जीवाणु जल 500लीटर
अन्न द्रव्य रसायन 200लीटर

ये सब फार्मूले अपने घर पर बनाकर डाले
और छत्तीसगढ़ में बेहतर पॉम का फॉर्म बना लिया
इस वर्ष शरद पूर्णिमा में बीज परीक्षण की तैयारी करे
पहले साल की जैविक खेती
फसल - धान (कुल रकबा 65 एकड़)
प्रजाति - पूसा बासमती (25एकड़)
             क्रांति मोटा (40एकड़)

पद्धति - TCBT पंच महाभूत कृषि (वृक्षायुर्वेद विज्ञान)
किसान - आकाश पटेल,ग्राम रामखिरिया जिला जबलपुर मध्यप्रदेश
TCBT फार्मूले बनाकर डाले
प्रति एकड़ डोज
हाई CN रेशियों घोल 300लीटर
फसल घुट्टी 200लीटर
अन्न द्रव्य रसायन 200लीटर
जैव रसायन 100लीटर
उत्पाद खरीदकर डाले
बेसल डोज में
आयरन ऑक्साइड 50किलो
कैल्सियम मैग्नीशियम खनिज 50किलो
रॉक फॉस्फेट 50किलो
गोवर्धन खनिज खाद 100किलो
भू निर्विशी भस्म 2किलो
फफूंद रोधी भस्म 500ग्राम
स्प्रे किए

फास्फो पोटाश पाउडर 1किलो
कैल्सि फोर 1किलो
अणु भस्म 1किलो
जीवन द्रव्य 1लीटर
इन फार्मूलों ओर उत्पादों को बनाने के लिए

TCBT की सेवा प्रदाता टीम से संपर्क करे

शिवानी जी 9039007832
चंद्रभान जी 9039007834
सौरभ जी 9039007835 
से ऑफिस टाइम पर बात करे।

TCBT कृषि ज्ञान को समझना है तो 
प्रतिदिन शाम 7:30 बजे से 09:30 बजे तक (2घण्टे) होने वाले ऑनलाइन कृषि सत्संग में आयें।
लिंक👇
https://meet.zoho.in/vtnx-gyl-hjt

जरूरी हो तो tcbt ऑनलाइन सत्संग आयोजकों से संपर्क करे। *गुरुजी ताराचंद बेलजी* या TCBT विशेषज्ञ का अपने क्षेत्र अथवा समूह से जुड़े किसान भाइयों के बीच कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सम्पर्क करें।
👇🏼
राजनारायण भारद्वाज (संगठन ) 9425143090
कृष्ण शर्मा (प्रशिक्षक)9813686753

TCBT एजुकेशन / प्रशिक्षण की जानकारी के लिए रितिका जी 9232027423 से संपर्क करे।

PGS इंडिया भारत सरकार की प्राकृतिक खेती प्रमाणीकरण के लिए TCBT प्रमाणीकरण अधिकारी श्री सुरेश जी 9039007833 से संपर्क करें

ज्यादा जानकारी के लिए हमारे वेबसाइड पर जाएं👇🏼
www.tcbtjaivikkisan.com Part 4
मिलिए 65 एकड़ में जैविक धान उगाने वाले TCBT किसान आकाश पटेल ग्राम रामखिरिया जिला जबलपुर से

धान की निरोगी और बम्पर फसल देखें

इस वर्ष केमिकल खेती से धान की फसल लेने वाले किसान जानते है कितनी बीमारियां आई है,कितनी परेशानी हुई है
आकाश पटेल जी के धान में
कोई ब्लास्ट ब्लाइट नहीं
कोई माहू नहीं
कोई तनाछेदक नहीं आया
(65 एकड़ में एक भी सूखी बाली नहीं दिखी)
खरपतवार की कोई विशेष दिक्कत नहीं आई

पूरे समय फसल हरि कच्च रही

TCBT की पंच महाभूत कृषि का ऊर्जा और  पंच कोश विज्ञान
सबकुछ ठीक कर देता है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के Msc PhD छात्रों को वृक्षायुर्वेद की ऑर्गेनिक केमिस्ट्री आसानी से समझ आ रही है।

पौधे कैसे ग्लूकोश बनाते है
इसी ग्लूकोश का एक पार्ट कैसे लकड़ी बन जाती है
प्रोटीन का एक भाग नाइट्रोजन कैसे नाइट्रोजन में बदल जाता है
ग्रामीण स्तर पर प्रोटीन और ग्लुकोस कैसे बना सकते है
मिट्टी में सोंधी खुशबू कैसे बढ़ाई जा सकती है
वृक्षायुर्वेद का चित्तीकरणम कैसे फूलों का रंग बदल देता है
आवेशित कण (पॉजिटिव चार्ज एटम)कैसे अमावश्या पूर्णिमा पौधे में अप डाउन होते है।

