#राजस्थान में पंचायत चुनावों की घोषणा कल : 4 चरणों में हो सकते हैं चुनाव; आचार संहिता लग जाएगी, तबादलों पर पाबंदी रहेगी
संगरिया की आवाज़।
प्रदेश में पंचायतीराज चुनावों की घोषणा शनिवार को होने जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 3 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे पंचायतीराज चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है।
प्रदेश में चार फेज में चुनाव हो सकते हैं।
वार्ड एससी, 19117 एसटी और 15 हजार वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित किए हैं। चार जिलों बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर में सरपंच के सभी 1253 पद एसटी के लिए रिजर्व है।
पंचायतीराज चुनाव सरकार और विपक्ष दोनों के लिए सियासी चुनौती
पंचायतीराज चुनाव सरकार और विपक्ष दोनों का गांव में सियासी परसेप्शन बनाएगा और बिगाड़ेगा। सत्ताधारी बीजेपी के सामने कांग्रेस से ज्यादा वार्ड जीतने की चुनौती रहेगी।
निकाय चुनाव की तरह ही बीजेपी के सामने पंचायत समितियों और जिला परिषद
प्रदेश में चार फेज में चुनाव हो सकते हैं। सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव बैलेट से होंगे। पंचायत समिति मेंबर और जिला परिषद मेंबर के चुनाव ईवीएम से होंगे। पंचायतीराज चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण है।
आयोग के चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लग जाएगी। करीब दो महीने तक आचार संहिता लागू रह सकती है। साथ ही तबादलों पर पाबंदी लग जाएगी।
1.69 लाख नए पंचायतीराज जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे
इन चुनावों में 1.69 लाख नए पंचायतीराज जनप्रतिनधि चुने जाएंगे। 1403 जिला परिषद मेंबर और 8245 पंचायत समिति मेंबर चुने जाएंगे। ये मिलकर 41 जिला प्रमुख और 457 पंचायत समितियों में प्रधान चुनेंगे। 14403 ग्राम पंचायतों में सरपंच, उपसरपंच और 1.30 लाख वार्ड पंचों के चुनाव होंगे।
20 महिला होंगी जिला प्रमुख
#41जिला_प्रमुखों में से 20 जिलों में महिला जिला प्रमुख होंगी। बीकानेर संभाग के सभी जिलों में महिला जिला प्रमुख होंगी।
#221महिलाएं_प्रधान बनेंगी
#राजस्थान में 457 में से 221 महिलाएं प्रधान बनेंगी। जयपुर-जोधपुर में 11-11 महिलाएं प्रधान होंगी। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ ऐसे जिले हैं, जहां सिर्फ एसटी वर्ग से ही प्रधान बनेगा।
#7200महिला_सरपंच बनेंगी
14403 ग्राम पंचायतों में 7200 महिला सरपंच और वार्ड पंचों के 1,30,584 पदों में से 65 हजार महिला वार्ड पंच बनेंगी। सरपंचों में एसटी के 3058, एससी के 2493 और ओबीसी के लिए 1961 पद आरक्षित है। वार्ड पंचों के 1.30 लाख पदों में से 21,962 वार्ड एससी, 19117 एसटी और 15 हजार वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित किए हैं। चार जिलों बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर में सरपंच के सभी 1253 पद एसटी के लिए रिजर्व है।
पंचायतीराज चुनाव सरकार और विपक्ष दोनों के लिए सियासी चुनौती
पंचायतीराज चुनाव सरकार और विपक्ष दोनों का गांव में सियासी परसेप्शन बनाएगा और बिगाड़ेगा। सत्ताधारी बीजेपी के सामने कांग्रेस से ज्यादा वार्ड जीतने की चुनौती रहेगी।
निकाय चुनाव की तरह ही बीजेपी के सामने पंचायत समितियों और जिला परिषदों में ज्यादा वार्ड जीतने की चुनौती है, गांवों में आम तौर पर कांग्रेस आगे रहती आई है, इसलिए इसे चुनौती माना जा रहा है।
सत्ताधारी बीजेपी ने इस बार विधानसभा चुनावों की तर्ज पर माइक्रो मैनेजमेंट से रणनीति बनाई है, उस रणनीति की असली परीक्षा पंचायतीराज चुनावों से होगी।
प्रधान, प्रमुखों में जोड़-तोड़ चलेगा, असली परसेप्शन वार्डों की जीत से बनेगा
जिला परिषदों और पंचायत समितियों में
जिला परिषदों और पंचायत समितियों में कौन ज्यादा वार्ड जीतता है, उससे असली परसेप्शन बनेगा। जिला परिषद मेंबर मिलकर जिला प्रमुख और पंचायत समिति मेंबर मिलकर प्रधान का चुनाव करते हैं।
निकाय की तरह पंचायतीराज चुनावों में भी दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होता, इसलिए प्रधान और जिला प्रमुख बनाने में खूब सियासी जोड़-तोड़ चलता है। जिस पार्टी के जितने ज्यादा जिला परिषद मेंबर, पंचायत समिति मेंबर जीतेंगे उससे ही जनमत का रुझान तय हो जाएगा।
संगरिया की आवाज़