गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से दियारा इलाके की स्थिति गंभीर हो गई है। बाढ़ के कारण लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं।
दादूपुर, बिशनपुर, चमथा एक, दो और तीन सहित पांच पंचायतों के लगभग 15 हजार घरों में गंगा के उफान से पानी भर गया है। कई घर खाली हो चुके हैं, जबकि कई लोग अपने घरों की छतों पर रहकर गुजर-बसर कर रहे हैं और गांवों में फंसे लोगों की हालत ज्यादा खराब है।
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और 2021 के रिकॉर्ड टूट गए हैं। अनुमान है कि 8 तारीख तक पानी तेजी से और बढ़ेगा।
बाढ़ पीड़ित सुनैना देवी, संजू देवी, सरस्वती देवी, अनीता देवी, सुधीर राय, राजेश कुमार, रत्न कुमार, बिंदेश्वर महतो, जयप्रकाश कुमार, रौशन कुमार और अशोक सिंह सहित अन्य लोग और चमथा दो के मुखिया राकेश कुमार राय ने कहा कि पर्याप्त नाव नहीं चल रही है।
इस वजह से लोग अपनी जान जोखिम में डालकर कमर, घुटने और छाती तक पानी में चलकर आवाजाही कर रहे हैं एवं 20, 30 या 50 रुपये देकर प्राइवेट नावों से सफर कर रहे हैं।
जो लोग गांव से बाहर आ गए हैं, वे तो किसी तरह अपना जीवन बिता रहे हैं। लेकिन गांव के अंदर फंसे लोगों का जीवन मुश्किल में है। वे किसी तरह जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं। तबीयत खराब होने पर उन्हें दवाइयां भी नहीं मिल पाती हैं और रात में नाव नहीं मिलने से परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
पशुओं के लिए चारे का इंतजाम नहीं किया गया है, जिस वजह से पशुपालकों को बहुत परेशानी हो रही है। चारे के बिना पशु घंटों भूखे रह रहे हैं। बाढ़ से निपटने के लिए सारी तैयारियों के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर यह तैयारी नाकाम साबित हो रही है। खास तौर पर गांव से निकलने या आवाजाही के लिए नाव भी नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने कहां कि बढ़ते जलस्तर और प्रभावित इलाकों को देखते हुए दियारा के पांच पंचायत को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जाए और बाढ़ पीड़ितों के लिए समुचित व्यवस्थाएं की जाए।
विस्थापित लोगों के लिए शनिवार शाम से विद्यापति नगर हाई स्कूल, नगड़ा ढाला, कन्या पार्वती विद्यालय, गैस एजेंसी चमथा, गोपालपुर करारी, चमथा 3 स्थित बिंद टोल बांध पर, चमथा 2 स्थित गोप टोल और फतेहा हॉल्ट, झमटिया पुल एवं केवट स्थान लगमा में सामुदायिक किचन चलाए गए हैं।
लेकिन अभी भी कई ऐसी जगहें हैं, जहां कोई व्यवस्था नहीं की गई है, इनमें बछवाड़ा ब्लॉक परिसर, बोचहा, 10 नंबर ढाला, मालगोदाम, मिर्जापुर, बैंक रोड, शाहिठ गाछी, चिरैया टोंक पंचखूटी और विद्यापतिनगर पानी टंकी, चमथा एक बिंद टोल सहित अन्य स्थान शामिल है।
विस्थापित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था तो की जा रही है, लेकिन पशुओं के चारे की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।