🚨 घंटाघर पर मजदूरों की जिंदगी दांव पर! आखिर जिम्मेदार कौन?
देहरादून के घंटाघर चौक पर रोजाना बड़ी संख्या में मजदूर काम की तलाश में सड़क किनारे खड़े रहते हैं। सवाल यह है कि अगर यहां कोई बड़ा हादसा हो गया, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
पहले कांवली रोड पर हादसा हुआ, फिर लालपुल पर हादसा हुआ और ऐसे हादसे आए दिन सामने आते रहते हैं। बावजूद इसके मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती।
❓ क्या ये मजदूर देहरादून के नागरिक नहीं हैं?
जो मजदूर दूसरों के घर बनाता है, सड़कें बनाता है और शहर के विकास में अपना पसीना बहाता है, वही अपनी रोजी-रोटी के लिए सड़क किनारे जान हथेली पर रखने को मजबूर है।
अगर मजदूर सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम आदमी कैसे सुरक्षित होगा?
👉 प्रशासन को हादसे का इंतजार करने के बजाय घंटाघर के मजदूर अड्डे पर सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान की व्यवस्था करनी चाहिए।
मजदूर सिर्फ श्रमिक नहीं, हमारे शहर और समाज का हिस्सा हैं। उनकी सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
📢 आपकी क्या राय है? क्या घंटाघर पर मजदूरों के लिए सुरक्षित स्थान बनाया जाना चाहिए? कमेंट में जरूर बताएं और पोस्ट शेयर करें।
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Dehradun, Dehradun | Aug 22, 2026