सम्भल में Live DM ओर SP द्वारा सदर कोतवाली क्षेत्र में 38 बीघा (कीमत करीब 101 करोड रुपये) ग्राम समाज की भूमि को बेचने व अभियोग पंजीकृत किया गया है वीडियो को शेयर करें
यूपी के जनपद सम्भल में उपसंचालक चकबंदी न्यायालय ने लगभग 2.25 से 2.50 हेक्टेयर ग्राम सभा भूमि पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने का आदेश किया पारित
उपसंचालक चकबंदी न्यायालय, सम्भल द्वारा विकासखंड सम्भल के ग्राम/मौजा तख्त गोसाईं स्थित लगभग 2.25 से 2.50 हेक्टेयर (कुल 5.06 एकड़) भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने का आदेश पारित किया गया है। आदेश के अंतर्गत गाटा संख्या 206 (0.34 एकड़), 207 (1.91 एकड़), 233 (1.78 एकड़), 242/378 (0.53 एकड़) एवं 279 (0.50 एकड़) सम्मिलित हैं।
प्रकरण के अनुसार, शासन के 11 अगस्त 1954 के गजट के माध्यम से मौजा तख्त गोसाईं को गैर आबाद घोषित करते हुए उसका प्रबंधन तत्कालीन परिस्थितियों में नगर पालिका परिषद, सम्भल को सौंपा गया था। यह क्षेत्र उस समय भी तथा वर्तमान में भी नगर पालिका परिषद की सीमा से बाहर स्थित है। वर्ष 1995 में ग्राम चकबंदी प्रक्रिया के अंतर्गत आया, जिसमें उक्त गाटों सहित लगभग 2.25 से 2.50 हेक्टेयर ग्राम सभा भूमि नवीन अभिलेखों में दर्ज थी।
चकबंदी कार्यवाही के दौरान सईदुल रहमान ने दावा किया कि उक्त भूमि उन्हें तत्कालीन नगर पालिका परिषद, सम्भल के अध्यक्ष स्वर्गीय साहू चिरंजीलाल द्वारा पट्टे पर प्रदान की गई थी। इसी आधार पर उन्होंने 12 जुलाई 1967 को अपना नाम दर्ज कराने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। दूसरी ओर, अमीर चन्द्र ने स्वयं को अनुसूचित जाति का बताते हुए विवादित भूमि पर कब्जा होने का दावा किया तथा उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 122-बी(4-एफ) का लाभ दिए जाने की मांग की।
चकबंदी अधिकारी द्वारा दोनों दावे निरस्त कर भूमि की स्थिति यथावत बनाए रखी गई। इसके पश्चात दोनों पक्षों ने बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के समक्ष अपील दायर की, जिसे भी निरस्त कर दिया गया। बाद में उपसंचालक चकबंदी न्यायालय में निगरानी याचिका दायर की गई। तत्कालीन उपसंचालक चकबंदी ने अमीर चन्द्र की निगरानी यह कहते हुए खारिज कर दी कि चकबंदी अधिकारियों को धारा 122-बी(4-एफ) का लाभ देने का अधिकार नहीं है। वहीं सईदुल रहमान के कथित पट्टे के दावे को स्वीकार करते हुए उनके पक्ष में नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया गया।
इसके उपरांत तहसील स्तर पर चकबंदी से पूर्व तथा बाद में कई बार बेदखली की कार्यवाही भी संचालित हुई, किन्तु न्यायालय से प्राप्त स्थगन आदेशों के आधार पर कब्जा बना रहा। इस दौरान सईदुल रहमान एवं उनके उत्तराधिकारियों द्वारा भूमि का अधिकांश भाग अन्य व्यक्तियों को विक्रय कर दिया गया।
दिनांक 3 जून 2026 को जिला शासकीय अधिवक्ता ने पुनरीक्षण प्रार्थना पत्र तत्कालीन प्रभारी उपसंचालक चकबंदी (अपर जिलाधिकारी न्यायिक) के समक्ष प्रस्तुत किया। बाद में वर्तमान उपसंचालक चकबंदी श्री ओमप्रकाश अंजोर द्वारा सभी पक्षों को विधिवत नोटिस जारी कर सुनवाई की गई।
सुनवाई के दौरान नगर पालिका परिषद, सम्भल की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें स्पष्ट किया गया कि सईदुल रहमान के नाम कोई पट्टा कभी जारी नहीं किया गया। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष को इस प्रकार का पट्टा देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था तथा नगर पालिका के अभिलेखों में ऐसे किसी पट्टे का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार कथित पट्टा फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज के आधार पर तैयार किया गया था।
उपसंचालक चकबंदी द्वारा समस्त अभिलेखों का गहन परीक्षण एवं सभी पक्षों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर प्रदान किया गया। सईदुल रहमान के निधन के कारण उनके उत्तराधिकारियों को भी सूचना दी गई, किन्तु वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। जबकि भूमि क्रय करने वाले व्यक्ति न्यायालय में उपस्थित रहे और उनकी भी सुनवाई की गई।
सभी तथ्यों एवं साक्ष्यों के परीक्षण के उपरांत न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि तत्कालीन आदेश कपटपूर्ण एवं फर्जी तथ्यों के आधार पर न्यायालय को भ्रमित कर प्राप्त किया गया था। फलस्वरूप उक्त आदेश को निरस्त करते हुए दिनांक 27 जून 2026 को लगभग 2.25 से 2.50 हेक्टेयर (कुल 5.06 एकड़) ग्राम सभा भूमि पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज किए जाने का आदेश पारित किया ।