क्या जनता की आवाज के आधार पर बनी खबर को सीधे “भ्रामक” कहा जा सकता है?
इस खबर में कहीं भी यह दावा नहीं किया गया कि प्रशासन ने स्टेज तोड़ने की कार्रवाई कर दी। खबर में स्पष्ट रूप से सिर्फ यह उल्लेख किया गया था कि कार्रवाई करने के लिए टीम मौके पर पहुंची थी।
इस संबंध में 10 अक्टूबर को बुढ़ार थाने में शिकायत दर्ज होने की बात सामने आई है, जिस पर शिकायतकर्ताओं के हस्ताक्षर और थाने की मुहर भी मौजूद है।
इसके अलावा मौके पर मौजूद बुजुर्ग, महिलाओं, युवाओं और अन्य लोगों के बयान भी सामने आए थे। इन्हीं लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर खबर को सामने रखा गया था।
तो सवाल यह है कि जब खबर में प्रशासन द्वारा स्टेज तोड़ दिए जाने का दावा ही नहीं किया गया, बल्कि लोगों की शिकायत और उनके बयानों को आधार बनाया गया था, तो इसे “भ्रामक खबर” कहने का आधार क्या है?
पत्रकारिता का उद्देश्य किसी पक्ष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि लोगों की बात, उपलब्ध दस्तावेज और सामने आए तथ्यों को जनता तक पहुंचाना है।
अब जरूरत है कि पूरे मामले के सभी पक्ष सामने आएं और तथ्य के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो।
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Pushparajgarh, Anuppur | Oct 11, 2026