"शारदा सदन पुस्तकालय"------ लालगंज बाजार में स्थित शारदा सदन पुस्तकालय की स्थापना 27 जून 1914 को हुई थी। इसकी स्थापना प्रख्यात मनीषी एवं पर्यटक स्वामी सत्यदेव परिव्राजक द्वारा स्थापित हिन्दी हितैषिणी सभा के दूसरे हिस्से के रूप में किया था। अपने तीन मंजिले भवन में सोलह विभागों वाला इस पुस्तकालय में लगभग एक लाख से अधिक पुस्तक हैं। जिनमें ब्रेललिपि की किताबों, दुर्लभ पांडुलिपियों, तथा संस्कृत, उर्दु, हिन्दी, अंग्रेजी, बांग्ला, अरबी, फारसी आदि सात भाषाओं की पुस्तकें हैं।कुछ हस्तलिखित पांडुलिपियों में श्री राम चरित मानस के डेढ़ सौ वर्ष प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपि में प्राकृतिक रंगों से बने लगभग देश सौ रंगीन चित्र हैं। इसके अलावा विदेशी फिल्म प्रोजेक्टर, वाद्य यंत्र, रंगकर्म सामाग्री समेत सैकड़ों उपस्कर हैं। तीन सभागार, स्नानागार युक्त विश्रामालय, नौ कमरे, चार दालान,पांच हॉल आदि भी इसकी विशाल संपदा के अन्तर्भुक्त हैं। उस वक्त स्वामी सत्यदेव परिव्राजक ने पुस्तकालय की स्थापना झोपड़ी में महज 150 पुस्तकों के साथ इसकी शुरुआत की थी। जो सन 1934 में आए महा विनाशकारी भूकंप में ध्वस्त हो गया। बाद में चंपारण यात्रा के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ यहां पहुंचे महात्मा गांधी ने पुस्तकालय के कायाकल्प के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद से 400 रुपये दिलवाया और उस पैसे से जो भवन बना उसका नाम श्री गांधी वाचनालय रखा गया। महात्मा गांधी ने यहां के विजिटर्स बुक में लिखा था कि मकान तो गिरा लेकिन विद्या का नाश नहीं हो सकता लोग पुस्तकालय में आएं और विद्या ग्रहण करें। इस पुस्तकालय में विभिन्न भाषाओं की पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकायें सुधी पाठकों एवं शोधकर्ताओं के लिए सुलभ है। स्वाध्याय के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। महात्मा गाँधी यहां तीन बार पधार चुके हैं। इसके अलावा देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद सहित, डॉ जाकिर हुसैन, विनोबा भावे, जयप्रकाश नारायण, रामधारी सिंह दिनकर, डॉ श्रीकृष्ण सिंह,अनुग्रह नारायण सिंह, जगदीश चंद्र माथुर आदि कई नामचीन हस्तियों का यहां आगमन हो चुकाहै। शारदा सदन पुस्तकालय के निर्माण, संचालन और संरक्षण में स्वतंत्रता सेनानी जगन्नाथ प्रसाद साहू की भूमिका मुख्य स्तंभ के रूप में थी। स्वामी सत्यदेव परिव्राजक के विचारों को धरातल पर उतारने और उसे एक पुस्तकालय के रूप में स्थापित करने में मुख्य भूमिका जगन्नाथ प्रसाद साहू जी की थी। जगन्नाथ साहू लंबे समय तक इस पुस्तकालय के मुख्य संरक्षक रहे।शारदा सदन पुस्तकालय के विकास और इसे संरक्षित रखने में संजय मंडल जैसे स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने इस ऐतिहासिक धरोहर को जनमानस के बीच सक्रिय रखने के लिए उप सचिव के रूप में सक्रिय सहभागिता निभाई।