पार्क के नाम बदलने पर टिकारी में भारी आक्रोश: 'राजेन्द्र बाबू चिल्ड्रेन पार्क' का नाम बदलने से बढ़ा विवाद, IG विकास वैभव को सौंपा ज्ञापन
टिकारी (गया):
टिकारी नगर परिषद द्वारा ऐतिहासिक "राजेन्द्र बाबू चिल्ड्रेन पार्क" का नाम बदलकर "टिकारी बाल उद्यान" किए जाने के फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध और विवाद गहरा गया है। नगर परिषद के इस निर्णय को स्थानीय जनता और प्रबुद्ध नागरिकों ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और ऐतिहासिक पहचान व सांस्कृतिक गौरव के साथ खिलवाड़ करार दिया है।
राष्ट्रपति सम्मानित विभूति के योगदान को मिटाने का आरोप
विरोध दर्ज करा रहे लोगों का स्पष्ट कहना है कि स्वर्गीय राजेन्द्र बाबू कोई साधारण नाम नहीं हैं। वे लगभग 35 वर्षों तक राज इंटर स्कूल, टिकारी के समर्पित प्राचार्य रहे और शिक्षा जगत में अपने अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित व्यक्तित्व हैं। जिस महापुरुष ने टिकारी की पीढ़ियों को तराशा और नगर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, उनके नाम को पार्क के बोर्ड से मिटाने का प्रयास नगर परिषद नेतृत्व की संकीर्ण मानसिकता और राजनीतिक द्वेष को उजागर करता है।
IG विकास वैभव के समक्ष उठा मामला
इस पूरे विषय की गंभीरता को देखते हुए टिकारी आगमन पर मगध रेंज के माननीय पुलिस महानिरीक्षक (IG), 'लेट्स इंस्पायर बिहार' के प्रणेता और समृद्ध विरासत के संरक्षक श्री विकास वैभव को ज्ञापन सौंपकर मामले से अवगत कराया गया।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें:
सम्मान की पुनर्स्थापना: शिक्षा और समाज के मार्गदर्शक रहे राष्ट्रपति सम्मानित विभूति का सम्मान सर्वोपरि रखा जाए।
विरासत से छेड़छाड़ पर रोक: ऐतिहासिक धरोहरों और महापुरुषों के योगदान से जुड़े स्थलों के नामकरण के साथ राजनीतिक द्वेष या मनमानी न की जाए।
पार्क का मूल नाम "राजेन्द्र बाबू चिल्ड्रेन पार्क" तत्काल पुनर्स्थापित किया जाए।
स्वाभिमान और न्याय की लड़ाई
टिकारी की जागरूक जनता ने चेतावनी दी है कि वे अपनी धरोहर, संस्कारों और मार्गदर्शकों के अपमान को कतई स्वीकार नहीं करेंगे। यह संघर्ष किसी पद या राजनीति का नहीं, बल्कि माटी के स्वाभिमान और कृतज्ञता का है। न्याय और टिकारी के गौरव की रक्षा के लिए अंतिम दम तक हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।
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