दोस्ती से सुंदर कोई तस्वीर नहीं, अन्याय पर मौन सबसे बड़ा पाप: आचार्य पुलक सागर जी।
दैनिक वीरधरा राजस्थान।
चित्तौड़गढ़।सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में स्थानीय विद्यासागर मांगलिक धाम में आयोजित भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर जी महाराज ने मित्रता, चरित्र और सामाजिक जिम्मेदारी पर मार्मिक प्रवचन दिए।
प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने सच्ची मित्रता को रेखांकित करते हुए कहा कि इस संसार में हर रिश्ता किसी न किसी स्वार्थ या कारण से टूट या बिक सकता है, लेकिन सच्ची दोस्ती का रिश्ता कभी नहीं बिकता। जिस दिन दोस्ती बिकने लगेगी, उस दिन यह दुनिया जीने योग्य नहीं रहेगी, क्योंकि पूरा समाज परस्पर मित्रता और विश्वास के आधार पर ही टिका है।
उन्होंने आधुनिक युग में बढ़ते एकल परिवारों और नौकरी के कारण अपनों से दूर होते जा रहे लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में जीवन की सबसे बड़ी ताकत और सहारा मित्र ही बनते हैं। इंसान कई बातें अपने माता-पिता से छिपा लेता है, लेकिन सच्चे दोस्त से नहीं छिपाता। इसलिए दोस्ती भले ही बहुत गहरी न हो, लेकिन उस पर भरोसा गहरा होना चाहिए। "दोस्ती से बढ़कर कोई जागीर नहीं और दोस्ती से सुंदर कोई तस्वीर नहीं। यह भले ही कच्चे धागे जैसी लगे, लेकिन इससे मजबूत कोई जंजीर नहीं होती।"
युवाओं के बिगड़ने का दोष केवल मोबाइल और इंटरनेट पर डालने को गलत बताते हुए आचार्य श्री ने महाभारत का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि दुर्योधन के दुष्कर्मों के पीछे कोई मोबाइल या इंटरनेट नहीं था। उस समय का सबसे बड़ा अपराध भीष्म पितामह का वह मौन था, जिसके कारण उन्होंने द्रौपदी के चीरहरण का विरोध नहीं किया। भगवान श्रीकृष्ण ने भी यही संदेश दिया था कि समय पर सही बात न कहना और अन्याय पर चुप रहना सबसे बड़ा पाप है। समाज में बुराई इसलिए हावी होती है क्योंकि सज्जन लोग मौन धारण कर लेते हैं। यदि अच्छे लोग समय पर आवाज उठाएं तो बुराई कभी पनप नहीं सकती।
कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं की पूरी जिम्मेदारी विनय दल के सदस्यों ने पूरी निष्ठा के साथ संभाली। दल के सदस्यों ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का पारंपरिक रूप से साफा पहनाकर, माला पहनाकर एवं दुपट्टा ओढ़ाकर भव्य स्वागत व अभिनंदन किया।
Chittaurgarh, Chittorgarh | Jul 13, 2026