क्या एक पिता का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने अपनी बेटी की शादी उसकी मर्जी से कर दी...?
एक तरफ पति बिस्तर पर है... दूसरी तरफ पत्नी न्याय के लिए दफ्तर-दफ्तर भटक रही है। पीड़ित महिला का आरोप है कि कुछ समय पहले दबंगों ने घर में घुसकर उसके पति के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उनके हाथ-पैर टूट गए। इतना ही नहीं, बेटी की शादी के लिए रखे ₹60 हजार भी ले गए। डर और दहशत के बीच परिवार को अपनी बेटी की शादी दूसरे शहर जाकर करनी पड़ी। महिला का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी उसकी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। आरोप है कि दबंग आज भी घर में घुसकर धमकाते हैं, मारपीट करते हैं और अब परिवार की रोजी-रोटी पर भी रोक लगाने की कोशिश कर रहे हैं। पति बिस्तर पर हैं, बेटा किस्तों पर खरीदी गई टैक्सी चलाकर घर चलाना चाहता है, लेकिन उस पर भी आपत्ति जताई जा रही है। महिला का कहना है कि जब वह अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंची, तब भी उसे राहत नहीं मिली। मजबूर होकर आज उसे कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी पीड़ा मीडिया के सामने रखनी पड़ी। आखिर एक महिला कितनी बार अपनी जान की भीख मांगे? क्या न्याय सिर्फ कागजों में दर्ज एफआईआर तक सीमित रह गया है? क्या किसी परिवार को अपनी बेटी की पसंद का सम्मान करने की इतनी बड़ी सजा मिलनी चाहिए? अगर महिला के आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि कानून के राज और आम नागरिक की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल है। इस पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिले, निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो......🧾🚨
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