जैविक खेती की ओर बढ़ रहे टीकमगढ़ जिले के किसान, स्वास्थ्य परिवार से सुखी किसान और समृद्ध भारत बनाने के संकल्प को समर्पित
---
टीकमगढ़ जिले में उप संचालक कृषि विभाग द्वारा परंपरागत कृषि विकास योजना अंतर्गत चयनित किसानों के सीधे खाते में एक करोड़ प्रोत्साहन राशि बैंक खाते में सीधे डी बी टी की गई है, शीघ्र ही पुनः दूसरी किस्त खेती के सत्यापन उपरांत एक करोड़ की राशि किसानों के खाते में डाली जायेगी। परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत टीकमगढ़ जिले में किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने और उन्हें खेत से घर की रसोई तक जैविक एवं सुरक्षित खाद्य व्यवस्था अपनाने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।
जिले के 60 गांवों में किसानों से लगातार संपर्क कर जैविक खेती के लिए किया जा रहा प्रशिक्षित। किसानों के बीच पहुंचकर जैविक सब्जी, अनाज, दाल, चावल, दूध और तेल जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री को यथासंभव जैविक तरीके से पैदा करने के लिए देशी गाय के गोबर और गौमूत्र के महत्व पर चर्चा की जा रही है। किसानों का कहना है कि रासायनिक खेती के बढ़ते उपयोग को लेकर अब उन्हें गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। अनेक किसान अपने परिवार एवं परिचितों में कैंसर, हृदयाघात तथा लिवर संबंधी गंभीर बीमारियों से हुई मौतों का उल्लेख करते हुए किसान महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा भोजन की गुणवत्ता को लेकर अधिकतर महिलाओं का पेट काट कर मात्र दो बार बच्चों को जन्म देने पर महीनों विस्तर पर रहने से अर्थव्यवस्था की गम्भीर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
बीमारियों और असमय मृत्यु के संभावित कारणों में कीटनाशकों एवं जहरीले उत्पादों को मानते हुए जैविक खेती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रशिक्षित किसानों ने दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट प्रभारी श्री भुनेश्वर राय जी के द्वारा खरीफ सीजन की फसल का सत्यापन किया गया जिसके दौरान किसान ने पूर्ण रूप से जैविक खाद डाल कर खरीफ फसल जैविक तरीके से करने की बात कही है, और रबी सीजन की फसल भी जैविक खेती करने उत्साहित हैं। किसानों के साथ संवाद में यह भी समझाया जा रहा है कि घर और खेत में जैविक तरीके से सब्जी, अनाज, दाल, दूध आदि का उत्पादन करने से परिवार को ताजा भोजन उपलब्ध हो सकता है। बाजार पर निर्भरता कम होने से खर्च घटेगा और किसान समृद्ध बनेंगे। साथ ही, मिट्टी की उर्वरता, कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता और स्वस्थ समाज के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। किसानों में जैविक खेती को लेकर बढ़ते उत्साह को देखते हुए अब उन्हें प्रशिक्षण देने के बाद पतंजलि के ब्लॉक कॉर्डिनेटर और स्थानीय गांव स्तर पर कार्य कर रहे एलआरपी लगातार फील्ड स्तर पर मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराने की योजना पर कार्य कर रहे हैं।
पतंजलि ऑर्गेनिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, हरिद्वार के माध्यम से टीकमगढ़ जिले के लगभग 2,000 किसानों से निरंतर संपर्क बनाए रखने के लिए ब्लॉक स्तर पर कॉर्डिनेटर सक्रिय रहेंगे। यह अभियान किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल के निर्देशानुसार, कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय के निर्देशन में तथा उप संचालक कृषि श्री मनोज कश्यप के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। टीकमगढ़, जतारा, बल्देवगढ़ एवं पलेरा के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों के सहयोग, कृषि विस्तार अधिकारियों की सहभागिता से किसानों को जैविक खेती की तकनीक, जैविक इनपुट, फसल प्रबंधन और खेत स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा है। दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट के स्टेट कॉर्डिनेटर श्री भुवनेश्वर राय द्वारा किसानों की फसल का सत्यापन कर जैविक प्रमाणीकरण करने में सहयोग किया जा रहा है। परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत पतंजलि ऑर्गेनिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, हरिद्वार के जिला प्रभारी एवं पतंजलि किसान सेवा समिति मध्यप्रदेश के राज्य प्रभारी श्री मुन्नीलाल यादव के नेतृत्व में यह कार्य निरंतर आगे बढ़ रहा है।
#JansamparkMP
#Jansamparktikamgarh
#tikamgarh
Tikamgarh, Madhya Pradesh | Aug 27, 2026