करोड़ों का भवन, व्यवस्थाओं का दिवाला! संदीपनी विद्यालय में पानी-बिजली का संकट, 1500 विद्यार्थियों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल!
शाहनगर | पन्ना
शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय में जब बुनियादी सुविधाओं का ही अभाव हो, तो व्यवस्थाओं पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसा ही कुछ नजारा शाहनगर स्थित संदीपनी उत्कृष्ट विद्यालय में देखने को मिल रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस बहुमंजिला भवन में करीब 1500 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। ग्राउंड फ्लोर से लेकर तीसरी मंजिल तक कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत चिंताजनक नजर आ रही है।
पानी के अभाव में बदहाल शौचालय
विद्यालय में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के चलते शौचालयों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। शौचालयों से उठती दुर्गंध विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े विद्यालय में स्वच्छता और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम क्यों नहीं हो पा रहा?
शॉर्ट सर्किट की घटना से बढ़ी चिंता
विद्यालय की विद्युत व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। लगभग एक सप्ताह पहले भवन के ग्राउंड फ्लोर और तीसरी मंजिल पर शॉर्ट सर्किट के चलते आग लगने की सूचना सामने आई थी। करीब 1500 विद्यार्थियों की मौजूदगी वाले इस भवन में ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती हैं।
इंजीनियर ने बताई विद्युत सप्लाई अधूरी होने की वजह
इस संबंध में श्री साईं इंफ्रास्ट्रक्चर के इंजीनियर पारस गोयल ने बताया कि पीआईयू विभाग से राशि प्राप्त नहीं होने के चलते विद्युत सप्लाई का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भवन में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित हो रही हैं, तो विद्युत व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने में देरी क्यों हो रही है?
तीसरी मंजिल पर बिना सुरक्षा पुताई का वीडियो वायरल
मामला केवल पानी और बिजली तक सीमित नहीं है। विद्यालय की बाहरी दीवारों पर पुताई का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवक बिना किसी सुरक्षा उपकरण के तीसरी मंजिल पर पुताई करते नजर आ रहे हैं। इस संबंध में संबंधित ठेकेदार की लापरवाही बताई गई है। ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम नहीं होना भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
आखिर जिम्मेदारी किसकी?
करोड़ों रुपये की लागत से बने इस भवन में यदि पानी, शौचालय और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं ही दुरुस्त नहीं हैं, तो निर्माण और व्यवस्थाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब सवाल पीआईयू विभाग, विद्यालय प्रबंधन और संबंधित ठेकेदार से है कि आखिर इन समस्याओं का समाधान कब होगा? क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जाएगा या समय रहते व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा?
याद रखिए, विद्यालय केवल इमारत से उत्कृष्ट नहीं बनता, बल्कि वहां पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित वातावरण, स्वच्छता और बेहतर सुविधाएं मिलना भी जरूरी है।
आपकी राय क्या है? क्या 1500 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में पानी, बिजली और सुरक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं का अभाव जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
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