अंधविश्वास में ना पड़े, तथाकथित तांत्रिक और पाखंडी बाबा अक्सर बुनियादी रासायनिक अभिक्रियाओं (Chemical Reactions) का इस्तेमाल करके आम लोगों को भ्रमित करते हैं। जन-जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार के लिए इन तथाकथित 'चमत्कारों' के पीछे का वास्तविक विज्ञान समझना बेहद ज़रूरी है:
1. बिना माचिस के हवन कुंड में आग लगाना
* दिखावा: बाबा मंत्र पढ़ते हैं, घी या जल छिड़कते हैं और हवन कुंड में अचानक भीषण आग भड़क उठती है।
* वैज्ञानिक सच्चाई:
* हवन कुंड में लकड़ी के बुरादे या कपूर के साथ पहले से पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO_4) का पाउडर छिपाकर रखा जाता है।
* मंत्रोच्चार के दौरान 'घी' या 'गंगाजल' के नाम पर ड्रॉपर या चम्मच से ग्लिसरीन (Glycerol) डाली जाती है।
* पोटैशियम परमैंगनेट और ग्लिसरीन के बीच एक तीव्र ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction) होती है, जिससे कुछ ही सेकंडों में धुआं निकलता है और अपने आप तेज आग लग जाती है।
2. पानी को अचानक 'खून' या लाल रंग में बदलना
* दिखावा: किसी व्यक्ति पर भूत-प्रेत या ऊपरी साया बताकर सादे पानी को तांत्रिक क्रिया से लाल (रक्त जैसा) कर देना।
* वैज्ञानिक सच्चाई:
* फेनोल्फथेलिन और क्षार: लोटे या बर्तन में पहले से रंगहीन फेनोल्फथेलिन इंडिकेटर की कुछ बूंदें लगी होती हैं। जब उसमें चूने का पानी या सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) जैसा कोई हल्का क्षारीय घोल डाला जाता है, तो रासायनिक प्रतिक्रिया से वह तुरंत गहरा गुलाबी/लाल हो जाता है।
* आयरन और थायोसाइनेट: फेरिक क्लोराइड (FeCl_3) और पोटैशियम थायोसाइनेट (KSCN) के मिश्रण से गाढ़ा, खून जैसा गहरा लाल रंग बनता है।
3. नारियल से खून या लाल तरल निकलना
* दिखावा: पूजा के बाद नारियल फोड़ने पर उसमें से लाल पानी या खून जैसा पदार्थ निकलना, जिसे अनिष्ट या बलि का संकेत बताया जाता है।
* वैज्ञानिक सच्चाई:
* नारियल की तीन 'आंखों' में से जो सबसे नरम होती है, उसमें सीरिंज या बारीक सुई की मदद से पोटैशियम परमैंगनेट या लाल डाई का घोल पहले ही इंजेक्ट कर दिया जाता है।
* छेद को मोम या मिट्टी से सील कर दिया जाता है, जिससे फोड़ते समय अंदर का पानी पूरी तरह लाल निकलता है।
4. नींबू काटने पर खून निकलना
* दिखावा: नींबू काटकर नकारात्मक ऊर्जा या तांत्रिक दोष को बाहर निकालने का दावा करना, जिससे चाकू लगाते ही नींबू से खून टपकने लगता है।
* वैज्ञानिक सच्चाई:
* तांत्रिक चाकू की धार पर पहले से मिथाइल ऑरेंज या फेरिक क्लोराइड का लेप लगाकर सुखा लेते हैं।
* नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड चाकू पर लगे रसायन से संपर्क करते ही लाल रंग का घोल बना देता है, जो देखने में खून जैसा लगता है।
5. जलते हुए अंगारों पर नंगे पैर चलना
* दिखावा: इसे किसी ईश्वरीय कृपा या सिद्ध शक्ति का परिणाम बताया जाता है।
* वैज्ञानिक सच्चाई:
* लकड़ी का कोयला (Charcoal) ऊष्मा का बहुत खराब संवाहक (Poor Conductor of Heat) होता है।
* अंगारों की ऊपरी सतह पर राख की एक पतली परत जम जाती है जो ऊष्मा के प्रवाह को धीमा करती है।
* जब कोई व्यक्ति तेज गति से कदम बढ़ाते हुए चलता है, तो पैर के तलवे का संपर्क अंगारे से सेकंड के एक छोटे हिस्से के लिए ही होता है, जिससे त्वचा तक जलने जितनी ऊष्मा स्थानांतरित नहीं हो पाती।
ये सभी क्रियाएं शुद्ध रूप से रसायन विज्ञान और हाथ की सफाई हैं, जिनका किसी अलौकिक शक्ति या तंत्र-मंत्र से कोई संबंध नहीं है। इन प्रयोगों की वैज्ञानिक व्याख्या लोगों के बीच अंधविश्वास और डर को खत्म करने का सबसे प्रभावी साधन है।
Pilibanga, Hanumangarh | Oct 6, 2026