गोगुंदा राजतिलकस्थली की दुर्दशा पर फूटा करणी सेना का आक्रोश, जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने दिया आंदोलन का अंतिम अल्टीमेटम
उदयपुर/गोगुंदा। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने गोगुंदा स्थित वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक राजतिलकस्थली की बदहाल और शर्मनाक स्थिति को लेकर शासन, पर्यटन विभाग एवं जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि हिंदू सम्राट वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान के स्वाभिमान, त्याग, राष्ट्रभक्ति और सनातन संस्कृति के सबसे बड़े प्रतीक हैं। जिन्होंने जंगलों में रहकर, घास की रोटियां खाकर भी मातृभूमि और स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया, आज उसी महान योद्धा की राजतिलकस्थली और प्रतिमा बदहाली का शिकार होकर व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने बताया कि आज से लगभग 3 महीने पूर्व लगातार शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ गोगुंदा राजतिलकस्थली का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान वहां की स्थिति बेहद चिंताजनक और शर्मनाक मिली। राजतिलकस्थली के अंदर खड़ी वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा पूरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में दिखाई दी। प्रतिमा का रंग उखड़ चुका है, कई हिस्से टूट चुके हैं तथा प्रतिमा जर्जर हालत में पहुंच चुकी है।
वहीं राजतिलकस्थली के अंदर बने होल, बैठने की व्यवस्थाएं एवं पूरा परिसर भी टूट-फूट कर खंडहर जैसी स्थिति में बदल चुका है।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण के तुरंत बाद जिला कलेक्टर, पर्यटन विभाग एवं राज्य सरकार को लिखित रूप से शिकायत और ज्ञापन भेजा गया था। उस दौरान शासन और पर्यटन विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही प्रतिमा का संरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य करवाया जाएगा, लेकिन 3 महीने गुजर जाने के बावजूद आज तक एक भी कार्य शुरू नहीं हुआ। यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि मेवाड़ के गौरव और इतिहास के प्रति उदासीनता का बड़ा उदाहरण है।
जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने कहा कि यह केवल एक प्रतिमा या भवन का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, स्वाभिमान और इतिहास का विषय है। जिस महाराणा प्रताप के नाम पर नेता चुनावों में वोट मांगते हैं, मंचों से बड़े-बड़े भाषण देते हैं और स्वाभिमान की राजनीति करते हैं, उन्हीं महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक धरोहर आज उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना किसी राजनीतिक पार्टी, किसी नेता या किसी व्यक्ति विशेष का व्यक्तिगत विरोध नहीं कर रही है। लेकिन जो जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं और शासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी हैं, उनकी यह नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण करें और तत्काल विकास कार्य शुरू करवाएं।
जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी 17 जून को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती है। यदि उससे पहले गोगुंदा राजतिलकस्थली एवं महाराणा प्रताप प्रतिमा के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और विकास कार्य शुरू नहीं किए गए तो 17 जून के बाद सर्व समाज को साथ लेकर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। गोगुंदा में धरना-प्रदर्शन होगा, जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का खुलकर विरोध किया जाएगा और जनता के बीच जाकर जवाब मांगा जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह हमारी खुली चेतावनी और अंतिम अल्टीमेटम है। महाराणा प्रताप के नाम पर राजनीति करने वालों को अब केवल भाषण नहीं बल्कि धरातल पर कार्य करके दिखाना होगा। यदि समय रहते कार्य शुरू नहीं हुआ तो आने वाले समय में जनता भी जवाब देना जानती है।
अंत में जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत गढ़पुरा ने कहा कि यदि हम अपने स्वाभिमान, इतिहास और हिंदू सम्राट वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की धरोहर को सुरक्षित नहीं रख सकते तो यह पूरे समाज और व्यवस्था के लिए शर्म की बात है। महाराणा प्रताप का सम्मान केवल शब्दों से नहीं बल्कि उनकी धरोहरों के संरक्षण और सम्मान से सिद्ध होगा।