इमरान मसूद और ओमप्रकाश राजभर दोनों का निशाना अखिलेश यादव,लेकिन सवाल है कि आखिर अपनी राजनीति कब करेंगे?
ओम प्रकाश राजभर विपक्ष में हैं,लेकिन उनकी राजनीति का बड़ा हिस्सा अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत हमले करने में ही निकल जाता है।जनता के मुद्दे उठाने के बजाय हर वक्त अखिलेश यादव को निशाना बनाना आखिर कैसी राजनीति है?
दूसरी तरफ इमरान मसूद जी हैं,जिन्हें देखकर लगता है कि कांग्रेस को मजबूत करने से ज्यादा उन्हें अपनी सीटों और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की चिंता है।
उन्हें शायद लगता है कि कांग्रेस जितनी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी,उतनी ही ज्यादा जीत हासिल करेगी।लेकिन राजनीति इतनी आसान नहीं होती जनाब!
चुनाव सिर्फ सीटों की गिनती से नहीं,बल्कि गठबंधन की ताकत, उम्मीदवार की पकड़ और पार्टी के चुनावी समीकरण से जीते जाते हैं।
किसी सीट पर सपा का उम्मीदवार मजबूत हो सकता है,तो किसी पर कांग्रेस का।हर सीट पर अपनी जिद थोपने से गठबंधन मजबूत नहीं, कमजोर होता है।
इमरान मसूद को समझना चाहिए कि राजनीति में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर गठबंधन का भविष्य होता है। अभी भी वक्त है,अखिलेश यादव की रणनीति को समझिए,
आपसी खींचतान छोड़िए और जीत की तरफ कदम बढ़ाइए क्योंकि चुनाव जीतने के लिए सिर्फ टिकट चाहिए होता, तो हर टिकटधारी विधायक और सांसद होता!