*गुरूदेव पुलकसागर महाराज की चातुर्मासिक अगवानी के लिए कल चित्तौड़गढ़ पहुचेंगे भीलवाड़ा के श्रद्धालु*
*भीलवाड़ा में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश पर 25 जुलाई को होगा भव्य स्वागत*
भीलवाड़ा: निलेश काठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ),17 जुलाई धर्मनगरी भीलवाड़ा की पावन धरा पर पहली बार चातुर्मास करने जा रहे ओजस्वी प्रवचनकार प्रख्यात राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पूज्य गुरूदेव पुलकसागरजी म.सा. का शनिवार 18 जुलाई को चित्तौड़गढ़ से विदा होकर भीलवाड़ा की दिशा में विहार गतिमान होगा। उनकी चातुर्मासिक अगवानी के लिए भीलवाड़ा से चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा की अगुवाई में सैकड़ो श्रद्धालु वहां पहुचेंगे ओर विहार यात्रा के दौरान धर्मध्वजा लेकर साथ में चलेंगे। चित्तौड़गढ़ से भीलवाड़ा तक विहार मार्ग की पूरी सेवा भीलवाड़ा के श्रद्धालु संभालेंगे ओर गुरूदेव को पूरे श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ भीलवाड़ा लेकर आएंगे। विहार संयोजक रवि चौधरी,अभिषेक पटौदी,संदीप बाकलीवाल,अनंत जैन एवं पारस वैद की अगुवाई में 60 युवाओ द्वारा चित्तौड़गढ़ से भीलवाड़ा तक विहार कराया जाएगा। विहार मार्ग में भी श्रद्धालु गुरूदेव के आगमन की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे है। जगह-जगह स्वागत एवं अभिनंदन की तैयारी है। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में होने वाले चातुर्मास के लिए पूज्य पुलकसागरजी म.सा. का मंगल प्रवेश 25 जुलाई को होगा। चातुर्मास के दौेरान धर्म आराधना एवं भक्ति से ओतप्रोत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा। चातुर्मासिक प्रवचन प्रतिदिन 26 जुलाई से प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में होंगे। यहां प्रवचन के लिए विशाल वाटरप्रूफ डोम पांडाल तैयार किया जा रहा है। चातुर्मास के दौरान 15 से 30 अगस्त तक चित्रकूटधाम में पूज्य पुलकसागरजी म.सा. के सानिध्य में ज्ञान गंगा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इससे पूर्व चित्रकूटधाम में ही 1 अगस्त को गुरू गुणानुवाद कार्यक्रम होंगा एवं चातुर्मासिक मंगल कलश की स्थापना 2 अगस्त को होगी। चित्रकूटधाम में भी विशाल वाटरप्रूफ पांडाल तैयार किया जा रहा है। मंगलकलश स्थापना कार्यक्रम में देशभर से हजारों श्रद्धालु भी शामिल होने के लिए आएंगे। समसामयिक विषयों एवं समाज के ज्वलंत मुद्दों पर बेबाक विचार रखने वाले प्रख्यात संत पूज्य पुलकसागरजी महाराज 11 वर्ष बाद फिर भीलवाड़ा की पावनधरा पर पधार रहे है। मुनिश्री अंतिम बार वर्ष 2015 में भीलवाड़ा आए थे। उस दौरान भी हजारों लोगों ने उनके दर्शन वंदन कर धर्म लाभ प्राप्त किया था।