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A husband caught his wife cheating with her lover. He beat her. #action #strictaction

Badgaon, Udaipur | Jan 25, 2026

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उदयपुर ब्रेकिंग

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक

जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट मिनी सभागार में चल रही है बैठक 

बैठक में पिछले वर्ष बारिश के दौरान जल भराव वाले क्षेत्रों में एहतियातन किए गए कार्यों की ली जानकारी, दिए आवश्यक दिशा निर्देश

जिला कलेक्टर ने जल प्रवाह मार्गों, नालों आदि को जल्द से जल्द साफ कराने के दिए निर्देश

किसी भी तरह की आपात स्थिति के दौरान त्वरित राहत और बचाव कार्य के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के भी दिए निर्देश

बैठक में नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना, एडीएम प्रशासन दीपेंद्र सिंह राठौड़, एडीएम सिटी जितेंद्र ओझा, सीईओ जिला परिषद विरमाराम सहित संबंधित अधिकारी है उपस्थित

उदयपुर ब्रेकिंग जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट मिनी सभागार में चल रही है बैठक बैठक में पिछले वर्ष बारिश के दौरान जल भराव वाले क्षेत्रों में एहतियातन किए गए कार्यों की ली जानकारी, दिए आवश्यक दिशा निर्देश जिला कलेक्टर ने जल प्रवाह मार्गों, नालों आदि को जल्द से जल्द साफ कराने के दिए निर्देश किसी भी तरह की आपात स्थिति के दौरान त्वरित राहत और बचाव कार्य के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के भी दिए निर्देश बैठक में नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना, एडीएम प्रशासन दीपेंद्र सिंह राठौड़, एडीएम सिटी जितेंद्र ओझा, सीईओ जिला परिषद विरमाराम सहित संबंधित अधिकारी है उपस्थित

Badgaon, Udaipur | Jun 8, 2026

साकेत साहित्य संस्थान  उप शाखा
जिला उदयपुर  ने " साहित्य में पर्यावरण सरंक्षण" विषय पर विचार   गोष्ठी एव काव्य पाठ का किया आयोजन

साकेत साहित्य संस्थान राजसमंद की , उप   शाखा जिला उदयपुर ने झाड़ोल (फ) मुख्यालय पर आज "साहित्य में पर्यावरण संरक्षन " विषय पर विचार गोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन जे आर शर्मा ,  स्नातकोत्तर महाविद्यालय झाड़ोल में किया ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार ,पूर्व प्राचार्य भेरूलाल लोहार,विशिष्ट अतिथि श्री जगदीश जी जोशी,वरिष्ठ साहित्यकार व्यंग्यकार ,और , अध्यक्षता  , डॉ महावीर जैन प्राचार्य जे आर  शर्मा महाविद्यालय झाडोल ने की।अतिथियों ने , मां सरस्वती के दीप प्रज्जवल कर वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया । साकेत साहित्य संस्थान जिला उदयपुर जिला अध्यक्ष कार्यक्रम संयोजक मदन जोशी सार्थक युवा साहित्यकार ने मंचासीन अतिथियों का तिलक उपरना ओढ़ाकर स्वागत अभिनन्दन किया ,जिसके बाद कार्यक्रम  मुख्य  उद्देश्य की और गतिमान हुआ ।सर्वप्रथम  जिला अध्यक्ष ने , साकेत साहित्य संस्थान , का सभी अतिथियों से ,साहित्यकारों से परिचय कराया उसका उद्देश्य बताया और उसकी वर्तमान गतिविधियों पर प्रकाश डाला।फिर आज के विचार गोष्ठी का मुख्य विषय साहित्य में पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार प्रस्तुत किये ,इन्होने वेद,पुराण, इतिहास,रामायण, महाभारत,श्री मदभागवत गीता, और  , हिंदी साहित्य में किस प्रकार , पर्यावरण संरक्षण को बताया है कैसे किया जाता था को पटल पर प्रस्तुत किया जोशी ने बताया कि वेद सिर्फ पूजा की किताब नहीं ,धरती बचाने का पहला संविधान है ,रामायण सिर्फ कथा नहीं एक इको मैन्युअल सिस्टम है जिसमें वन संरक्षण ,जल स्रोतो की पूजा ,पशु पक्षी से मित्रता,पंचतत्व् संतुलन,और अहिंसा को प्रमुख स्थान दिया ,साहित्य कहता हैं पेड़ गिनो मत,पेड़ से रिश्ता जोड़ो तभी वो कटेगा नहीं और अंत मे बताया हर पुराण ने पृथ्वी को माता, प्रकृति को देव, मानकर जीने का विज्ञान दिया ।
डॉक्टर महावीर जैन ने पर्यावरण की आधुनिक स्तिथि को सबके समक्ष रखा और संरक्षण के उपाय बताये,राजीव गौड़ प्रधानाचार्य ने नदियों की बिगड़ते हालात ,प्रदूषित जल ,और पर्यावरण प्रदूषण के लिए मानव को जिम्मेेदार बताया ,मानव ही स्वयं प्रदूषण न करे तो ,  जल,पृथ्वी, और प्रकृति  सुरक्षित रहेगी ,समाजसेवी कृपा शंकर जोशी ने एक प्रेरक गीत गाकर पर्यावरण का संदेश दिया ,डॉक्टर सतीश जोशी ने धरती माँ को बचाने का आहवान कविता के द्वारा   किया,श्री मती सिद्धि जैन युवा कवयित्री ने धरती की करुण पुकार को कविता के माध्यम से सुनाया,प्रोफेसर जगदीश ने ,प्रकृति के प्रति मानव की प्रेम को अपने विचारों से प्रकट किया ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भेरुलाल जी साकेत ने साकेत संस्थान के इस प्रयास की सराहना की और पर्यावरण सुंदर स्वच्छ बनाने की प्रेरणा दी।अंत मे ,साकेत साहित्य संस्थान के उपाध्यक्ष जगदीश जोशी ने सुंदर आयोजन के लिए सभी साहित्यकारो को बधाई दी और ,पर्यावरण संरक्षण पर एक बेहद मार्मिक रचना सुनाई और जागरूकता का संदेश दिया ।कार्यक्रम के अंत में ,साकेत ,संस्थान के मुख्य पटल पर ,आने वाली रचनाओं की 15- 15 दिवस समीक्षा करने वाले जगदीश जोशी ,श्री मती सिद्धि जैन,खुमान लाल शर्मा को संस्था ने प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया ।और ,कार्यक्रम संयोजक जिला अध्यक्ष में सभी का आभार व्यक्त किया ।

