जनार्दन मिश्रा के विवादित बयान पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष का पलटवार, विवेक पांडे बोले—विरोध हो, लेकिन भाषा की मर्यादा जरूरी
शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा—दूसरों की गलती का विरोध करते-करते हम खुद वही गलती न दोहराएं
सीधी। रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा के कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। सांसद के बयान का विरोध करते हुए सीधी कांग्रेस जिलाध्यक्ष जान सिंह चौहान द्वारा सार्वजनिक मंच से कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल को लेकर अब शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने भाषा की मर्यादा बनाए रखने की बात कही है।
मीडिया से चर्चा के दौरान जब विवेक पांडे से इस पूरे मामले को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि विरोध होना चाहिए, लेकिन भाषा की मर्यादा भी बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा के विवादित बयान का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उसके जवाब में सार्वजनिक मंच पर गंदे या आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। गलत बयान का विरोध जरूर होना चाहिए, लेकिन विरोध करते समय भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है।
विवेक पांडे ने कहा कि आज सोशल मीडिया का दौर है और इसे बच्चों से लेकर माताओं-बहनों तक हर वर्ग देखता है। सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों की भाषा का समाज पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में दूसरों की गलती का विरोध करते-करते हमें यह भी चिंतन करना चाहिए कि कहीं हम स्वयं वही गलती तो नहीं दोहरा रहे।
उन्होंने कहा कि यह चिंतन का विषय है, क्योंकि इस तरह की बयानबाजी से पार्टी और व्यक्ति—दोनों का नुकसान हो सकता है। हर व्यक्ति का अपना नजरिया और अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा जिम्मेदारीपूर्ण होनी चाहिए।
विवेक पांडे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि हम सामने वाले की आपत्तिजनक भाषा का विरोध करते हुए खुद भी उसी तरह की भाषा का इस्तेमाल करेंगे, तो फिर सामने वाले और हमारे बीच कोई फर्क नहीं रह जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी को अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखने की आजादी है, लेकिन यह भी देखना जरूरी है कि हमारा प्लेटफॉर्म क्या है और समाज के सामने हम किस तरह की भाषा प्रस्तुत कर रहे हैं।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि विरोध अपनी जगह जरूरी है, लेकिन राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।