120 वर्षों से चली आ रही आस्था की यह डोर… आज भी देवास को एक सूत्र में बांधती है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर देवास की ऐतिहासिक दिंडी यात्रा एक बार फिर केवल परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि भक्ति, समरसता और सामाजिक एकता का उत्सव बनी।
जब भगवान श्रीकृष्ण पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं, तब देवास की गलियों में हर वर्ग, हर समाज और हर आयु के लोग एक साथ दिखाई देते हैं।
कोई बड़ा नहीं, कोई छोटा नहीं…
सब नंदलाल के सेवक बनकर, एक ही भाव में भक्ति में लीन हो जाते हैं।
यही तो देवास की संस्कृति की सबसे सुंदर पहचान है—
जहां आस्था भेद नहीं करती, बल्कि दिलों को जोड़ती है।
120 वर्षों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ आगे बढ़ रही है। राजवाड़े से निकली यह दिंडी जब शहर के बीचों-बीच पहुंचती है, तो लगता है जैसे इतिहास, संस्कृति और वर्तमान एक साथ चल पड़े हों।
इस वर्ष भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और दिंडी यात्रा में देवासवासियों की उमड़ी श्रद्धा, सहभागिता और आत्मीयता ने इस उत्सव को और भी विशेष बना दिया।
आप सभी की उपस्थिति और सहभागिता ने इस परंपरा को केवल जीवंत नहीं रखा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी को और मजबूत किया है।
श्रीकृष्ण की कृपा से देवास में यह भक्ति, प्रेम और समरसता की डोर यूं ही मजबूत होती रहे।
जय श्रीकृष्ण।
#dewas
Dewas Nagar, Dewas | Sep 6, 2026