किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, भोपाल द्वारा आयोजित कार्यशाला में किसानों को नरवाई (फसल अवशेष) जलाने के नुकसान और इसके वैज्ञानिक व पर्यावरण-हितैषी प्रबंधन के तरीकों से अवगत कराया गया ।
📍 आयोजन और मुख्य विवरण
• स्थान: आदमपुर छावनी प्राथमिक साख सहकारी संस्था, जिला भोपाल।
• आयोजक: परियोजना संचालक, आत्मा (ATMA) एवं उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग।
• शामिल विशेषज्ञ: कृषि वैज्ञानिक, सहायक संचालक कृषि अभियांत्रिकी, रिलायंस सीबीजी (CBG) प्लांट के निदेशक और कृषि अधिकारी।
⚠️ नरवाई जलाने के नुकसान
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि नरवाई जलाने से:
• मिट्टी की उर्वरता (fertility) और मृदा स्वास्थ्य खराब होता है।
• वायु प्रदूषण बढ़ता है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचता है।
💡 वैज्ञानिक प्रबंधन और विकल्प
किसानों को नरवाई जलाने के बजाय इन विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
• फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर जैविक पदार्थ के रूप में उपयोग करना।
• रिलायंस सीबीजी प्लांट के निदेशक के अनुसार, फसल अवशेषों का उपयोग कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाने में करना।
📢 अधिकारियों का निर्देश व अपील
• कृषि विस्तार अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में जाकर किसानों को जागरूक करें।
• उप संचालक ने किसानों से अपील की है कि वे पर्यावरण और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए इन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं।
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Department of Agriculture, Madhya Pradesh
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34 views | Bhopal, Madhya Pradesh | Oct 16, 2026