बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बीच संपन्न हुई मणिमहेश यात्रा, इस बार पिछले वर्षों से काफी कम रही श्रद्धालुओं की संख्या।
हिमाचल 84 टीवी ब्यूरो भरमौर,
उत्तर भारत की प्रसिद्ध श्री मणिमहेश यात्रा-2026 का शनिवार को करीब शाम 4 बजे आधिकारिक रूप से समापन हो गया। इस वर्ष यात्रा में पिछले वर्षों की अपेक्षा श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम रही। सूत्रों के अनुसार इस बार करीब 50 हजार से 70 हजार श्रद्धालुओं के मणिमहेश पहुंचने का अनुमान है।
यात्रा के दौरान भगवान शिव की आस्था के दो प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालुओं ने पवित्र डल झील में शाही स्नान किया। कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर करीब 8 हजार श्रद्धालुओं ने शाही स्नान किया, जबकि राधाष्टमी के बड़े शाही स्नान में करीब 5 से 7 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र डल झील में आस्था की डुबकी लगाई। हालांकि इससे पहले के वर्षों में इन दोनों प्रमुख स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या इससे कई गुना अधिक रहती थी।
राधाष्टमी के शाही स्नान का शुभारंभ शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे डल झील को तोड़ने की पारंपरिक रस्म के साथ हुआ। इसके बाद शुरू हुआ शाही स्नान शनिवार दोपहर करीब 3:28 बजे तक चला। इस तरह करीब 26 घंटे 26 मिनट तक श्रद्धालुओं ने पवित्र डल झील में स्नान किया।
इस बार शाही स्नान के दौरान मणिमहेश की ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी भी हुई। कड़ाके की ठंड और बर्फीले मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कमी नहीं आई और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बर्फबारी के बीच शाही स्नान किया।
यात्रा को लेकर प्रशासन की ओर से भी इस बार व्यापक प्रबंध किए गए थे। पिछले वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत किया गया। यात्रा मार्ग के विभिन्न स्थानों पर मेडिकल कैंप स्थापित किए गए और आपातकालीन सेवाओं को भी सक्रिय रखा गया।
समापन दिवस यानी 19 सितंबर को भी श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रही। हड़सर से मणिमहेश के पैदल यात्रा मार्ग से करीब 750 श्रद्धालु मणिमहेश की ओर रवाना हुए, जबकि हेली टैक्सी सेवा के माध्यम से 344 श्रद्धालु भरमौर से गौरीकुंड पहुंचे। इससे साफ है कि आधिकारिक समापन के दिन भी श्रद्धालुओं का मणिमहेश पहुंचने और वापस लौटने का क्रम जारी रहा।
मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल रहने के कारण इस बार बड़ी दुर्घटनाओं और कैजुअल्टी की संख्या भी कम रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बड़ी यात्रा के दौरान तीन से चार श्रद्धालुओं की मौत की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि अंतिम आधिकारिक आंकड़ा प्रशासन की ओर से जारी किया जाना बाकी है।
आधिकारिक रूप से 25 अगस्त से शुरू हुई मणिमहेश यात्रा का 19 सितंबर को समापन हो गया। श्रद्धालुओं की संख्या भले ही पिछले वर्षों की तुलना में कम रही हो, लेकिन बर्फबारी, कड़ाके की ठंड और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भी श्रद्धालुओं की आस्था और भगवान भोलेनाथ के प्रति विश्वास पूरे यात्रा मार्ग पर दिखाई