*भागवत कथा ही कथा है बाकी सब व्यथा हैं -अशोक भाई*
*राजस्थानी श्रद्धालुओं ने माँ नर्बदे को 111 फ़ीट लम्बी चुनरी ओढ़ा कर पूजा आरती की*
भीलवाड़ा/आकोला (रमेश चन्द डाड) चतुर्थ दिवस अमरकंठक शान्ति कुटी आश्रम पर श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास अशोक भाई ने बताया कि *"भागवत कथा ही कथा है, बाकी सब व्यथा है"*। कथा माता स्वरूपा है। डांटकर भी हमारा कल्याण करती हैं! कथा प्रसंगों में
प्रह्लाद की भक्ति, समुद्र मंथन का धैर्य, कृष्ण जन्म का आनंद सहित अनेकों प्रसंगों का उदाहरण देते हुए बताया कि कथा हमारे जीवन में समाज में कितना महत्व रखती हैं साथ ही कथा से ही भव पार हो सकता हैं!
पुरुषोत्तम मास में नर्मदा उद्गम पर कथा सुनना मानो साक्षात् वेद व्यास जी ने कलियुग में कृपा की हो!
शांति कुटी के महामंडलेश्वर भी कथा में भाग लिया तथा श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि मानव जीवन में सत्संग, कीर्तन, भजन, कथा श्रवण का बहुत महत्व है इससे ही भव सागर पार हो सकता हैं! कथा का एक-एक शब्द आचरण बने, अहंकार मिटे और "गोविंद मेरो है" का भाव जागे,जन्म-जन्मांतर तक कथा सुनने का सौभाग्य मिले।
कथा में बरदी चन्द दरगड, सुनील लोढ़ा, गोपाल लक्षकार, कैलाश लढ़ा, भँवर लाल सुवालका, कैलाश टेलर, भेरूलाल आचार्य, योगेश पारीक, ओमप्रकाश काबरा, कैलाश तोषनीवाल, उगम देवी, कैलाश देवी, मधुबाला, पानी देवी, रेखा देवी, आशा देवी, सहित सैकड़ों श्रद्धालुओ ने सत्संग कीर्तन का लाभ लिया!