महाराजा अग्रसेन के जयकारों से गूंज उठा शहर
अग्रसेन जयंती पर धूमधाम से निकली भव्य शोभायात्रा
छतरपुर, 11 अक्टूबर। अग्रवाल समाज द्वारा अग्रकुल प्रवर्तक महाराजा अग्रसेन की 5150 वीं जयंती रविवार को धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर महालक्ष्मी मंदिर से नगर में कुलदेवी माता महालक्ष्मी के साथ महाराजा अग्रसेन की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं और पुरूष ड्रेसकोड में शोभायात्रा में महाराजा अग्रसेन के जयकारों से शहर को गुंजायमान कर रहे थे। बैंड-बाजों तथा डीजे की धुन पर युवावर्ग और महिलाएं थिरकते हुए शामिल हुए। रास्ते में शोभायात्रा का जगह-जगह आत्मीय स्वागत किया गया।
सरानी गेट बाहर स्थित सिद्धपीठ माता महालक्ष्मी मंदिर से रविवार को दोपहर बाद महाराजा अग्रसेन की भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई। शोभायात्रा में सबसे आगे अग्रवाल समाज की कुलदेवी माता महालक्ष्मी की रथ पर सवार जीवंत झांकी श्रद्धा का केंद्र बनी रही। उनके पीछे महाराजा अग्रसेन और महारानी माधवी की जीवंत झांकी फूलों से सजे सुनहरे रथ में सवार थी तथा पीछे के रथों में महाराजा अग्रसेन के सभी 18 पुत्रों की जीवंत झांकियां अग्रवाल समाज के 18 गोत्रों के प्रतिनिधि के तौर पर चल रहीं थीं। इनके साथ ही महाराजा अग्रसेन की रथ पर विराजमान प्रतिमा चल रही थी जिसकी लोग आरती उतार कर भाव विभोर होकर स्वागत करते रहे। इन झांकियों के आगे अग्रबन्धु कुर्ता-पायजामा के ड्रेसकोड में महाराजा अग्रसेन के जयकारे लगाते हुए तथा पीछे महिलाएं लाल रंग का मारवाड़ी लहंगा, शिफॉन की साड़ी और युवतियां पीला कुर्ता-लाल दुपट्टा की ड्रेसकोड में भजनों की धुन पर नृत्य करते शामिल थीं। शोभायात्रा सरानी गेट, गल्लामंडी, चौक बाजार, कोतवाली, महल रोड, छत्रसाल चौक, पुराना रोजगार कार्यालय, बस स्टैण्ड, हटवारा होते हुए शिल्पशाला मार्ग स्थित अग्रसेन विद्या मंदिर पहुंची जहां महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ संपन्न हो गई। रास्ते में अनेक स्थानों पर अग्रबंधुओं तथा अन्य समाजों द्वारा महाराजा अग्रसेन की शोभायात्रा का आत्मीय स्वागत किया गया।
शोभायात्रा में अग्रवाल समाज के जिलाध्यक्ष प्रभात सर्राफ, कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र अग्रवाल, अग्रसेन ट्रस्ट के अध्यक्ष जयनारायण अग्रवाल, नगर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, अग्रसेन महिला विकास समिति की अध्यक्ष सोनम अग्रवाल एवं अग्रवाल नवयुवक मंडल के अध्यक्ष शिवम शानू सहित समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, वरिष्ठ समाजजन, बड़ी तादाद में महिलाएं, युवतियां और बच्चों ने भाग लिया। इसके पहले सुबह मंदिर परिसर में श्री रामायण पाठ की बैठकी पूर्ण होने पर हवन-पूजन और कन्या भोज में कन्याओं को प्रसाद वितरण किया गया। सुबह ही अग्र बंधुओं को शोभायात्रा में शामिल होने जागरूक करने के लिए मंदिर से नगर में दो पहिया वाहनों से प्रभात फेरी निकाली गई। इसके साथ ही 4 अक्टूबर से चल रहे अग्रसेन जयंती महोत्सव के कार्यक्रमों का समापन हो गया।
गौरतलब है कि महाराजा अग्रसेन का जन्म द्वापर युग के अंत में प्रतापनगर (वर्तमान में हरियाणा का अग्रोहा) में हुआ था। वे सूर्यवंशी क्षत्रिय राजा वल्लभ के पुत्र थे। वे एक आदर्श, न्यायप्रिय और समाजवादी राजा थे। उन्होंने यज्ञ में पशुबलि का विरोध किया था, इसलिए भगवान नारद के कहने पर उन्होंने वैश्य धर्म अपना लिया था। उनका मूल मंत्र था - "एक ईंट और एक रुपया"। अग्रोहा में जो भी नया व्यक्ति बसने आता था, हर परिवार उसे एक ईंट और एक रुपया देता था, ताकि वह अपना घर और व्यापार शुरू कर सके। इसी से सहयोग और समानता की भावना बनी। उनका जीवन आज भी व्यापार में ईमानदारी, सहयोग और समाज सेवा का प्रतीक है।