संस्थान दादा गुरु के आशीर्वाद से पर्यावरण संरक्षण, गौसंवर्धन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा- मंत्री श्री पटेल
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सत्संग से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और ईश्वर प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है- दादा गुरू
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जैविक खाद उत्पादन और 'मंथन अतिथि गृह' का शुभारंभ,
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ज़रारूधाम में विकास की नई पहल
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ज़रारूधाम गौ-अभ्यारण में 2100 देववृक्षों की स्थापना,
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मंत्री श्री पटेल ने बताया ऐतिहासिक क्षण
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जरारूधाम गौ-अभ्यारण्य में पौधारोपण एवं सत्संग-संवाद-संगोष्ठी संपन्न
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यह तीन दिन गौ-अभ्यारण और क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण है, दादा गुरु के 2100 निराहार दिवस पूर्ण होने के अवसर पर 2100 देववृक्षों की स्थापना की जा रही है, जो पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, पिछले वर्ष दादा गुरु के 1705 निराहार दिवस पूर्ण होने पर 1705 पौधों का रोपण किया गया था। वह सभी पौधे आज सुरक्षित एवं विकसित है, यह जनसहभागिता और सेवा भावना का परिणाम है। इस आशय के विचार प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण व श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने जरारूधाम गौ-अभ्यारण्य में दादा गुरू के सानिध्य में आयोजित 2100 देववृक्षों की स्थापना, रक्तदान शिविर, सत्संग संवाद तथा प्रसादी कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
मंत्री श्री पटेल ने कहा मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद ज़रारूधाम में रात्रि विश्राम कर संस्थान का सम्मान बढ़ाया है। इस अनुभव के आधार पर आगामी वर्ष बेहतर आवास एवं अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि परिवार सहित आने वाले श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके। उन्होने कहा कार्यक्रम के दौरान 'मंथन अतिथि गृह' का लोकार्पण किया गया, जहाँ पूज्य दादा गुरु एवं उनके सहयोगियों के ठहरने की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही गौ-अभ्यारण में इस सप्ताह से जैविक खाद उत्पादन प्रारंभ किया जाएगा, जो रासायनिक उर्वरक डीएपी का विकल्प बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
उन्होंने कहा संस्थान पूज्य दादा गुरु के आशीर्वाद से पर्यावरण संरक्षण, गौसंवर्धन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा तथा भविष्य में भी जनहित की ऐसी पहलें जारी रहेंगी। उन्होंने नर्मदा खंड सेवा संस्थान के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों तथा बिना किसी औपचारिक आमंत्रण के सेवा देने पहुंचे श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
नर्मदा परिक्रमा आत्मिक साधना का मार्ग, व्यवस्थाओं से नहीं डिगना चाहिए- मंत्री श्री पटेल
मंत्री श्री पटेल ने कहा नर्मदा परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि ध्यान, योग और भक्ति का ऐसा संगम है, जहां चलते-चलते साधक आत्मिक अनुभूति प्राप्त करता है। उन्होंने कहा सामान्यतः साधना के लिए व्यक्ति को स्थिर होना पड़ता है, लेकिन नर्मदा परिक्रमा में चलते-चलते ही वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होती।
मंत्री श्री पटेल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा जब उन्होंने पहली बार पैदल यात्रा प्रारंभ की थी, तब उनका विश्वास था कि जिस देश में एक भिखारी को भी भोजन मिल जाता है, वहां उन्हें भी दो रोटियां अवश्य मिल जाएंगी। इसी विश्वास के साथ उन्होंने यात्रा जारी रखी। उन्होने कहा मां नर्मदा के तट पर कोई भी भूखा नहीं सोता। उन्होंने कहा वे प्रतिवर्ष अपने विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव में मां नर्मदा की परिक्रमा करते हैं और इसे अपने जीवन की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक साधना मानते हैं।
जाति, पंथ और संप्रदाय भले ही अलग-अलग हों, लेकिन सभी की धरती और माटी एक है- दादा गुरू
दादा गुरू ने कहा जीवन में जब भी सत्संग का अवसर प्राप्त हो, उसे कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि सत्संग मनुष्य के जीवन को नई दिशा देने के साथ उसके भाग्य परिवर्तन का भी माध्यम बन सकता है। सत्संग के माध्यम से ईश्वर एवं परमात्मा की अनुभूति का मार्ग प्रशस्त होता है, उन्होंने कहा किसी तीर्थ या पीठ में आयोजित सत्संग का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर आध्यात्मिक शक्ति का विशेष प्रभाव रहता है। गौ को भी भारतीय संस्कृति में शक्ति एवं श्रद्धा का प्रत्यक्ष स्वरूप माना गया है।
उन्होंने कहा जब-जब परमात्मा या ईश्वर अवतार लेते हैं, उसके पीछे समस्त जीव-जगत के कल्याण का उद्देश्य होता है। उन्होंने जरारूधाम की आध्यात्मिक ऊर्जा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां जड़ और पत्थरों से भी दिव्यता का अनुभव होता है तथा इस पवित्र धाम की सभी दिव्य शक्तियों को नमन किया जाना चाहिए।
उन्होंने सभी से धरती को माँ के रूप में सम्मान देने का आह्वान करते हुए कहा कि जाति, पंथ और संप्रदाय भले ही अलग-अलग हों, लेकिन सभी की धरती और माटी एक है। जिस प्रकार जन्म देने वाली को माँ कहा जाता है, उसी प्रकार हमारा पालन-पोषण करने वाली धरती को भी भारतीय संस्कृति ने माँ का स्थान दिया है। उन्होंने प्रकृति संरक्षण, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
आज जरारूधाम गौ अभयारण्य में 'वृहद पौधारोपण महाअभियान' का भव्य शुभारंभ हुआ। इस दौरान दादा गुरु जी की अखंड निराहार साधना के यशस्वी 2,100 दिवस पूर्ण होने के अवसर पर, इस महाअभियान के अंतर्गत 2,100 पौधे रोपित किए गए। इस अवसर पूज्य दादा गुरु जी महाराज के पावन कर-कमलों द्वारा बरगद (वट) सहित अन्य पौधे रोपित कर किया गया। पौधारोपण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, अधिकारी-कर्मचारीगण सहित ग्रामीणजनो ने सहभागिता निभाई।