रक्षा बन्धन सिर्फ धागे का बन्धन ही नही है वरन भाई बहन के पारस्परिक स्नेह का बंधन है: प्रतिभा श्रीजी।
दैनिक वीरधरा राजस्थान।
चित्तौड़गढ़।सेंथी स्थित शान्ति भवन मे विराजित जैन सिद्धान्ताचार्य श्री प्रतिभा श्री जी ने चातुमार्सिक प्रवचन के दौरान रक्षा बन्धन के महत्व पर प्रकाश डाला।
आपने प्रवचन में फरमाया कि यह भाई बहन का त्यौहार है जो आपसी स्नेह का प्रतीक है। आज के दिन भाई को बहन का व बहन को भाई का अभाव खटकता है। अतः वसुदैवकुटुम्बक की भावना रखे तो सभी बहनें माता तूल्य है।
रक्षा बन्धन सिर्फ धागे का बन्धन ही नही है वरन भाई बहन के पारस्परिक स्नेह का बंधन है, आत्मा का बंधन है। रक्षा बन्धन अर्थात् अध्यात्मिक व सामाजिक बन्धन। आध्यात्मिक रूप से आत्मा से सम्बन्धित है जबकि सामाजिक रूप सामाजिक प्रेरणा देता है। सामाजिक रूप का प्रारम्भ किसी घटना से सम्बन्धित होता है और धीरे धीरे वह परम्परा का रूप ले लेता है। परम्परा मे समयानुसार नई नई बाते जुड़ती जाती है व उसका विस्तृत स्वरूप बन जाता है। जो त्योहार का स्वरूप ले लेता है। यह त्यौहार देश की संस्कृति को अनुप्रमाणित करता है।
शांतिभवन में परम पूज्य मेवाड़ भूषण गुरुदेव श्री प्रताप पाल जी महाराज साहब की पुण्य स्मृति दिवस एवं भाई बहन का पवित्र रिश्ता रक्षाबंधन का त्यौहार जैन दिवाकरीय श्रमण संघीय जैन सिद्धांताचार्य तपस्वी रत्ना मधुर गायिका साध्वी श्री प्रतिभा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा 4 के पावन सानिध्य में मनाया गया।
इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद बहनों ने भाइयों के राखी बांधी तो भाई भी बहनों की रक्षा हेतु संकल्पित हुए।
श्रीसंघ सेन्थी ने सभी का अभिनन्दन किया।
नवकार जाप की श्रृंखला मे 30 अगस्त का जाप शीतल वेणी यश समिति द्वारा आयोजित होगा जिसमें अधिकाचिक संख्या मे पधारकर धर्म आराधना करने का आव्हान किया।
कार्यक्रम का संयोजन संघ के कोषाध्यक्ष रतन लाल संजेती ने किया।
Chittaurgarh, Chittorgarh | Aug 29, 2026