• सफलता की कहानी
• शारदा स्व-सहायता समूह की महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की पहचान
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सीहोर जिले की इछावर तहसील के छोटे-से गांव पटारिया सीधा में कभी आर्थिक तंगी, सीमित संसाधनों और रोजगार के अभाव से जूझने वाली इस गांव की महिलाओं ने आज अपनी मेहनत, एकजुटता और आत्मविश्वास के दम पर सफलता की नई कहानी लिखी है। इस परिवर्तन के केंद्र में है राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत गठित शारदा स्व-सहायता समूह, जिसने न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि उनके जीवन में सम्मान, आत्मविश्वास और नई पहचान भी स्थापित की।
शारदा स्व-सहायता समूह की शुरुआत उन महिलाओं ने की थी, जिनके सामने आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं था। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच वे आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही थीं। एनआरएलएम के माध्यम से समूह का गठन हुआ, जहां महिलाओं ने नियमित बचत, बैंकिंग व्यवस्था और स्वरोजगार की बुनियादी जानकारी हासिल की। छोटी-छोटी बचत से शुरू हुई यह यात्रा धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता के मजबूत इरादे में बदल गई।
समूह की प्रगति में निर्णायक मोड़ तब आया, जब उसका जुड़ाव मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक, धमांडा शाखा से हुआ। इस पूरी प्रक्रिया में बैंक सखी श्रीमती अनीता बामनिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली, खाता संचालन, ऋण प्रक्रिया और समय पर ऋण चुकाने के महत्व से परिचित कराया। उनके मार्गदर्शन में समूह को सबसे पहले 1.50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। समूह की महिलाओं ने इस राशि का उपयोग बकरी पालन, किराना दुकान, सब्जी विक्रय जैसे छोटे-छोटे स्वरोजगार शुरू करने में किया। मेहनत और ईमानदारी के साथ व्यवसाय संचालित करते हुए उन्होंने समय पर पूरा ऋण चुकाया और बैंक का भरोसा जीत लिया।
पहली सफलता ने महिलाओं का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया। उनकी कार्यशैली और वित्तीय अनुशासन को देखते हुए बैंक ने समूह को 3 लाख रुपये का दूसरा ऋण स्वीकृत किया। इस बार महिलाओं ने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। किसी ने डेयरी व्यवसाय शुरू किया, तो किसी ने सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को अपनाया। उनकी निरंतर प्रगति और समय पर ऋण पुनर्भुगतान ने उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। परिणामस्वरूप समूह को क्रमशः 6 लाख रुपये और फिर 10 लाख रुपये तक का ऋण भी प्राप्त हुआ।
इस पूरी यात्रा में बैंक सखी अनीता बामनिया केवल बैंक और समूह के बीच की कड़ी नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने एक मार्गदर्शक और प्रेरक की भूमिका निभाई। उनके सतत सहयोग से महिलाओं ने वित्तीय निर्णय लेना सीखा, बैंकिंग व्यवस्था को समझा और आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया।
आज शारदा स्व-सहायता समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हैं। उनके परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है और जीवन स्तर पहले की तुलना में कहीं अधिक बेहतर हुआ है। गांव में महिलाओं की पहचान अब केवल गृहिणी तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे सफल उद्यमी, परिवार की आर्थिक आधारशिला और समाज में निर्णय लेने वाली सशक्त महिलाएं बन चुकी हैं।
शारदा स्व-सहायता समूह से प्रेरणा लेकर अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ रही हैं और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब सामूहिक प्रयास, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन एक साथ जुड़ते हैं, तो बदलाव केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज की तस्वीर बदल देता है। शारदा स्व-सहायता समूह की सफलता यह संदेश देती है कि यदि महिलाओं को अवसर, विश्वास और सही मार्गदर्शन मिले, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास की मजबूत आधारशिला बन सकती हैं।
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12 views | Sehore, Madhya Pradesh | Jul 15, 2026