राजस्थानी भाषा हमारी संस्कृति की आत्मा है जिसे महिलाओं ने हमेशा अंवेरा है-राजवीर सिंह चळकोई
जयपुर राजस्थानी लेखिका संस्थान (रालेस) द्वारा आयोजित 'सालीणो-उछब' शनिवार को प्रौढ़ शिक्षण समिति, झालाना, जयपुर में साहित्य, संस्कृति और सृजन के उत्सव के रूप में गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम संयोजक व संस्था सचिव वरिष्ठ साहित्यकार मोनिका गौड़ ने बताया कि
दिनभर चले इस भव्य आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों, युवा रचनाकारों एवं साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सम्मान समारोह के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में बीज भाषण देते हुए लोकप्रिय यू ट्यूबर व राजस्थानी मान्यता के लिए युवा आवाज़ राजवीर सिंह चळकोई ने मायड़ भाषा की मान्यता व साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला तथा युवा वर्ग को जोड़ने पर बल दिया। राजस्थानी भाषा हमारी सभ्यता की आत्मा है इसे मान्यता मिलनी ही चाहिए.
अध्यक्षीय उदबोधन में वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार सत्यदेव संवितेन्द्र ने कहा कि राजस्थानी भाषा रहेगी तो राजस्थान की सभ्यता ,संस्कृति बचेगी. विशिष्ट अतिथि के रूप में दिनेश कुमार जांगिड़ 'सारंग' (आईआरएस) ने की संस्थान की अध्यक्ष डॉ. शारदा कृष्ण ने स्वागत उद्बोधन में संस्था का परिचय दिया।
राजस्थानी लेखीका मोनिका गौड़ ने बताया कि
द्वितीय सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. घनश्याम नाथ कच्छावा की अध्यक्षता में पुस्तक 'घर कीं कैवणों चावै' (लेखक: डॉ. शारदा कृष्ण) तथा 'रेत नै बणा आरसी' (लेखक: जीनस कंवर) का लोकार्पण एवं परिचर्चा आयोजित हुई। इस सत्र में मनीषा आर्य सोनी विशिष्ट अतिथि रहीं। पुस्तकों पर सुनीता बिश्नोलिया एवं डॉ. दर्शना कंवर 'उत्कर्ष' ने समीक्षात्मक वक्तव्य प्रस्तुत किए। संचालन भगवती पारीक मनु ने कोय
इसके पश्चात आयोजित 'राजस्थानी युवा कविताई रा सुर' सत्र में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए युवा हस्ताक्षरों—अक्षिता (बीकानेर), अनीता सैनी (सीकर), अवंतिका (ब्यावर), जेठानंद पंवार (बाड़मेर), कपिला पालीवाल (जयपुर), गजराज कंवर (नागौर), मीनाक्षी पारीक सपना वर्मा (रिंगस) तथा कृष् गौड़, विप्लव व्यास (जयपुर) ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं का पाठ किया। संचालन कामना राजावत ने किया।
समापन सत्र की वरिष्ठ साहित्यकार मांन् कंवर मैना, डॉ गोरिशंकर् निमीवाल तथा हस्तीमल आर्य हस्ती रहे। वक्ताओं ने राजस्थानी भाषा के संरक्षण, महिला लेखन की सशक्त उपस्थिति और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर प्रमोद शर्मा सतीश शर्मा अंशु व्यास, पवन, गंगाबिशन बिश्नोई,गौरीशंकर निमीवाल लोकेश कुमार साहिल आदि गणमान्य सुधिजन उपस्थित रहे।