अलविदा, माननीय अब्दुल जलील मस्तान साहब! 🥀
माननीय अब्दुल जलील मस्तान साहब पहली बार 1985 में विधायक बने और कुल 6 बार विधानसभा के सदस्य चुने गए। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने उस दौर को भी देखा, जब चारों तरफ दबंगई, लूट-खसोट और जमीनों पर बलवानों के कब्जे की शिकायतें आम थीं।
ऐसे कठिन दौर में उन्होंने अपने क्षेत्र को संभाला, लोगों के बीच मजबूती से खड़े रहे और क्षेत्र को विकास एवं बेहतर दिशा की ओर ले जाने के लिए लगातार काम किया।
सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने राजनीति को अपनी दौलत बनाने का जरिया नहीं बनाया। उनकी असली दौलत थी—अवाम की खिदमत, लोगों का प्यार और उनका भरोसा।
यही वजह थी कि अवाम भी उन्हें दिलो-जान से चाहती थी।
आज आपके जाने से हमारा पूरा क्षेत्र गमगीन है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी। आपके किए हुए काम, आपकी बातें और समाजहित में आपकी हर पहल आने वाली पीढ़ियों को भी याद रहेगी।
सूरजपुरी समाज ने अपना एक मजबूत नेता खो दिया।
अल्लाह तआला मरहूम को मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे और परिवार व चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन। 🤲
अलविदा, माननीय जलील मस्तान साहब।
आप हमेशा हमारी यादों में ज़िंदा रहेंगे। 🥀
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Jokihat, Araria | Sep 12, 2026