“विकास की राह में जो गांव पीछे छूट जाए,
वहां की आवाज़ कौन सुने, कौन आगे आए?
अब वक्त है सवाल उठाने और हक मांगने का,
जाति नहीं, विकास के नाम पर मतदान करने का।”
चित्रकूट जनपद के कर्वी ब्लॉक के भमौर गांव में इन दिनों ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं की बदहाली से परेशान हैं। ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के लिए जय बजरंग सेना की राष्ट्रीय प्रभारी एवं समाजसेविका अर्चना नितिन उपाध्याय गांव पहुंचीं, जहां उन्होंने जन चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बरसात के दिनों में गांव को जाने वाली सड़क कीचड़ से भर जाती है। नालियां पटी पड़ी हैं और गांव में नियमित साफ-सफाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लगी स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब हैं, जबकि कई सड़कें भी उखड़ी पड़ी हैं। ऐसे में उन्हें परेशानियों के बीच आवागमन करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि गांव में विकास के नाम पर कोई खास काम नहीं हुआ और जनप्रतिनिधि चुनाव के समय वोट मांगने तो पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव के बाद गांव की समस्याओं की सुध लेने नहीं आते।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं था, जिसके चलते उन्होंने समाजसेविका अर्चना नितिन उपाध्याय को गांव बुलाकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया, ताकि उनकी आवाज जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंच सके।
वहीं जन चौपाल में ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हुए समाजसेविका अर्चना नितिन उपाध्याय ने कहा कि गांव की समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीणों को खुद आगे आना होगा। अधिकारियों के कार्यालयों तक पहुंचकर अपनी समस्याएं मजबूती से रखनी होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के लिए धन उपलब्ध करा रही है, लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि आने वाले चुनाव में जाति के नाम पर नहीं, बल्कि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सफाई और मूलभूत सुविधाओं के नाम पर वोट करें। तभी गांव की तस्वीर बदल सकती है।
अब सवाल यही है कि भमौर गांव की बदहाल सड़कें, बंद पड़ी लाइटें, गंदगी और मूलभूत सुविधाओं की कमी कब दूर होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की आवाज सुनेंगे?