जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रती संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री वंशिका भारती जी ने सत्संग के महत्व को समझाते हुए कहा कि मानवीय मन जैसा संग करता है वो उसी का प्रतिरूप हो जाता है। मन के इसी स्वभाव को ध्यान में रखते हुए हमारे संतों महापुरुषों ने सत्संग का विधान बताया क्योंकि विषय वासनाओं एवं कुविचारों से भरे मन के लिए सत्संग एक मृत संजीवनी औषधि के समान है जो एक अस्वस्थ मन को भी पूर्णतः स्वस्थ व निरोग बना देती है। भारतीय ऋषि मुनियों ने सत्संग को आत्मोन्नति का सबसे सरल और प्रभावशाली मार्ग बताया है। सत्संग का अर्थ केवल संतों के पास बैठना नहीं है अपितु सत्य के संग में रहना है। सत्संग मनुष्य के भीतर सोई हुई विवेक शक्ति को जागृत करता है और सहज रूप से ही प्रेम,करुणा, धैर्य, क्षमा और सेवा जैसे दिव्य गुणों का विकास करता है। आगे साध्वी जी ने कहा कि हमारा मन जिस वातावरण में रहता है उसी के अनुसार ढल जाता है। यदि संग विषय-वासनाओं का होगा तो मन संसार की ओर भागेगा, और यदि संतों भक्तों का संग होगा तो वही मन परमात्मा की ओर अग्रसर हो जाएगा। आज के समय में जब तनाव, प्रतिस्पर्धा और मानसिक अशांति बढ़ रही है, सत्संग केवल धार्मिक आयोजन नहीं अपितु मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास का एक प्रभावी माध्यम है। सत्संग व्यक्ति को जीवन का उद्देश्य समझाता है, आत्मविश्वास देता है और समाज में सद्भाव एवं संस्कारों को मजबूत करता है। साध्वी बहन जी ने सम्पूर्ण मानव जाति का आह्वान करते हुए कहा कि सर्वप्रथम हमें सत्संग के महत्व को समझना होगा और सत्संग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा तभी हमारी आने वाली पीढ़ी सुसंस्कारित एवं आध्यात्म पोषित होगी जिससे हमारा राष्ट्र पुनः विश्व गुरु कहलाएगा। यदि इस धरा पर हमें मानवता को सुरक्षित रखना है तो आज हम अपने जीवन में नियमित रूप से सत्संग, स्वाध्याय, ध्यान और सेवा को स्थान दें। यही वह मार्ग है जो व्यक्ति, परिवार और समाज को सुख, शांति और समृद्धि की ओर ले जाता है। सत्संग वह प्रचंड ज्वाला है जो हमारी पुरानी धारणाओं एवं संकीर्ण सोच को विनष्ट कर देती है। विश्व शांति की प्रार्थना एवं सामूहिक साधना के साथ सत्संग कार्यक्रम का समापन किया गया।
Ambala, Ambala | Jun 28, 2026