साकेत साहित्य संस्थान उप शाखा जिला उदयपुर ने " साहित्य में पर्यावरण सरंक्षण" विषय पर विचार गोष्ठी एव काव्य पाठ का किया आयोजन साकेत साहित्य संस्थान राजसमंद की , उप शाखा जिला उदयपुर ने झाड़ोल (फ) मुख्यालय पर आज "साहित्य में पर्यावरण संरक्षन " विषय पर विचार गोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन जे आर शर्मा , स्नातकोत्तर महाविद्यालय झाड़ोल में किया ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार ,पूर्व प्राचार्य भेरूलाल लोहार,विशिष्ट अतिथि श्री जगदीश जी जोशी,वरिष्ठ साहित्यकार व्यंग्यकार ,और , अध्यक्षता , डॉ महावीर जैन प्राचार्य जे आर शर्मा महाविद्यालय झाडोल ने की।अतिथियों ने , मां सरस्वती के दीप प्रज्जवल कर वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया । साकेत साहित्य संस्थान जिला उदयपुर जिला अध्यक्ष कार्यक्रम संयोजक मदन जोशी सार्थक युवा साहित्यकार ने मंचासीन अतिथियों का तिलक उपरना ओढ़ाकर स्वागत अभिनन्दन किया ,जिसके बाद कार्यक्रम मुख्य उद्देश्य की और गतिमान हुआ ।सर्वप्रथम जिला अध्यक्ष ने , साकेत साहित्य संस्थान , का सभी अतिथियों से ,साहित्यकारों से परिचय कराया उसका उद्देश्य बताया और उसकी वर्तमान गतिविधियों पर प्रकाश डाला।फिर आज के विचार गोष्ठी का मुख्य विषय साहित्य में पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार प्रस्तुत किये ,इन्होने वेद,पुराण, इतिहास,रामायण, महाभारत,श्री मदभागवत गीता, और , हिंदी साहित्य में किस प्रकार , पर्यावरण संरक्षण को बताया है कैसे किया जाता था को पटल पर प्रस्तुत किया जोशी ने बताया कि वेद सिर्फ पूजा की किताब नहीं ,धरती बचाने का पहला संविधान है ,रामायण सिर्फ कथा नहीं एक इको मैन्युअल सिस्टम है जिसमें वन संरक्षण ,जल स्रोतो की पूजा ,पशु पक्षी से मित्रता,पंचतत्व् संतुलन,और अहिंसा को प्रमुख स्थान दिया ,साहित्य कहता हैं पेड़ गिनो मत,पेड़ से रिश्ता जोड़ो तभी वो कटेगा नहीं और अंत मे बताया हर पुराण ने पृथ्वी को माता, प्रकृति को देव, मानकर जीने का विज्ञान दिया । डॉक्टर महावीर जैन ने पर्यावरण की आधुनिक स्तिथि को सबके समक्ष रखा और संरक्षण के उपाय बताये,राजीव गौड़ प्रधानाचार्य ने नदियों की बिगड़ते हालात ,प्रदूषित जल ,और पर्यावरण प्रदूषण के लिए मानव को जिम्मेेदार बताया ,मानव ही स्वयं प्रदूषण न करे तो , जल,पृथ्वी, और प्रकृति सुरक्षित रहेगी ,समाजसेवी कृपा शंकर जोशी ने एक प्रेरक गीत गाकर पर्यावरण का संदेश दिया ,डॉक्टर सतीश जोशी ने धरती माँ को बचाने का आहवान कविता के द्वारा किया,श्री मती सिद्धि जैन युवा कवयित्री ने धरती की करुण पुकार को कविता के माध्यम से सुनाया,प्रोफेसर जगदीश ने ,प्रकृति के प्रति मानव की प्रेम को अपने विचारों से प्रकट किया ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भेरुलाल जी साकेत ने साकेत संस्थान के इस प्रयास की सराहना की और पर्यावरण सुंदर स्वच्छ बनाने की प्रेरणा दी।अंत मे ,साकेत साहित्य संस्थान के उपाध्यक्ष जगदीश जोशी ने सुंदर आयोजन के लिए सभी साहित्यकारो को बधाई दी और ,पर्यावरण संरक्षण पर एक बेहद मार्मिक रचना सुनाई और जागरूकता का संदेश दिया ।कार्यक्रम के अंत में ,साकेत ,संस्थान के मुख्य पटल पर ,आने वाली रचनाओं की 15- 15 दिवस समीक्षा करने वाले जगदीश जोशी ,श्री मती सिद्धि जैन,खुमान लाल शर्मा को संस्था ने प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया ।और ,कार्यक्रम संयोजक जिला अध्यक्ष में सभी का आभार व्यक्त किया ।

