औद्योगिक हादसों पर प्रशासन सख्त, लापरवाही बरतने वाली फैक्ट्रियां होंगी सील: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
छह लोगों की मौत को लेकर प्रशासन ने तीन औद्योगिक इकाइयों का किया औचक निरीक्षण
बिना एनओसी फैक्ट्री चलाने वालों की अब खैर नहीं, सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर होगी कड़ी कार्रवाई
श्रमिकों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, हादसों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और फैक्ट्री संचालकों पर गिरेगी गाज
औद्योगिक सुरक्षा में लापरवाही पर उपायुक्त सख्त, भविष्य में हादसे रोकने के लिए प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
पानीपत, 3 नवंबर। जिले की औद्योगिक इकाइयों में लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं और पिछले दो महीनों के दौरान अलग-अलग हादसों में छह व्यक्तियों की मौत के मामलों को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने मंगलवार को औद्योगिक क्षेत्रों में तीन स्थानों पर फैक्ट्रियों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने कबाड़ी रोड और किशनपुरा क्षेत्र में स्थित सीआरजी, कोटकश, श्री बालाजी उद्योग तथा शिवम ट्रेडिंग कंपनी सहित संबंधित औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उपायुक्त ने फैक्ट्री संचालकों और संबंधित अधिकारियों से दुर्घटनाओं के कारणों तथा सुरक्षा प्रबंधों को लेकर कई सवाल किए और लापरवाही सामने आने पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि औद्योगिक विकास की आड़ में श्रमिकों की जान को जोखिम में डालने की किसी को अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासन की प्राथमिकता केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करना है, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति ही न हो। प्रत्येक फैक्ट्री संचालक की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने संस्थान में निर्धारित सुरक्षा मानकों, श्रम कानूनों और विभागीय दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करे।
उपायुक्त डॉ. हरीश ने कहा कि जिन फैक्ट्रियों में सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं हैं, सुरक्षा मानकों और निर्धारित एसओपी का पालन नहीं किया जा रहा तथा श्रमिकों की जान बचाने के लिए आवश्यक इंतजाम नहीं किए गए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित फैक्ट्री को सील करने से भी प्रशासन पीछे नहीं हटेगा। बिना एनओसी और आवश्यक विभागीय अनुमति के संचालित हो रही फैक्ट्रियों के मालिकों को भी जवाबदेह बनाया जाएगा तथा उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उपायुक्त ने एसडीएम को निर्देश दिए कि पिछले दो महीनों में हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। रिपोर्ट में स्पष्ट किया जाए कि प्रत्येक हादसे के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है, फैक्ट्री में निर्धारित एसओपी का पालन हो रहा था या नहीं, सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों ने समय रहते निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई की थी या नहीं। उन्होंने यह भी पूछा कि दुर्घटनाओं के मामलों में एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई और इसके पीछे क्या कारण रहे। इस संबंध में भी तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने फैक्ट्रियों में श्रमिकों की सुरक्षा, आपातकालीन स्थिति में बचाव की तैयारी, आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, वेज बोर्ड के प्रावधानों का पालन तथा अन्य श्रम संबंधी नियमों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करें। फैक्ट्री संचालकों की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ संबंधित विभागों के अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।
डॉ. वशिष्ठ ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी उद्योग को अनावश्यक रूप से परेशान करना नहीं, बल्कि उद्योगों में सुरक्षित कार्य वातावरण बनाना है। श्रमिकों का जीवन अनमोल है और उनकी सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निरीक्षण में सामने आई कमियों को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करें और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस दौरान एसडीएम मनदीप कुमार, एसडीएम समालखा अमित कुमार, एसडीएम इसराना नवदीप नैन तथा श्रम विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।