विकास के दावों के बीच बेन्दवाकोना की बदहाल तस्वीर, मरीज को ‘गेडुआ भार’ में ढोकर ले गए ग्रामीण
गुमला रायडीह :आजादी के दशकों बाद भी बेन्दवाकोना गांव सड़क, बिजली और स्वच्छ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। रविवार को 24 वर्षीय बृंदावती देवी की तबीयत बिगड़ने पर गांव में वाहन नहीं पहुंच सका। मजबूर ग्रामीणों ने महिला को ‘गेडुआ भार’ में लादकर करीब दो किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाया, फिर निजी वाहन से सदर अस्पताल गुमला ले जाया गया।यह तस्वीर उन विकास के दावों पर बड़ा सवाल है, जिनमें गांव-गांव तक सुविधा पहुंचाने की बातें की जाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में आज भी बिजली नहीं है, लोग डिबरी के सहारे जीवन गुजार रहे हैं और स्वच्छ पेयजल के अभाव में डाड़ी-चुआं का पानी पीने को मजबूर हैं। आपात स्थिति में मरीजों को खाट या ‘गेडुआ भार’ पर ढोना पड़ता है।ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को समस्या बताने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई। यह महज बदहाली नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता और विकास के खोखले दावों की शर्मनाक तस्वीर है।