Badgaon, Udaipur | Jun 8, 2026

‘साइकिल ऑफ लाईफ’ में मंचित की गई बाप-बेटे के संबंधों की मार्मिक कथा

उदयपुर, 7 जून। जीवन यात्रा के उतार-चढ़ाव तथा बाप-बेटे के संबंधों की मार्मिक कथा रविवार की शाम शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में मंचित की गई। यह आयोजन पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर द्वारा प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत किया गया।
पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि रंगशाला के अंतर्गत प्रिज्म थिएटर सोसायटी दिल्ली द्वारा साइकिल ऑफ लाईफ नाटक का मंचन रविवार को शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में किया गया। इस नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन गिन्नी बब्बर ने की। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में इस प्रभावशाली प्रस्तुति को खूब सराहा गया।
नाटक में ललित प्रकाश ने बुजुर्ग बाप, निशांत कुमार ठाकुर ने बेटे तथा ज्योति नागपाल ने मां की भूमिका निभाते हुए नाटक में जीवन चक्र का बखूबी चित्रण किया। बाप-बेटे की नोकझोंक से शुरू होकर नाटक बाप की मृत्यु उपरांत बेटे के जीवन में बदलाव तथा इस पूरे परिदृश्य में मां की स्थिति का चित्रण अभिनेताओं ने जीवंत कर दिया। नाटक में लाइटिंग का दायित्व निर्वहन विकास बाहरी ने किया।
रंगमंच प्रेमियों ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की इस पहल की प्रशंसा करते हुए ऐसे आयोजनों के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, कार्यक्रम अधिशाषी हेमंत मेहता, सिद्धांत भटनागर सहित केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक (वित्तीय एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया।

‘साइकिल ऑफ लाईफ’ में मंचित की गई बाप-बेटे के संबंधों की मार्मिक कथा उदयपुर, 7 जून। जीवन यात्रा के उतार-चढ़ाव तथा बाप-बेटे के संबंधों की मार्मिक कथा रविवार की शाम शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में मंचित की गई। यह आयोजन पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर द्वारा प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत किया गया। पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि रंगशाला के अंतर्गत प्रिज्म थिएटर सोसायटी दिल्ली द्वारा साइकिल ऑफ लाईफ नाटक का मंचन रविवार को शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में किया गया। इस नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन गिन्नी बब्बर ने की। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में इस प्रभावशाली प्रस्तुति को खूब सराहा गया। नाटक में ललित प्रकाश ने बुजुर्ग बाप, निशांत कुमार ठाकुर ने बेटे तथा ज्योति नागपाल ने मां की भूमिका निभाते हुए नाटक में जीवन चक्र का बखूबी चित्रण किया। बाप-बेटे की नोकझोंक से शुरू होकर नाटक बाप की मृत्यु उपरांत बेटे के जीवन में बदलाव तथा इस पूरे परिदृश्य में मां की स्थिति का चित्रण अभिनेताओं ने जीवंत कर दिया। नाटक में लाइटिंग का दायित्व निर्वहन विकास बाहरी ने किया। रंगमंच प्रेमियों ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की इस पहल की प्रशंसा करते हुए ऐसे आयोजनों के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, कार्यक्रम अधिशाषी हेमंत मेहता, सिद्धांत भटनागर सहित केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक (वित्तीय एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया।