 PhD छात्रों ने कहा कि ऐसा लग रहा है प्लांट के अन्दर ये सब हमारी आंखों के सामने हो रहा है।
ये सब छात्र यदि TCBT के इन फार्मूलों को शोध करेंगे तो निश्चित ही कृषि में एक नई क्रांति लिखेंगे।

ये सब पूरा विषय TCBT पाठशाला के यूटयूब चैनल पर 2 वीडियो उपलब्ध है,पूरा लैक्चर जाकर देख सकते है
 भाग-1
https://youtu.be/euKVU4oIvq4?si=v9GVxz6hOP2UXQdo
भाग 2
https://youtu.be/NQQjRSoii9o?si=K7jlG2UMDXUNZik2
TCBT की 
पंच महाभूत कृषि 
मूल प्राकृतिक खेती है

कैसे....

यह पूरी प्रकृति को पंच महाभूतों ने अपनी मेटर की सूक्ष्म अवस्था (तृण मात्राओं) से बनाया है।
पदार्थ (मेटर) की सूक्ष्म अवस्थाएं है
रूप (एटम)
रंग
गंध 
स्वर (स्पंदन/वाइब्रेशन)
स्पर्श 
इन्हीं तृणमात्राओं से यह पूरी प्रकृति बनी है 
इन्हीं तृणमात्राओं का उपयोग TCBT कृषि में जाती है।

 इसलिए TCBT कृषि मूल प्राकृतिक खेती है। 

जिस तृणमात्रा से हमारा यह ढांचागत शरीर बना है वे आवेशित कण हैं, परमाणु हैं, 
जो कार्बन से युग्मित हैं। C6 H12O6 से ग्लुकोश बनता है और इसी श्रृंखला में सेल्युलोज, हेमी सेल्युलोज और लिग्निन से लकड़ी बनती है और TCBT के वृक्षायुर्वेद आधारित घोल में ऐसे ही परमाणु आवेशित अवस्था में श्रृंखलाबद्ध होते हैं। 

इसलिए ये आयन सीधे पौधों द्वारा ग्रहण कर लिए जाते हैं चूंकि ये रसायन वृक्षायुर्वेद से बने हैं, इसलिए TCBT इन्हें जैव रसायन कहता है। 
TCBT में संतृप्त और एक्टिवेटेड कार्बन निर्माण प्रक्रिया सिखाई जाती है इसीलिए मिट्टी में 2% कार्बन बढ़ जाता है
पत्तो में भी स्थिर और एक्टिवेटेड कार्बन देना सिखाया जाता है इसीलिए पत्ते बड़े बड़े और हरे कच्च रहते है।

गोबर से निकला हुआ कार्बन गौ-मय द्रव्य रसायन है TCBT इसे संतृप्त कार्बन में बदलकर अर्थात कार्बन के परमाणुओं को दूसरे परमाणुओं से युग्मित करके स्थाई और एक्टिवेटेड कार्बन में बदला जाता है। यह कार्बन मिट्टी में धूप के प्रभाव से नहीं उड़ता।
यह कार्बन पौधों में ठोस तना बनाता है, मिट्टी में प्रभावी ह्यूमस का निर्माण करता है।

आधुनिक विज्ञान खनिज तत्व पूर्ति को  न्यूट्रिशन प्रबंधन कहता है। TCBT में यह प्रबंधन रंग, गंध, स्वर और स्पर्श पांच तरह से करने में सक्षम है। यह भूमि तत्व पूर्ति की प्रक्रिया हुई।

इसके अलावा पौधे के अंदर गगन तत्व बने अर्थात रिक्तता आए,

 वायु तत्व बने अर्थात हवा की मात्रा पर्याप्त हो, 

अग्नि तत्व संतुलित रहे अर्थात पौधे के अंदर 32 अंश डिग्री डेम्प्रेचर तापमान बना रहे, 
नीर तत्व अर्थात वापसा की स्थिति और जीवनी शक्ति लगातार सक्रिय रहे इस बात का भी ध्यान रखा जाता है। 

पंचमहाभूत कृषि में पौधे में निम्न पंच स्तरीय शरीर संरचना निर्माण होता है।

अन्नमय शरीर (सभी अणुओं का होना)

प्राणमय शरीर (सजीव कोशिका निर्माण)

मनोमय शरीर (कोशिका का मन जागृत होना)

बुद्धिमय शरीर (कोशिका की बुद्धि जागृत होना)

आनंदमय शरीर (कोशिका का अपने अंग में समाविष्ट होना)

TCBT में पौध निर्माण का इतना व्यापक चिंतन है इसलिए फसल / पौधे कभी बीमार नहीं पड़ते हैं और अधिकतम उत्पादन प्राप्त होता है।