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रोहड़ू के सनसनीखेज 'ब्लाइंड मर्डर' का पर्दाफाश, पुलिस ने दबोचे तीन हत्यारे शिमला: एंकर : शिमला जिला के रोहड़ू में एक बुजुर्ग महिला की संदिग्ध मौत के पेचीदा और पूरी तरह से 'ब्लाइंड मर्डर' केस को सुलझाने में शिमला पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने 6 दिनों के भीतर हत्याकांड की गुत्थी को सुलझाकर नेपाल मूल के तीन आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। विओ : ASP मेहर पंवर ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों की पहचान लाल बहादुर उर्फ लालू (28), नवीन (19) और संतोष (20) के रूप में हुई है, जो वर्तमान में शिमला के टिक्कर और चिड़गांव क्षेत्र में रह रहे थे। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल किया गया डंडा भी बरामद कर लिया है। ​ASP ने कहा कि यह तीनों चोरी की नीयत से घर में घुसे थे आरोपी।मामले का आगाज़ बीती 16 जून 2026 को हुआ, जब पुलिस थाना रोहड़ू को सूचना मिली कि शलाश डोगरी की रहने वाली 77 वर्षीय बुजुर्ग महिला श्रीमती गीता देवी अपने घर में मृत अवस्था में पड़ी हैं। प्रारंभिक हालात को देखकर ही पुलिस को भांपते देर नहीं लगी कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि हत्या का मामला है। अंदेशा जताया गया कि अज्ञात बदमाश चोरी की नीयत से घर में दाखिल हुए थे और पकड़े जाने के डर या विरोध करने पर उन्होंने बुजुर्ग महिला को मौत के घाट उतार दिया। इस संबंध में 17 जून को रोहड़ू थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई यह मामला प्रारंभिक दृष्टि से पुलिस के लिए एक अत्यंत कठिन और अंधा कत्ल (ब्लाइंड मर्डर) का केस था। चुनौती इसलिए भी बड़ी थी क्योंकि घटनास्थल पर कोई चश्मदीद गवाह नहीं था, मृतका के घर या आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था और शुरुआत में घर से किसी बड़ी संपत्ति के गायब होने की पुष्टि भी नहीं हो पा रही थी। ऐसे में हत्यारों तक पहुंचने के लिए पुलिस के पास कोई सीधा सुराग नहीं था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस टीमों ने तुरंत वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने शुरू किए। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम ने मौके से जैविक और भौतिक सबूत एकत्र किए और शव का पोस्टमार्टम करवाकर आगे की राह बनाई। ASP मेहर पंवर ने का की सुरागोंके अभाव में शिमला पुलिस ने मानवीय इनपुट और आधुनिक तकनीक का एक साथ इस्तेमाल किया। एक तरफ जहां मृतका के करीबियों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों से गहन पूछताछ की जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ तकनीकी विंग ने घटनास्थल की ओर जाने वाले सभी रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। संदेह के दायरे में आए वाहनों की आवाजाही को ट्रैक किया गया और सबसे टर्निंग पॉइंट साबित हुआ मोबाइल टावर के डम्प डाटा का गहन विश्लेषण। लाखों मोबाइल सिग्नलों के बीच कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस आखिरकार उन तीन संदिग्धों तक पहुंच गई, जिनकी लोकेशन वारदात के वक्त घटनास्थल के बिल्कुल आसपास पाई गई थी। तकनीकी विश्लेषण से मिले पुख्ता सुराग के आधार पर पुलिस ने 22 जून 2026 को तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की, तो वे ज्यादा देर तक पुलिस को गुमराह नहीं कर पाए। वैज्ञानिक साक्ष्यों के सामने उनका हौसला टूट गया और उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर अपराध में इस्तेमाल किया गया डंडा बरामद कर उसे मुख्य साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया गया है। शिमला पुलिस के इस त्वरित और सटीक एक्शन की चारों ओर सराहना हो रही है, जिसने इतनी कम अवधि में बिना किसी सीधे सुराग के इस पेचीदा हत्याकांड का पर्दाफाश कर अपराधियों को दबोच लिया। फिलहाल पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। बाइट: मेहर पंवर ASP