Badgaon, Udaipur | Jun 8, 2026

गोगुंदा राजतिलकस्थली की दुर्दशा पर फूटा करणी सेना का आक्रोश, जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने दिया आंदोलन का अंतिम अल्टीमेटम

उदयपुर/गोगुंदा। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने गोगुंदा स्थित वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक राजतिलकस्थली की बदहाल और शर्मनाक स्थिति को लेकर शासन, पर्यटन विभाग एवं जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया है।
 उन्होंने कहा कि हिंदू सम्राट वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान के स्वाभिमान, त्याग, राष्ट्रभक्ति और सनातन संस्कृति के सबसे बड़े प्रतीक हैं। जिन्होंने जंगलों में रहकर, घास की रोटियां खाकर भी मातृभूमि और स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया, आज उसी महान योद्धा की राजतिलकस्थली और प्रतिमा बदहाली का शिकार होकर व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने बताया कि आज से लगभग 3 महीने पूर्व लगातार शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ गोगुंदा राजतिलकस्थली का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान वहां की स्थिति बेहद चिंताजनक और शर्मनाक मिली। राजतिलकस्थली के अंदर खड़ी वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा पूरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में दिखाई दी। प्रतिमा का रंग उखड़ चुका है, कई हिस्से टूट चुके हैं तथा प्रतिमा जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। 
वहीं राजतिलकस्थली के अंदर बने होल, बैठने की व्यवस्थाएं एवं पूरा परिसर भी टूट-फूट कर खंडहर जैसी स्थिति में बदल चुका है।

उन्होंने कहा कि निरीक्षण के तुरंत बाद जिला कलेक्टर, पर्यटन विभाग एवं राज्य सरकार को लिखित रूप से शिकायत और ज्ञापन भेजा गया था। उस दौरान शासन और पर्यटन विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही प्रतिमा का संरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य करवाया जाएगा, लेकिन 3 महीने गुजर जाने के बावजूद आज तक एक भी कार्य शुरू नहीं हुआ। यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि मेवाड़ के गौरव और इतिहास के प्रति उदासीनता का बड़ा उदाहरण है।
जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने कहा कि यह केवल एक प्रतिमा या भवन का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, स्वाभिमान और इतिहास का विषय है। जिस महाराणा प्रताप के नाम पर नेता चुनावों में वोट मांगते हैं, मंचों से बड़े-बड़े भाषण देते हैं और स्वाभिमान की राजनीति करते हैं, उन्हीं महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक धरोहर आज उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना किसी राजनीतिक पार्टी, किसी नेता या किसी व्यक्ति विशेष का व्यक्तिगत विरोध नहीं कर रही है। लेकिन जो जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं और शासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी हैं, उनकी यह नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण करें और तत्काल विकास कार्य शुरू करवाएं।

जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी 17 जून को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती है। यदि उससे पहले गोगुंदा राजतिलकस्थली एवं महाराणा प्रताप प्रतिमा के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और विकास कार्य शुरू नहीं किए गए तो 17 जून के बाद सर्व समाज को साथ लेकर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। गोगुंदा में धरना-प्रदर्शन होगा, जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का खुलकर विरोध किया जाएगा और जनता के बीच जाकर जवाब मांगा जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह हमारी खुली चेतावनी और अंतिम अल्टीमेटम है। महाराणा प्रताप के नाम पर राजनीति करने वालों को अब केवल भाषण नहीं बल्कि धरातल पर कार्य करके दिखाना होगा। यदि समय रहते कार्य शुरू नहीं हुआ तो आने वाले समय में जनता भी जवाब देना जानती है।

अंत में जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने कहा कि यदि हम अपने स्वाभिमान, इतिहास और हिंदू सम्राट वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की धरोहर को सुरक्षित नहीं रख सकते तो यह पूरे समाज और व्यवस्था के लिए शर्म की बात है। महाराणा प्रताप का सम्मान केवल शब्दों से नहीं बल्कि उनकी धरोहरों के संरक्षण और सम्मान से सिद्ध होगा।

गोगुंदा राजतिलकस्थली की दुर्दशा पर फूटा करणी सेना का आक्रोश, जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने दिया आंदोलन का अंतिम अल्टीमेटम उदयपुर/गोगुंदा। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने गोगुंदा स्थित वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक राजतिलकस्थली की बदहाल और शर्मनाक स्थिति को लेकर शासन, पर्यटन विभाग एवं जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि हिंदू सम्राट वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान के स्वाभिमान, त्याग, राष्ट्रभक्ति और सनातन संस्कृति के सबसे बड़े प्रतीक हैं। जिन्होंने जंगलों में रहकर, घास की रोटियां खाकर भी मातृभूमि और स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया, आज उसी महान योद्धा की राजतिलकस्थली और प्रतिमा बदहाली का शिकार होकर व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने बताया कि आज से लगभग 3 महीने पूर्व लगातार शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ गोगुंदा राजतिलकस्थली का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान वहां की स्थिति बेहद चिंताजनक और शर्मनाक मिली। राजतिलकस्थली के अंदर खड़ी वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा पूरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में दिखाई दी। प्रतिमा का रंग उखड़ चुका है, कई हिस्से टूट चुके हैं तथा प्रतिमा जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। वहीं राजतिलकस्थली के अंदर बने होल, बैठने की व्यवस्थाएं एवं पूरा परिसर भी टूट-फूट कर खंडहर जैसी स्थिति में बदल चुका है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के तुरंत बाद जिला कलेक्टर, पर्यटन विभाग एवं राज्य सरकार को लिखित रूप से शिकायत और ज्ञापन भेजा गया था। उस दौरान शासन और पर्यटन विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही प्रतिमा का संरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य करवाया जाएगा, लेकिन 3 महीने गुजर जाने के बावजूद आज तक एक भी कार्य शुरू नहीं हुआ। यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि मेवाड़ के गौरव और इतिहास के प्रति उदासीनता का बड़ा उदाहरण है। जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने कहा कि यह केवल एक प्रतिमा या भवन का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, स्वाभिमान और इतिहास का विषय है। जिस महाराणा प्रताप के नाम पर नेता चुनावों में वोट मांगते हैं, मंचों से बड़े-बड़े भाषण देते हैं और स्वाभिमान की राजनीति करते हैं, उन्हीं महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक धरोहर आज उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना किसी राजनीतिक पार्टी, किसी नेता या किसी व्यक्ति विशेष का व्यक्तिगत विरोध नहीं कर रही है। लेकिन जो जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं और शासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी हैं, उनकी यह नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण करें और तत्काल विकास कार्य शुरू करवाएं। जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी 17 जून को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती है। यदि उससे पहले गोगुंदा राजतिलकस्थली एवं महाराणा प्रताप प्रतिमा के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और विकास कार्य शुरू नहीं किए गए तो 17 जून के बाद सर्व समाज को साथ लेकर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। गोगुंदा में धरना-प्रदर्शन होगा, जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का खुलकर विरोध किया जाएगा और जनता के बीच जाकर जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह हमारी खुली चेतावनी और अंतिम अल्टीमेटम है। महाराणा प्रताप के नाम पर राजनीति करने वालों को अब केवल भाषण नहीं बल्कि धरातल पर कार्य करके दिखाना होगा। यदि समय रहते कार्य शुरू नहीं हुआ तो आने वाले समय में जनता भी जवाब देना जानती है। अंत में जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने कहा कि यदि हम अपने स्वाभिमान, इतिहास और हिंदू सम्राट वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की धरोहर को सुरक्षित नहीं रख सकते तो यह पूरे समाज और व्यवस्था के लिए शर्म की बात है। महाराणा प्रताप का सम्मान केवल शब्दों से नहीं बल्कि उनकी धरोहरों के संरक्षण और सम्मान से सिद्ध होगा।

Badgaon, Udaipur | Jun 8, 2026

फतेहसागर झील में मोबाइल निकालने कूदा उज्जैन बोटिंग का ऑपरेटर,डूबने से मौत !#rajdhani_khabar #udaipur #udaipurpolice #viralvideos

फतेहसागर झील में मोबाइल निकालने कूदा उज्जैन बोटिंग का ऑपरेटर,डूबने से मौत !#rajdhani_khabar #udaipur #udaipurpolice #viralvideos

Badgaon, Udaipur | Jun 7, 2026